भागलपुर पहुंचे प्रधानमंत्री, नीतीश कुमार को बताया लाडला मुख्यमंत्री

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वर्षा वर्मा
  • प्रधानमंत्री ने कहा… महाकुंभ के समय में मंदरांचल की इस धरती पर आना सौभाग्य की बात
  •  पिछले दस वर्षों में दूध उत्पादन 14 करोड़ टन से बढ़कर 24 करोड़ टन हो गया है। इसमें बिहार की भी भागीदारी है। यहां दूध संघ प्रतिदिन तीस लाख लीटर दूध खरीदते हैं।

 

भागलपुर :  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भागलपुर स्थित हवाई अड्डा से किसान सम्मान निधि योजना की 19वीं किस्त के रूप में 22 हजार करोड़ रुपये 9.8 करोड़ किसानों के खाते में हस्तांतरित किया। सम्मान निधि के रूप में हर किसान के खाते में दो हजार रुपये भेजे गए। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हमारे साथ देश के कोने-कोने से कई मुख्यमंत्री और करोड़ों किसान जुड़े हैं। महाकुंभ के समय में मंदरांचल की इस धरती पर आना सौभाग्य की बात है। इस धरती में आस्था विरासत और विकसित भारत का सामर्थ्य है। यह तिलकामांझी की धरती है। सिल्क सिटी है।

 

बाबा अजगैवीनाथ की धारा में महाशिवरात्रि की भी तैयारी चल रही है। ऐसे समय में मुझे पीएम किसान निधि की किस्त किसानों को भेजने का सौभाग्य मिला है। एक क्लिक पर 9.8 करोड़ किसानों के खाते में पैसे गए हैं। यहां मौजूद किसान भी देख रहे थे पैसा उनके खाते में आया कि नहीं। उनकी आंखों में चमक दिखी। बिहार के 75 लाख किसानों के खाते में 16 करोड़ रुपये गए। मैं बिहार और देश के किसानों को शुभकामनाएं देता हूं। साथियों मैंने लाल किले से कहा था कि विकसित भारत के चार स्तंभ है, गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और नारी शक्ति। एनडीए सरकार चाहे केंद्र में हो या फिर यहां नीतीश जी के नेतृत्व वाली सरकार, किसान कल्याण हमारी प्राथमिकता में है। किसानों के लिए हमने पूरी शक्ति से काम किया। किसानों को अच्छे बीज, पर्याप्त और सस्ती खाद, सिंचाई, पशुओं का बचाव और आपादा से नुकसान की भरपाई चाहिए। जो लोग लोग पशुओं का चारा खा सकते हैं वे इस स्थिति को बदल नहीं सकते। इसे एनडीए ने बदला है। बीते वर्ष में आधुनिक बीज किसानों को दिए गए। पहले किसान यूरिया के लिए लाठी खाते थे। आज पर्याप्त खाद मिलती है। कोराना के समय में भी खाद की कमी नहीं होने दी।

 

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अगर एनडीए सरकार नहीं होती तो आज भी हमारे किसान भाई-बहनों को खाद के लिए लाठियां खानी पड़तीं। आज भी बरौनी खाद कारखाना बंद होता। दुनिया के अनेक देशों में खाद की बोरी जो तीन हजार में मिल रही है, हम तीन सौ से कम में दे रहे। एनडीए सरकार नहीं होती तो यूरिया की एक बोरी तीन हजार में मिलती। हमारी सरकार किसानों की भलाई के लिए काम करती है। इस कारण यूरिया और डीएपी के लिए जो खर्च किसान करते, वह सरकार कर रही। बीते दस साल में करीब 12 लाख करोड़ रुपये इसके लिए बजट में से दिए हैं। एनडीए सरकार नहीं होती तो आपको पीएम किसान सम्मान निधि भी नहीं मिलती। इसके छह साल पूरे हो गए। अभी तक तीन लाख 70 हजार करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में पहुंच चुके हैं। इसमें कोई बिचौलिया नहीं है। राशि सीधे खाते में जाती है। पहले योजनओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। बिचौलिये ले लेते थे। मोदी और नीतीश जी किसानों का हक किसी को खाने नहीं देंगे। कांग्रेस और जंगलराज वाली सरकार ने खेती का जितना बजट रखा था उससे कहीं ज्यादा पैसा हम किसानों के खाते में भेज चुके हैं। यह भ्रष्टाचारी नहीं कर सकते हैं।

 

कांगेस और जंगलराज वालों के लिए आप किसानों की तकलीफ भी कोई मायने नहीं रखती। पहले बाढ़, सूखा और ओला आदि पर ये लोग किसानों को अपने हाल पर छोड़ देते थे। 2014 में सरकार बनने के बाद हमने कहा, ऐसे नहीं चलेगा। किसान क्रेडिट कार्ड से पौने दो करोड़ क्लेम मिला है। पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। बहनों को लखपति दीदी बनाया जा रहा है। सवा करोड़ लखपति दीदी बन चुकी है। इनमें बिहार की भी हजारों जीविका दीदी शामिल हैं। पिछले दस वर्षों में दूध उत्पादन 14 करोड़ टन से बढ़कर 24 करोड़ टन हो गया है। इसमें बिहार की भी भागीदारी है। यहां दूध संघ प्रतिदिन तीस लाख लीटर दूध खरीदते हैं। डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के प्रयास को हमारे ललन सिंह जी बहुत ही कुशलता से आगे बढ़ा रहे हैं। इनके प्रयास से बिहार में दो परियोजना मोतिहारी का सेंटर आफ एक्सीलेंस और बरौनी का दूध संयंत्र शुरू हुआ है। इससे तीस लाख लोगों को फायदा होगा। मछुआरे भाई को पहले की सरकार ने कोई फायदा नहीं दिया। हमने इन्हें किसान क्रेडिट कार्ड दिया। मछली उत्पादान में बिहार शानदार काम कर रहा। जैसा कि नीतीश जी ने कहा, आज मछली में बिहार आत्मनिर्भर बन गया है। 2013 में मैंने कहा था कि बहार में इतना पानी है फिर भी हम बाहर से मछली क्यों लाते। आज बिहार देश का टाप फइव मछली उत्पादक राज्य बन चुका है। भागलपुर की पहचान तो गंगा जी में रहने वाली डाल्फिन से भी होती रही है। यह नमामि गंगे अभिय…

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