अपराजिता संतोष
हरियाणा में जाटों के रिजर्वेशन के लिए लूटपाट की कई तस्वीरें सामने आई। करोड़ो के नुकसान की खबरें को सुर्खियाँ मिली। बदले में जाटों को रिजर्वेशन दिए जाने की घोषणा हुई। लेकिन आन्दोलन की अब जो खबरें सामने आ रही हैं उसने मानवता को शर्मशार किया है। आन्दोलन की आड़ में महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं की खबर, और उसे दबाये जाने की आशंका निसिचत रूप से समाज के लिए चिंतनिय है। जाट आंदोलन के दौरान मुरथल में हाईवे पर 30 लोगों द्वारा 10 महिलाओं के साथ बदसलूकी और गैंगरेप की खबरें सामने आई है। अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोनीपत जिले में नेशनल हाइवे पर सोमवार की सुबह कुछ वाहनों को रोककर उनमें सवार महिलाओं के साथ खेतों में ले जाकर सामूहिक बलात्कार किया गया। महिलाओं के साथ हुई घटना के बाद उन्होंने हाईवे पर ही मौजूद ढाबे में जाकर मदद मांगी। हालांकि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने इस बात से इन्कार किया है लेकिन दबे स्वरों में वहां मौजूद ढाबे वालों ने इस बारे में बताया कि 22 फरवरी की सुबह कुछ महिलाएं बुरी हालत में मदद मांग रहीं थीं। ढाबा मालिक के अनुसार देर रात करीब 3 बजे कर्मचारियों ने फोन कर बताया कि वहां कुछ महिलाएं जोर-जोर से रो रहीं थीं। कर्मचारियों के अनुसार एक लड़की बदहवास हालत में बिना कपड़ों के सड़क पर भाग रही थी और जाकर पानी में बैठ गई। बता दें कि लगातार हिंसा के चलते वहां के सारे ढाबे बंद थे। लेकिन वहां काम करने वाले सभी अंदर थे। ढाबे वालों के अलावा मुरथल में तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने भी कहा कि वहां पर हिंसा हुई थी। मौके पर कई महिलाओं के फटे हुए कपड़े और अंडरगारमेंट्स मिलें हैं हालांकि यह पुष्टि नहीं की गई है यह कपड़े पीड़ित महिलाओं के ही हैं। ढाबे वालों के अलावा मुरथल में तैनात सीआरपीएफ के जवानों ने भी कहा कि वहां पर हिंसा हुई थी।
कोर्ट के आदेश के बाद जगी सरकार, लीपापोती की कवायद जारी
सरकार को फटकार लगी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस एनके सांघी को इस इस घटना ने इस क़दर झकझोरा कि उन्होंने स्वप्रेरित (Suo motu) कार्रवाई करते हुए घटना की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिये हैं। स्वत: संज्ञान लिए जाने के बाद इस मामले में गुरुवार को सुनवाई हुई। वहीं इस मामले में एसपी अभिषेक गर्ग ने कहा है कि कपड़े मिलने से रेप की पुष्टि नहीं होती और पुलिस इस मामले की जांच कर रही है!
इससे पहले हाईकोर्ट ने पुलिस के रवैये पर सवालिया निशान खड़े किए हैं! हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सरकार से मामले में विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है! इतना ही नहीं, कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश में बेटियां महफूज नहीं हैं !
सामने आ रहा है पुलिस का काला चेहरा
क़रीब दस महिलाओं के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के सनसनीखेज़ मामले को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए हरियाणा पुलिस ने बेजोड़ तरक़ीब अपनायी कि पीड़ित ही अपनी ज़ुबान सिल लें. यानी, जब शिकायत ही नहीं होगी तो कार्रवाई क्यों होगी! इसीलिए अब पुलिस पूरे मामले को झूठा और मनगढ़ंत बता रही है। इसके बाद सरकार ने कहा है कि इन खबरों की पूरी जांच डीआईजी करेंगे। मामले को लेकर डीआईजी वायपी सिंघल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि अभी घटना की पुष्टि नहीं हुई है। हमने चार लोगों की एक जांच कमेटी बनाई है साथ ही तीन हेल्पलाइन नंबर भी शुरू किए हैं। अगर किसी को भी इसके बारे में जानकारी हो तो हमें सूचना करें उनका नाम गुप्त रखा जाएगा।
लोग दबे स्वरों में घटना को सही बता रहे हैं। चश्मदीदों के मुताबिक, दंगाईयों ने मुरथल के पास कारों से सबको उतारकर उसे आग के हवाले कर दिया। मर्दों को एक ओर खदेड़कर औरतों को हसनपुर और कुरद गाँवों के खेतों में घसीट लिया गया। महिलाओं के कपड़े फाड़ डाले गये, उन्हें बर्बरता से मारा-पीटा गया और फिर दंगाईयों ने उनके साथ अपना मुँह काला किय।. सारा क़हर झेलने के बाद आधी रात को महिलाओं ने हिम्मत करके पड़ोस के गाँवों में पनाह ली. गाँव वालों ने उन्हें लाज़ ढ़कने के लिए कपड़े दिये। वहीं उन्हें लेकर अमरीक सुखदेव ढ़ाबा पहुँचे। वहाँ औरतें अपनी परिवारों से मिलीं. पुलिस को पूरा ब्यौरा दिया गया। लेकिन पुलिस ने क़ानूनी झंझट का वास्ता देकर पीड़ितों को अपनी और फ़ज़ीहत नहीं करवाने का मशविरा दिया। वहीं पीड़ितों के लिए वाहनों का इंतज़ाम हुआ। उन्हें ज़ुबान सिलकर रखने की हिदायत के साथ उनके ठिकानों पर भेज दिया गया।
ढाबे मालिकों से हो सख्ती से पूछताछ
जाट आन्दोलन के कारन भले ही यह कहा जा रहा हो की ढाबे बंद थे लेकिन इन ढाबे मालिकों से सख्ती से पूछताछ करने पर अवस्य ही सुराग सामने आ जायेंगे क्योंकि या घटनाये ढाबे से कुछ सो मीटर की दुरी पर घटित हुई हैं।


