गाजीपुर से अमितेश सिंह की रिपोर्ट
पूर्वांचल सहित जनपद गाजीपुर में गंगा का बढाव,गंगा की फूंफकार बदस्तूर जारी है। जल स्तर में 2 सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है। जिससे गंगा जल स्तर में वृद्धि होने से शहर समेत ग्रामीण इलाकों के तटवर्ती क्षेत्र के सैकड़ों बीघे खेत गंगा में समाहित हो गए है, और बाकी हिस्सों में पानी भर गया है। गाजीपुर के शेरपुर गांव के निवासी संतोष कुमार राय कहते हैं..गंगा का पानी मेरे गाँव के चारों ओर फैल गया है। पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया है। एक जगह भी ऐसा नहीं जहां पानी नहीं। पूरे गाँव के भीतर भी पानी आ गया है। अनेक लोग इसमें बेघर हो गये हैं। मनुष्य और मवेशी दोनों के ऊपर यह आपदा कहर बनकर बरस रही है। गाजीपुर का जमानियां तहसील इस बाढ़ में सबसे ज्यादा प्रभावित है। वहीं जंगीपुर क्षेत्र की बेसो नदी पर बना बोरसिया के पुल के ऊपर से पानी बह कर जा रहा है और लोग अपनी जान जोखिम में डालकर उसमें से आने जाने को विवश हैं। वहीं केंद्रीय जल आयोग की स्थानीय इकाई के मुताबिक दोपहर दो बजे जल स्तर खतरे के निशान 63.105 मीटर से 0.66 मीटर ऊपर है। इसके साथ ही सहयोगी नदियां गोमती, कर्मनाशा, बेसो में भी बढ़ाव शुरू हो गया है। तटवर्ती हिस्से के निचले इलाके में जल भराव होने लगा है। वहां के लोग दहशत में हैं। सुरक्षित स्थान तलाशने लगे हैं। शहर के ददरीघाट, कलेक्ट्रेट घाट, पोश्ता घाट, चितनाथ घाट, बौढ़हिया घाट की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं।
जानकारी के मुताबिक जमानिया, सैदपुर, मोहम्मदाबाद और सदर तहसील के तकरीबन दर्जनों गांव में बाढ़ का पानी घुस चुका है। लोग बाढ़ की वजह से काफी भयभीत है। वहीं गंगा के साथ गाजीपुर की छोटी नदियाँ भी उफान पर हैं जंगीपुर क्षेत्र की बेसो नदी पर बना बोरसिया के पुल के ऊपर से पानी बह कर जा रहा है और लोग अपनी जान जोखिम में डालकर उसमें से आने जाने को विवश हैं। वहीं ग्रामीण सुभाष और शिवगौरी के मुताबिक बाढ़ का पानी घरों के अंदर घुस चुका है। सैकड़ो बीघा फसल की खेती डूब गई है लेकिन जिला प्रशासन और सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है। गाजीपुर शहर में भी कई तटवर्ती ईलाको, कालोनियों, और बाजार में पानी घुस चुका है, गंगा किनारे बसे गाजीपुर शहर के कई हिस्सों जैसे स्टीमरघाट, सिकन्दर पुर, नवापुरा, तुलसिया का पुल, शास्त्री नगर और बंधवा जैसे मोहल्ले और ईलाके बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं, बँधवा कालोनी में तो बकायदा नाव चल रही है। बाढ़ के पानी से नाली और नालों के जरिए नगर के मध्य तुलसिया पुल के मोहल्ले और बाजार में भी गन्दा और बदबूदार पानी घुस चुका है जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामाना उठाना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों की माने तो गलियों, सड़कों के साथ अब पानी मोहल्ले और घरों में घुस गया है जिससे काफी दिक्कत हो गयी है, शहरी ईलाके में शासन, प्रशासन की फिलहाल कोई मदद नहीं पहुँच पायी है।
प्रशासन अलर्ट क्या कहते हैं डीएम
डीएम संजय कुमार खत्री ने बताया कि गाजीपुर में बाढ़ से निपटने के लिए जिला प्रशासन तैयार हैं। और बाढ़ प्रवावित तहसीलों के इलाकों में एसडीएम को निर्देशित किया गया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों पर हमेशा नजर बनाए रखे। प्रशासनिक दांवों के अनुसार लगभग 400 गांव के तकरीबन 2 लाख लोग बाढ़ की चपेट में है और जिला प्रशासन तत्काल 25 से 30 ज्यादा बाढ़ प्रभावित गांवों को तुरन्त खाली कराने की अपील भी कर रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन के साथ एनडीआरएफ की टीमें भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गस्त कर लोगों के बीच बाढ़ की जानकारी के साथ राहत कार्य कर रही है। ऐसे में ही आज अचानक बाढ़ में डूबे एक बच्चे को बचाने का लाइव नजारा एनडीआरएफ टीम के साथ देखने को मिला। लेकिन दुर्भाग्यवश एनडीआरएफ टीम को बच्चा जीवीत नहीं मिला।
एनडीआरएफ की टीम लगातार सक्रिय
आज दिनभर एनडीआरएफ के साथ कैमरा टीम भी बाढ़ग्रस्त गांव में घुमकर बाढ़ पीड़ितों का नजदीक से हाल जाना। उसी दौरान अचानक जमानिया तहसील के रघुनाथपुर गांव में एक बच्चे के डूबने की खबर मिली। तो तुरन्त एनडीआरएफ टीम भी मौके पर पहुंचीं। जहां गांव वालों के साथ एनडीआरएफ के जवानों ने पानी में से डूबे बच्चे को रेस्क्यू कर निकाला और उसे नाव में लाकर देखा तो बच्चे की मौत हो चुकी थी। फिर एनडीआरएफ की टीम बच्चे के शव को लेकर गांव में पहुंची। जहां परिवार वालों के साथ पूरे गांव में मातम पसर गया। घर वाले दहाड़े मारकर मातम करने लगे। एक तो बाढ़ का लगातार बढ़ता प्रकोप और ऊपर से इस तरह की घटनाएं इस क्षेत्र में आए दिन हो रही है। अबतक प्राप्त सूचना के अनुसार जिले में बाढ़ से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ से मची अफरा तफरी और घबराए लोगों को जिला प्रशासन बार बार अपील कर रहा है कि तटवर्ती गांव के लोग तत्काल गांव खाली कर बाढ़ राहत शिविर या फिर सुरक्षित स्थानों पर चले जाए। क्योकि अभी पानी अधा सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ रहा है। जिसके आने वाले समय में रफ्तार और बढेगी क्योकि माता टीला और बेतवा बांध से लगभग 7 लाख क्यूसेक पानी और आने की आशंका दो ही दिनों जताई जा रही है। ऐसे में लोग घरों और मवेशियों का मोह भी नहीं छोड़ पा रहे है। ऐसे हालात में एनडीआरएफ की टीम ने दवाईयों का वितरण भी साथ ही साथ किया।




