नई दिल्ली: एक तरफ जहां केंद्र सरकार ने साफ कह दिया है कि केंद्र सरकार देशभर में किसानों का कर्ज माफ नहीं करेगी। वहीं विभिन्न राज्यों में चल रहे किसान आदोलन के मद्देनजर राज्य सरकारों पर किसानों के कर्ज माफी का दबाव है। कुछेक राज्यों ने इस पर फैसला भी लिया है और जो राज्य अभी ऐसा नहीं कर पायें हैं वहां किसान इसके लिए दबाव बना रहे हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि केंद्र कृषि कर्ज माफ करने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कर्ज माफ करने के बजाय राजकोषीय घाटे को काबू रखने पर जोर देगी। एक सवाल के जवाब में कहा कि कृषि कर्ज माफ करने का प्रस्ताव नहीं है। सरकार के समक्ष राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजटीय प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून के लक्ष्य हैं। उनको हासिल करना है। आम बजट 2017-18 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 3.2 प्रतिशत पर रखा गया है। यह बीते वित्त वर्ष के 3.5 प्रतिशत के आंकड़े से कम है। पूर्व राजस्व सचिव एनके सिंह की अध्यक्षता वाली एफआरबीएम समिति ने अगले तीन वर्षो में मार्च 2020 तक राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखकर जीडीपी के तीन प्रतिशत पर काबू रखने को कहा है। समिति ने लगातार घटाते हुए इसे वर्ष 2022-23 तक 2.5 प्रतिशत के स्तर पर लाने को भी कहा है। रबी मौसम में बंपर फसल उत्पादन के बावजूद कई हिस्सों में किसान कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। किसानों की कठिनाइयों की वजह घरेलू और ग्लोबल बाजार में कृषि उत्पादों की कीमतों में गिरावट आना है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं। हालांकि रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने आगाह किया है कि अगर राज्य इसी तरह कर्ज माफी पर खजाना लुटाते रहे, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। इससे आने वाले दिनों में महंगाई दर भी बढ़ सकती है। दरअसल ‘उदय’ योजना से पहले ही राज्यों पर 4.5 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ चुका है। ऐसे में अगर सभी राज्य 2019 तक कर्ज माफ करते हैं तो उनके खजाने पर लगभग 2.47 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है।
अभी एक दिन पहले ही पंजाब ने 10 लाख किसानों का कृषि ऋण माफ करने का एलान किया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 10.25 लाख किसानों का 2 लाख का कर्ज माफी करने की घोषणा की है। पंजाब के वित्तमंत्री ने जहां कृषि के बजट में 65.77 फीसद की वृद्धि करते हुए इसके लिए 10580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, तो वहीं किसानों की कर्ज माफी के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। जिस अनुपात में 21000 करोड़ रुपये का बजट रखे जाने का अनुमान था, लेकिन वित्तमंत्री ने मात्र 1500 करोड़ रुपये रखे जाने के पीछे कारण बताया कि एक टोकन प्रावधान हैं। वहीं, वित्तमंत्री ने फसल खराब होने पर किसानों मिलने वाले मुआवजे के बजट को 8000 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 12000 करोड़ रुपये कर दिया। इससे पहले उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र भी किसानों का कृषि ऋण माफ करने की घोषणा कर चुके हैं।
हरियाणा में कर्ज माफी का दबाव
पंजाब द्वारा किये गये कर्ज माफी के बाद हरियाणा की भाजपा सरकार पर भी किसानों की कर्ज माफी का दबाव है। प्रदेश के करीब साढ़े 16 लाख किसानों में से 15 लाख किसान कर्जदार हैं, लेकिन सरकारी कर्जदार किसानों की संख्या दस लाख के आसपास है। प्रदेश के अधिकतर किसान कर्जदार हैं। कोई प्राइवेट बैंकों का कर्जदार है तो कोई आढ़ती और दुकानदारों के कर्ज में डूबा है। पिछली कांग्रेस सरकार ने किसानों का करीब 27 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया था, लेकिन इस कर्जमाफी के बाद किसान फिर 30 हजार करोड़ के कर्जदार हो गए हैं। भारतीय किसान यूनियन ने विपक्षी दलों से सहयोग मिलने पर प्रदेश सरकार पर कर्ज माफी का दबाव बढ़ा दिया है।



