नीलम
वर्ष 2016 भी बिहार के लिए चुनाव का वर्ष होगा. 2014 लोकसभा और 2015 विधानसभा चुनाव का साल रहा था. 2016 पंचायत चुनाव का साल होगा. इस दृष्टि से बिहार में ग्रास रूट की संवैधानिक संस्था, त्रिस्तरीय पंचायती राज, के लिए यह साल खास होगा. इस बार लोगों को गांव-पंचायत की अपनी नयी सरकार को चुनने का अवसर होगा. लोकसभा और विधानसभा चुनावों में राज्य के बदलने राजनीतिक -सामाजिक समीकरणों का प्रभाव पंचायत चुनाव पर कितना पड़ेगा, यह तो वक्त बतायेगा, किंतु इतना तय है कि पिछले दो पंचायत चुनाव के मुकाबले इस बार का चुनाव कई मायने में ज्यादा दिलचस्प होगा. इस बार आरक्षण को लेकर पंचायतों और सीटों की समीकरण बदल जायेगा. इसका प्रभाव प्रतिनिधित्व के स्वरूप पर पड़ेगा.
बिहार में यह तीसरा अवसर होगा, जब गांव की सरकार का चुनाव होगा. मुखिया, ग्राम पंचायत सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य एवं ग्राम कचहरी के सरपंच और पंच अगले पांच साल तक के लिए चुने जायेंगे. चूंकि यह चुनाव लोकतंत्र की सबसे निचली संवैधानिक संस्था के लिए होना है. लिहाजा पिछले दो साल, 2014 व 2015 की चुनावी गहमागहमी से इस साल की चुनावी मशक्कत ज्यादा दिलचस्प होगी. पंचायत चुनाव के लिए फरवरी में अधिसूचना जारी होने की संभावना है. इसको ध्यान में रख कर चुनाव संबंधी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. वहीं चुनाव लड़ने वाले नये-पुराने राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता अपनी जमीन मजबूत करने में जुट गये हैं. लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पंचायत राज संस्थानों के जनप्रतिनिधि भी उतरे थे. जाहिर है, जिन्हें सफलता नहीं मिली, वैसे लोग एक बार फिर इस चुनाव में भाग्य आजमायेंगे. दलगत आधार पर पंचायत चुनाव न होने के बाद भी इस पर हाल में बदले दलगत राजनीतिक समीकरण का प्रभाव पड़ेगा. राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोग इसी तर्ज पर मोहरे बिछाने में लगे हुए भी है. वहीं, बिहार में लोकसभा और विधानसभा चुनावों तथा हाल में पड़ोसी राज्य में हुए पंचायत चुनाव में बेतहाशा धनबल के इस्तेमाल को देखते हुए यहां के पंचायत चुनाव में इस पर नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग की बड़ी जिम्मेवारी होगी.
कुछ इस तरह होगा चुनाव का स्वरूप
पंचायत चुनाव के लिए अलत से मतदाता सूची नहीं बनेगी. 2015 में हुए विधानसभा चुनाव के लिए तैयार मतदाता सूची के आधार पर ही यह चुनाव भी होगा. इस मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम जिस ग्राम पंचायत के जिस वार्ड में दर्ज होगा, वह वहीं का मतदाता होगा.
25 जनवरी को जारी होगी मतदाता सूची
मतदाता सूची का प्रकाशन 25 जनवरी को होगा. ग्राम पंचायत की वार्डवार मतदाता सूची को संबंधित ग्राम पंचायत व प्रखंड कार्यालय में, ग्राम पंचायत निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित सूची ग्राम पंचायत व प्रखंड कार्यालय में, पंचायत समिति की वार्डवार मतदाता सूची संबंधित प्रखंड कार्यालय में तथा जिला परिषद की वार्डवार मतदाता सूची को प्रखंड व डीएम कार्यालय में प्रकाशित की जायेगी.
प्रक्रिया, जो पूरी हुई :
23 नवंबर से 05 दिसंबर : मतदाता सूची का वार्डवार विखंडन.
18 दिसंबर से 23 दिसंबर : आयोग के स्तर पर मतदाता सूची के प्रकाशित प्रारूप की जांच.
प्रक्रिया जो चल रही है :
28 दिसंबर, 2015 से 11 जनवरी, 2016 : मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन.
28 दिसंबर, 2015 से 18 जनवरी, 2016 : दावा-आपित्तयों का निपटारा.
16 जनवरी, 2016 तक : मतदाता सूची में नयी इंट्री पर आयोग का अनुमोदन.
प्रक्रिया, जो शुरू होगी :
25 जनवरी, 2016 : मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन.
नहीं बदलेगी पंचायतों की सीमा
अब नया परिसीमन 2021 में ही संभव
इस बार भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पंचायतों के पुराने परिसीमन के आधार पर ही होगा. हालांकि पंचायतों के पुराने परिसीमन में व्यवहारिक रूप से कई कठिनाइयां हैं. कई ऐसी पंचायतें हैं, जो दो जिलों या दो विधानसभा क्षेत्रों में बंटी हुई हैं. जैसे मधुबनी की कन्हौली पंचायत. यह दो जिलों में पड़ती है. चुनाव के पहले पंचायतों के नये सिरे से परिसीमन की मांग हुई थी थी. यह परिसीमन 2011 की जनणना रिपोर्ट को ध्यान में रख कर होनी थी, लेकिन पंचायती राज विभाग समय और खर्च का हवाला देकर इस काम को नहीं कर सका. लिहाजा इस बार भी पंचायतों का भौगोलिक स्वरूप वही रहेगा. नये परिसीमन पर पंचायतों का चुनाव अब अगली बार, 2021 में ही संभव हो सकेगा.
बिना शौचालय के नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
इस बार के पंचायत चुनाव की सब से खास बात यह होगी कि तीनों स्तर के किसी पद के लिए चुनाव लड़ने के यह जरूरी होगा कि व्यक्ति के अपने घर में शौचालय हो. इसे बिहार पंचायती राज (संशोधन) कानून के तहत जरूरी कर दिया गया है. इसलिए जिस किसी को मुखिया, प्रमुख, वार्ड मेंबर या जिला बोर्ड का अध्यक्ष बनना है, उन्हें 31 जनवरी तक अपने घर में शौचालय हर हाल में बनवा लेना होगा. जिसके घर में शौचालय नहीं होगा, वह पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेगा. कानूनन अब हर उम्मीदवार को अपने नामांकन-पत्र के साथ घर में शौचालय होने का शपथ-पत्र भी दाखिल करना होगा. यह खुले में शौच को रोकने और पंचायतों को इसके लिए ज्यादा संवेदनशील बनाने के अभियान का बड़ा हिस्सा भी है. 2011 के पंचायत चुनाव में यह शर्त नहीं थी.
किस जिले में कितनी पंचायतें
जिला पंस पंचायत
बक्सर 11 142
रोहतास 19 246
भोजपुर 14 228
नालंदा 20 249
पटना 23 327
कैमूर 11 151
गया 24 332
नवादा 14 187
औरंगाबाद 11 203
जहानाबाद 7 93
खगड़िया 7 129
लखीसराय 7 80
शेखपुरा 6 54
सीवान 16 293
मधुबनी 21 399
समस्तीपुर 20 381
दरभंगा 18 324
सहरसा 10 153
मधेपुरा 13 170
सुपौल 11 181
पूर्णिया 14 246
अररिया 9 218
किशनगंज 8 126
कटिहार 16 238
मुंगेर 9 101
जमुई 10 153
बेगूसराय 18 231
अरवल 5 65
सारण 20 323
गोपालगंज 14 234
मुजफ्फरपुर 16 385
वैशाली 16 290
पू चंपारण 27 405
प चंपारण 18 315
सीतामढ़ी 17 273
शिवहर 5 53
भागलपुर 16 242
बांका 11 185
कुल 532 8405
ग्राम पंचायत 8405
पंचायत समिति 532
जिला परिषद 38

