मोदी सरकार भले ही साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वायदा बार-बार दोहरा रही है लेकिन हालत यह है कि प्याज और लहसून के बाद आलू किसानों को भी मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं मिल पा रही है। हरियाणा के आलू किसानों के लिए गिरते हुए दाम एक बार फिर चिंता का विषय बने हुए है। रोज होते नुकसान ने किसानों को इस फसल से तौबा करने पर मजबूर कर दिया है। किसान दावा कर रहे है कि मंड़ी से इस फसल के खरीदार ही गायब है, ऐसे में इस फसल को स्टाक करना उनकी मजबूरी बन गया है। और जो खरीदार आ भी रहे वह इतना कम दाम दे रहे है कि फसल का खर्च भी नहीं निकल रहा है। किसानों के मुताबिक एक एकड़ तैयार करने में करीब 25 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन पूरी फसल से प्रति एकड़ बीस हजार रुपये भी कमाई नहीं हो रही है। किसान तो यहां तक कह रहे है कि पिछले पांच सालों से आलू की खेती घाटे का सौदा बनी हुई है।
