आलोक रंजन
जयापुर किसी परिचय का मोहताज नहीं। प्रधानमंत्री ने इस गाँव को आदर्श गाँव के रूप क्या अपनाया योजनाओं की झड़ी लग गयी। पिछले साल 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की। साथ ही अपील किया कि देश का हर सांसद एक गांव को गोद ले और उसको मॉडल के रूप में विकसित करे। सात नवंबर 2014 को प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी के जयापुर गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव पहुंचकर गोद लेने का एलान किया। केवल सरकारी ही नहीं गैर सरकारी संस्थाओं, और निजी सहयोग से मात्र एक साल के भीतर ही एक साल के इस आदर्श गांव की तस्वीर विकास के पटल पर उकेरने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं, और उनकी ये कोशिश रंग लाने लगी है भले ही मोदी के संसदिय ईलाका काशी के कई गाँव के लोगों को बिजली के आपूर्ति नहीं होने के कारन पंचायत चुनाव के बहिष्कार का फैसला लेना पड़ा हो लेकिन आदर्श गांव जयापुर में सात सौ घरों को नवंबर 2015 के आखिर तक 25-25 किलो वाट के दो सोलर एनर्जी प्लांट से बिजली मिलने लगेगी। गोरतलब है कि भारत के 30 फीसदी गांवों में बिजली ठीक से नहीं मिलती। गाँव में विकास कार्यों से प्रधान दुर्गावती देवी संतुष्ट नजर आती हैं, और विकास के मायने बदल रहे हैं।
आमतोर पर यह बात कही जाती है कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद प्रधान पति और सरपंच पति जैसी चीजें विकसित हुई हैं, लेकिन दुर्गा देवी न सिर्फ इस धारणा को बदलती हैं बल्कि नयी राह भी दिखा रही हैं। वे बिजली,पानी, महिला विकास स्वरोजगार सभी योजनाओ पर बेबाक राय रखती हैं।
यूँ बदल रहा है जयापुर
लगभग चार हजार से अधिक आबादी वाले इस गाँव में 25-25 किलो वाट का दो सोलर एनर्जी प्लांट लग चुका है। इस प्लांट से घरों तक बिजली सप्लाई का काम अभी बाकी है। सात सौ घरों में एलईडी बल्ब जलाने के लिए बिजली दी जाएगी। इतना ही नहीं सोलर एनर्जी से चलने वाले तीन ड्रिंकिंग वाटर पंप गांव में बनाए जा रहे हैं। इससे गांव में पानी की सुविधा मिलने लगी है। 1000 लीटर की टंकी पंचायत भवन के पास लगाई गई है। पांच सौ से ऊपर बॉयो टॉयलेट गांवों में बनाया गया है। 30 से अधिक टॉयलेट और आए है, जिसको कुछ दिनों में लगाया जाएगा। दो लाख लीटर की पानी की टंकी का निर्माण कार्य आधा हो चुका है। पूरे गांव में इस विशालकाय टंकी से पीने का पानी सप्लाई किया जाएगा। साथ ही कोशिश है कुछ आसपास के गांवों तक पीने का पानी कनेक्शन पहुंचाया जाएगा। गांव की सड़कों का निर्माण कार्य हो चुका है। रंगीन ईटों से सड़कों को बनाया गया है, जो बेहद खूबसूरत है। सड़को को निरंतर बनाया जा रहा है. बड़ी संख्या में शौचालय बनवाये गए है
सोलर लाइटों से रोशन हुआ गांव
130 से अधिक सोलर स्ट्रीट लाइट जयापुर गांव के सड़कों को रोशन करती है। सात जुलाई को ही मोदी के अटल नगर में 14 वनवासियों को रहने के लिए आवास भी प्रदान किया गया है। डिजिटल लाइब्रेरी ,वाचनालय, पुस्तकालय, प्रतीक्षालय, दो बैंक, पोस्ट ऑफिस, पुलिस पिकेट का निर्माण हो चुका है।बच्चे अपनी पढ़ाई कर सके इसका खास ध्यान दिया गया है।
वनवासी बस्ती में मॉडल आवास
जयापुर के वनवासी बस्ती के लोग शायद कभी यह सोचे भी नहीं होंगे कि उनके सिर पर भी एक छत होगी, वह भी आधुनिक तकनीक से लैस। महाराष्ट्र की फूड कंपनी ने वनवासियों के लिए आवास का निर्माण कराया। एक कमरे के इस आवास में रसोई, स्नान व शौचघर के साथ ही छोटा आंगन भी है। बिजली के लिए सोलर लाइट की व्यवस्था।
आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण
गांव में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण शुरू हो चुका है। इस वक्त आंगनबाड़ी प्राथमिक विद्यालय में संचालित है। यूनियन बैंक द्वारा उसे गोद लेने के बाद आंगनबाड़ी भवन का कायाकल्प हो गया। फर्श पर टाइल्स व सीलिंग फैन, सोलर लाइट से भवन जगमग हो गया।
स्वरोजगार की ओर उठते कदम
गांव के बीच में तीन कालीन बुनाई प्रशिक्षण केंद्र सरकार की ओर से खोला गया है, जिसमें तीन हथकरघा लगाया गया है। एक्सपर्ट गांव की करीब 50 से ऊपर महिलाओं को रोजाना प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। खास बात है कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को 2400 रुपए भी दिया जा रहा है।
सात जुलाई 2014 को केंद्रीय खाध प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने एक एकड़ में गौशाला का शिलान्यास किया था। जिसमें आधा काम पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया दो सौ गायों को रखा जाएगा। खास बात होगी कि गांव की महिलाओं को बैंक गाय के लिए फाइनेंस करेगा, जिससे रोजगार मिल सके। इंटर तक का कन्या विद्यालय भी तैयार हो चुका है। बच्चों के लिए खेलने का मैदान और नंदघर भी बनाया गया है।
गांव की बदली तकदीर
ग्रामीण मानते हैं की मोदी का इस गाँव के चयन से गांव की तकदीर बदल गई है। जिस गांव में लड़कियों के जन्म पर पेड़ लगाने की परंपरा शुरू हो गई हो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कितना परिवर्तन हुआ है। खेती के लिए प्रशिक्षण और बीज केंद्र खुल जाए तो ग्रामीणों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। हलाकि लोग उम्मीद करते हैं कि किसी बड़ी कंपनी का गांव में प्रवेश हो और युवाओं को रोजगार मिले। इस और विकास किया जाना बाकी है । जयापुर प्राथमिक विद्यालय की अध्यापिका साधना श्रीवास्तव ने बताया कि गांव की महिलाएं शौचालय को लेकर जागरुक हुई हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण बेटियों की पढ़ाई को लेकर जागरुक हुए है। 150 की संख्या में 82 लड़कियां स्कूल में पढ़ रही है।
करेंगे बहिष्कार चुनाव का
जयापुर की पहचान भले ही बदल गयी हो लेकिन संसदीय क्षेत्र में एक ऐसा भी गांव है जहां न बिजली है न पानी है और न ही शौचालय। गांवों के लोग पंचायत चुनाव के बहिष्कार करने की घोषणा कर चुके है। इन गांवों में आजादी के बाद अब तक बुनियादी सुविधायें ही नहीं मिल पायी है। अच्छे दिनों की चमक अभी तक इस गांव ने नहीं देखि है। गांव की महिलाओं को शौच के लिए रात के अंधेरे का इन्तजार करना पड़ता है। पीने के लिए पानी तक नहीं है। गांवों वालों ने बिजली आने की उम्मीद पर टीवी ख़रीदे पर अब ये टीवी घर में बक्से में बंद है। किसी ने अपने घर के एक कोने में फेंक रखा है। पंखे भी लगवाये थे पर कभी हवा नहीं मिली। देश के आजाद होने के 68 साल बाद भी इस गांव से अंधेरा नहीं छटा। प्रत्याशी गांवों वालो को रिझाने में लगे है। गांवों की लड़कियां पढ़ाई भी नहीं करती क्योंकि उनके गांवों में स्कूल तक नहीं है।





