परदेशी मन को देश से जोड़े रखता है मेरा गांव ”चिकनौटा”

मेरे गांव ”चिकनौटा’‘  में उस वक्त शिक्षा नाम मात्र की थी। मेरे अपने टोले में केवल एक परिवार, कपिलदेव भैया का परिवार, मैट्रिक से ज्यादा पढ़ा था, कुछ दुसरे लोग शायद मैट्रिक तक पढ़े थे। कपिलदेव भैया स्वयं कितना पढ़े थे, मालूम नहीं पर वे शायद अंचलाधिकारी थे; लोग उन्हें सी औ (सीओ) साहब कहते … Continue reading परदेशी मन को देश से जोड़े रखता है मेरा गांव ”चिकनौटा”