मन चलि जात अजौ…

प्रो डाॅ ओम प्रकाश सिंह मर ही जाता मैं शहर में बच गया गांव की शीतल हवाएं साथ हैं।   अपने गांव को याद करना और उसके बारे में बात करना सुखद है। मैं 1977 ई. तक गांव में ही रहा हूं। पढ़ने-लिखने के क्रम में उस समय का छूटा, गांव आज भी छूटा ही … Continue reading मन चलि जात अजौ…