डेढ़ दर्जन से अधिक कुओं वाले मेरे गांव में अब गिनती के दो-चार कुएं

  डा. दीपक कुमार बहुत दिन नहीं बीते होंगे। चार दशक पहले तक पेयजल और सिंचाई के स्रोत गांव में कुएं ही होते थे। ज्यादातर गांवों के पनघट का केंद्र कुएं ही थे। बाल्टी-डोरी लेकर लोग सुबह-शाम जाते, नहाने-धोने के काम करते और लौटते वक्त एक हाथ में लपेट कर रस्सी और बाल्टी भर पानी … Continue reading डेढ़ दर्जन से अधिक कुओं वाले मेरे गांव में अब गिनती के दो-चार कुएं