शेरपुर…गांव को गांव ही रहने देने में आनंद है

गांव का नाम जेहन में आते ही गांव के वे बीते हुए दिन याद आ जाते हैं जब गांव के प्राईमरी पाठशाला में पढ़ने के लिए जाने पर पटरी, दवा​​त,कलम के साथ एक सीमेंट या अनाज का खाली बोरा भी पीठ पर लेकर जाना पड़ता था। बाबू साहब, मुंशी जी, पंडित जी पढ़ाते कम थे … Continue reading शेरपुर…गांव को गांव ही रहने देने में आनंद है