गांव की मुकम्मल तस्वीर के बीच… उदासी की कथा कहते पलायन में छुपा है गांव का यथार्थ

शहर की इस भीड़ में चल तो रहा हूंज़ेहन में पर गांव का नक़्शा रखा है ये शेर ताहिर अज़ीम का है लेकिन हर उस शख्स के भीतर है जो गांव से शहर आकर बसा है या जो कहीं भी रहे लेकिन जिसके दिल में हमेशा उसका गांव आबाद होता है। महात्मा गांधी भी कहते … Continue reading गांव की मुकम्मल तस्वीर के बीच… उदासी की कथा कहते पलायन में छुपा है गांव का यथार्थ