डाॅ.सुधा सिंह कलकत्ता में रहनेवाले बिहार, उत्तरप्रदेश के प्रवासी मजदूर अपने गांव को ‘देस’ कहते हैं। मैंने अपने आरंभिक जीवन के 24 वर्ष इन मजदूरों के बीच बिताए हैं। उनके जीवन, रहन-सहन, सुख-दुख को करीब से देखा है। इनके बीच रहकर मैंने अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी की है, जीवन की पहली नौकरी की है। केशोराम कॉटन … Continue reading मेरा ‘गांव’-मेरा ‘देस’
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