July 14, 2020

सीएम योगी का गोद लिया गांव,बीते तीन साल में नहीं बदली सूरत

धीरेंद्र विक्रमादित्य गोपाल
गोरखपुर से भाजपा के सांसद रहे योगी आदित्यनाथ वैसे तो अब प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गये हैं और उन पर पूरे सूबे की जिम्मेदारी है। ऐसे में थोड़ा ठहरकर यह टटोलने का सही वक्त है कि मोदी के विकास के सपनों का दारोमदार संभालने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोद लिए गांव में विकास की हकीकत क्या है। जी हां योगी आदित्य नाथ ने सांसद आदर्श ग्राम योजनो के तहत जिले के जंगल औराही गाँव को गोद लिया था। जंगल औराही की आबादी लगभग 5000 है। गांव 14 टोलों में फैला हुआ है। इस गांव में भी वहीं समस्या है जो भारत के ज्यादातर गांवों में है। जर्जर सड़कें, टूटी नालियाँ, बजबजाती गंदगी देखकर आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि इस गांव को आदर्श बनाने का प्रयास सांसद द्वारा गंभीरता से नहीं किया गया। ऐसा नहीं है कि सांसद योगी को ग्रामीणोे के द्वारा सामना किये जा रहे इन समस्याओं का भान नहीं है। उन्होनें इस बाबत प्रस्ताव भी तैयार कराया था। लेकिन यह सिर्फ कागजी खानापूर्ती ही साबित हुआ है।
केंद्र में मोदी सरकार बने तीन साल बीत गये हैं लेकिन सांसद आदर्श गांव जंगल औराही में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं दिखता।  एक साल में जिस गांव का विकास हो जाना चाहिए था वह गांव तीन साल में विकास के किस पायदान पर पहुंचा यह जानने की कोशिश पत्रिका टीम ने की। हकीकत यह मिली कि सांसद के रूप में योगी आदित्यनाथ के गोद लिए गांव जंगल औराही आज भी विकास के लिए अपने रहनुमा की बाट जोह रहा। अधिकतर ग्रामीण सड़क, नाली, शुद्ध पेयजल, बिजली, शौचालय आदि मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। मोदी और उनके सहयोगी जिस स्वच्छता का ढ़िंढोरा पीट रहे वह स्वच्छता अभियान उनके सहयोगियों के क्षेत्र में ही धड़ाम हो चुकी दिख रही है।

आधा-अधूरा खड़ंजा व नाली से जलनिकासी बड़ी समस्या
आदर्श गांव के रूप में एक साल में विकसित किया जाने वाला जंगल औराई गांव आज तीन साल बाद भी बदहाल हाल में है। गांव 14 टोलों में फैला हुआ है। गुलरिहा थाना से कुछ किलोमीटर दूर स्थित इस गांव के विशुनटोला में प्रवेश करने के लिए बड़ी गांड़ी से आने में कठिनाई हो सकती है। गांववाले बताते हैं कि इस टोले पर आने के लिए जो सड़क है वह अतिक्रमित है। कई बार साहबानों से कहा जा चुका है लेकिन आजतक कोई इसका पुरसाहाल नहीं मिला। इस टोले पर मिली महिलाएं बताती हैं कि कुछ समय पहले खड़ंजा कराया गया था। वह भी आधा पर ही छोड़ दिया गया। इस वजह से बरसात के दिनों में पानी लग जाता। घर से निकलना दूभर हो जाता।


स्वच्छता का घोर अभाव, जहां नालियां बनी वह टूट रही
गांव की नालियांे को देखकर ऐसा लग रहा कि यहां सफाईकर्मी कभी कभी विशेश मौकों पर ही आते हैं। गांव में हर जगह नाली भी नहीं है। गांववाले नाली बनवाने में भेदभाव का आरोप लगाते हैं। ढेर सारे घर ऐसे हैं जहां दरवाजे पर ही गड्ढा खोद कर किसी तरह पानी सड़क पर बहने से रोका गया है। गड्ढे में पानी एकत्र होनेे से गंदगी का अंबार है। मच्छर भी खूब पनप रहे हैं। गांव के विशुनटोला से अन्य टोलों को जोड़ने वाली सड़क भी अधूरी है। ग्रामीण बताते हैं कि नाली निर्माण में कमीशन खोरी हो गई। नाली की स्थिति यह कि यह बनने के साथ ही टूटने लगी।
इंडिया मार्का हैंडपंप का अभाव, पानी टंकी निर्माणाधीन
गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ओवरहेड टेंक का निर्माण सात-आठ महीने से चल रहा। कनेक्शन के लिए प्लास्टिक की पाइप भी बिछाई गई है लेकिन फिलहाल उसमें पानी नहीं आता। पाइप के मुंह खुले हुए हैं और वह नालियों के सटे ही बिछाए गए हैं। तमाम पेयजल पाइप नालियों में भी डूबे दिखते। इंडिया मार्का हैंडपंप की बजाय देसी हैंडपंप करीब-करीब हर घर की शोभा बढ़ा रहे। पचास से 80 फीट गहरे बोर किए गए इन हैंडपंपों से शुद्ध पेयजल की अपेक्षा करना थोड़ी बेमानी होगी।

रोजगार के लिए शहर पर निर्भरता, मनरेगा भी नहीं
सोच तो गांव में स्वरोजगार पैदा करने की थी लेकिन सांसद आदर्श गांव में यह सोच अमली जामा नहीं पहन सका। गांव के युवा बताते हैं कि रोजगार के लिए शहर पर ही निर्भरता है। मजदूरी भी गांव में सही से नहीं मिलती। मनरेगा का काम कभी कभार मिलता है। जिसको कमाना है, आजीविका चलानी है उसे शहर जाना ही होता।
इंदिरा आवास अधूरा, ले लिया कमीशन
गांव में सरकारी योजनाओं में जमकर धांधली है। अधिकतर लोग सरकारी योजनाओं से वंचित है। गांव में ढेर सारे इंदिरा आवास अधूरे हैं। कमीशन भी लोगों ने आवास के लिए दिया है। विशुनटोला की महिलाएं बताती है कि इंदिरा आवास की पहली किश्त मिली। सरकारी कर्मचारी ने कमीशन भी ले लिया लेकिन दूसरी किश्त आज तक नहीं मिली।

मेडिकल काॅलेज पर निर्भरता
गांव में किसी की तबीयत खराब हो जाए तो या तो वे मेडिकल काॅलेज जाएं या किसी झोला छाप डाॅक्टर से अपना इलाज कराएं।
गांव के बाहर बिकता है शराब
कई ईंट-भट्ठों वाले इस गांव में शराब नहीं बिकती। हालांकि, गांव की महिलाएं यह बताती हैं कि लोग गांव के बाहर जाकर पीकर आते हैं।
शौचालय भी सबके पास नहीं
गांव में अभी भी स्वच्छता मिशन के तहत बन रहे शौचालयों का घोर अभाव है। अधिकतर घरों में शौचालय नहीं है। कईयों ने आश्वासन पर बनवा लिया लेकिन उनको सरकारी सहायता नहीं मिली। जो सक्षम हैं उनके घर में ही शौचालय हैं।
गांव में अब हो रहा विद्युतीकरण
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से गांव में विद्युतीकरण में तेजी आई है। गांववाले खुश हैं कि पोल गिरने लगे हैं, तमाम जगह पोल खड़े भी कर लिए गए हैं, तार खींचे जा रहे। यह राहत भरी बात है कि सांसद आदर्श गांव में जल्द ही बिजली आ जाएगी।
(पत्रिका से साभार)

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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