August 15, 2020

पढ़ी लिखी पंचायत के बाद 50 फीसदी महिला आरक्षण से सशक्त होंगी हरियाणा की पंचायतें

अभिषेक राज
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की सरकार हमेशा प्रदेश के पंचायती राज संस्थाओं में आमूलचूल बदलाव के लिए याद की जाएगी। अपने पिछले कार्यकाल के शुरूआती दिनों ने यानी मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही महीने बाद जब उन्होंने यह निर्णय लिया कि प्रदेश की पंचायत पढ़ी लिखी होंगी यानी कोई भी अंगूठाटेक अब पंचायत प्रतिनिधि नहीं चुना जा सकेगा तो इस निर्णय ने मानो हरियाणा की राजनीति में भूचाल ला दिया हो। प्रदेश की स्थापित राजनीतिक पाटिर्यों ने एक ओर जहां मुख्यमंत्री के इस निर्णय के खिलाफ झंडा बुलंद किया वहीं दूसरी ओर पंचायत प्रतिनिधी भी अचानक आये इस बदलाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं थे। लेकिन मनोहर लाल को पता था ये निर्णय प्रदेश के हित में है। मामला अदालत में भी पहुंचा और फैसला प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं में बदलाव के हक में आया यानी प्रदेश की सारी पंचायते चाहे महिला हों या पुरूष सभी पंच-सरपंच पढे लिखे और अपने कानूनी हक को समझने वाले।

ठीक उसी तरह जब मनोहर लाल ने दूसरी बार प्रदेश की बागडोर संभाली है तो शाषण संभालने के मात्र चंद माह के अंदर ही प्रदेश की पंचायतें ​फिर से एक नये बदलाव को अंगीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। जी हां मनोहर लाल के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने महिलाओं को पंचायती राज व्यवस्था में 50 फीसदी आरक्षण दिये जाने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर प्रदेश के विकास एवं पंचायत विभाग का जिम्मा संभाल रहे उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला इस संबंध में एक ड्राफट तैयार किया है।


क्या कहते हैं दुष्यंत
प्रदेश के पंचायती राज मंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि दोनों दलों के विधायकों ने इस मुद्दे पर चर्चा की है और जल्द ही अंतिम निर्णय किया जाएगा। चौटाला ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण पूरे समाज का सशक्तिकरण है। यह निश्चित तौर पर सही दिशा में उठाया गया कदम है। सूत्रों की माने तो इस मामले पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने इसे लेकर अपनी कागजी कार्यवाही भी शुरू कर दी है। प्रदेश में अभी महिलाओं का पंचायती राज संस्थानों में 33 फीसदी आरक्षण है। बताया गया है कि सभी पंचायातों के यूनिट नंबर है। ऐसे में महिलाओं को आरक्षण भी ऑड-ईवन के फॉर्मुेले पर दिया जा सकता है। लेकिन इसके लिए पहले सत्ताधारी दोनों की सहमति बननी जरूरी है। इस बाबत पत्रकारों से बातचीत में दुष्यंत ने कहा कि गांवों में सराहनीय कार्य करने वाले सरपंच और पंच सहित महिला सदस्यों को दोपहिया वाहन भी दिए जाएंगे। उन्होंने सरकार ऐसी सौ महिलाओं की सूची बना रही है जिन्होंने गांवों में शानदार काम किया है और होंडा कंपनी के साथ मिलकर कॉरपोरेट सामाजिक जवाबदेही पहल के तहत उन्हें स्कूटी दी जाएगी।

क्या है वर्तमान स्थि​ति
उल्लेखनीय है कि पिछले पंचायत और स्थानीय चुनावों में 43 फीसद महिलाएं जीती थी। यानी कि ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों में दस फीसद अधिक महिलाओं ने कब्जा जमाया। महिलाओं का कोटा बढ़ाने के लिए हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994, नगर पालिका कानून 1973 और नगर निगम अधिनियम 1994 में संशोधन करना होगा। विधानसभा के मानसून सत्र में भाजपा-जजपा सरकार संशोधित विधेयक पारित करा सकती है। इसके बाद संबंधित सीटों और वार्डों को आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए चिन्हित कर आरक्षित किया जा सकता है। गुजरात सहित 11 राज्यों में महिलाओं को न्यूनतम 50 फीसद आरक्षण दिया जा रहा जिनमें से अधिकतर में भाजपा सरकारें हैं।


हरियाणा में पढ़ी लिखी पंचायत का फैसला
2014 में पहली बार हरियाणा में भाजपा की सरकार बहुमत से चुनकर आई। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने शुरू से ही शिक्षा को महत्व दिया या यू कहें कि प्रदेश को शिक्षा का महत्व समझाने में कामयाब रहे। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए उन्होंने हरियाणा को पहली बार पढ़ी लिखी पंचायत दी। अब हरियाणा की किसी भी पंचायत में अब अंगूठा टेक मेंबर, सरपंच नहीं है। मुख्यमंत्री का प्रदेश में आमूलचूल बदलाव लाने वाला यह फैसला पूरे देश के लिए अनुसरणीय बना। इस फैसले का सकरात्मक असर भी देखने को मिला है। चाहे बात ग्राम पंचायत की हो, जिला परिषद सदस्य की हो, पंचायत समिति सदस्य की हो। अब गांव में जाने पर हर चुना हुआ प्रतिनिधि शिक्षित नजर आता है और शिक्षा के बल पर ही वह अपना कामकाज और गांवों का विकास करवा रहे हैं। आज स्थिति यह है कि शिक्षित पंचायत ग्रामीणों के सपने पूरे कर रही हैं और उसका लाभ भी प्रदेश वासियों को मिला है। शिक्षित सभी पंचायती राज के सदस्य बड़े अच्छे ढ़ंग से काम काज निपटा रहे हैं और सरकार की ओर से जारी विकास कार्यो का भी पूरा लाभ उठा रहे हैं और इसके साथ-साथ आमजन से भी उनका व्यवहार अच्छा रहता है।

मुख्यमंत्री के इस फैसले का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार सराहना कर चुके हैं। इस लिहाज से देखें तो हरियाणा सरकार यदि प्रदेश की पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिये जाने की व्यवस्था को कानूनी तौर पर अमली जामा पहनाने में सफल होता है तो इससे प्रदेश के पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी तो बढ़ेगी ही, साथ ही साथ इसे मनोहर लाल के पढ़ी लिखी पंचायत के सपने को जमीन पर उतार लाने के दृढ़संकल्प का भी फायदा मिलेगा। इतना ही नहीं मनोहर लाल ने अपने पहले कार्यकाल में सेवेन स्टार रेनबो पंचायत जैसी अति महत्वपूर्ण और महत्वकांक्षी योजना लागू कर एक ओर जहां पंचायतों के बीच बेहतर कामकाज को लेकर आपसी प्रतिस्पद्र्धा की भावना ​भरा वहीं दूसरी ओर इसके परिणाम स्वरूप प्रदेश में कई गांवों के कायाकल्प होने की खबरें भी सामने आयीं।

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