July 19, 2019

नोट बंदी की मार, सस्ती हुई सब्जी, सुस्त हुआ बाजार

पंचायत खबर टोली

मऊ : देश में नोटबंदी सही है या गलत इसको लेकर विचार का दौर चल रहा है। कल भारत बंद का आह्वाण भी विपक्षी दलों ने किया है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के जरिए एक बार फिर से लोगों को नोटबंदी के फायदे गिनाए हैं। लेकिन जमीन पर इसकी क्या स्थिति है इसका जायजा लेने के लिए आपकों गंवई बाजार में जाना होगा। जी हां, इसका सीधा सा मार पड़ा है ग्रामीण हाटों में सब्जी उगाकर बाजार के सहारे अपने परिवार का भरण पोषण करने वालों पर। खरीदार तो हैं लेकिन बड़े नोट को ग्रामीण बाजार खपाये तो कैसे।

sabji_nसब्जियों के दाम में भारी गिरावट
नोटबंदी के उपरांत सब्जी बाजार में सब्जियों के दाम में व्यापक गिरावट आई है। नए नोट को बाजार में न आने की स्थिति में यहां भी सूनापन की स्थिति है। दो हजार का नोट सब्जी के खुदरा बाजार में बेअसर है। 25 से 35 प्रतिशत के बीच दाम में कमी आ गई है। मौसम अनुकूल होने की दशा में अच्छी फलत के कारण बाजार बाजार में माल अटा पड़ा है। मुद्रा बदलाव के इस दौर में आफ सीजन होते रहे परवल जैसे अपवाद भी हैं। मूल्यों में गिरावट के बाद ग्राहकों की कमी से हिबकाया बाजार छोटी नई मुद्रा के जल्द ही आने की संभावना के साथ लगा हुआ है। फिलहाल तो घरेलू खर्चों में प्रमुख भूमिका अदा करने वाली सब्जी सस्ती हो गई है।
ग्राहक तो हैं लेकिन बिक्री हुई कम
रविवार को खुदरा सब्जी बाजार में आलू प्रति पसेरी 60-80 का भाव रहा। पुराना आलू 60 रुपये तो नया सफेद 80 रुपये बिका। टमाटर 80-100 प्रति पसेरी रहा। लहसुन-प्याज का दाम स्थिर बना रहा। शाक वाली फसल जैसे देशी-हाईब्रिड पालक, बथुआ, मेथी, धनिया, हरा प्याज आदि बाजार में अटे पड़े होने के कारण मूल्यों में 30-35 प्रतिशत की गिरावट आई है। दैनिक दिनचर्या में सब्जी बचत के साथ उपलब्ध होने से जन-जीवन को बहुत परेशानी नहीं हो रही है। 225-50 के भाव से बाजार में अदरक बिकी। अपने प्रवेश के साथ तेजी बनाए मटर का भाव नोटबंदी के बाद 40-45 प्रतिशत तक गिर गया है। 270-300 पसेरी के भाव से बाजार में मटर बना हुआ था। 10-10 की गांठ के साथ धनिया व मेंथी बेची गई। लौकी 25-30 रुपये पसेरी तो मूली 20 तक आ गया। बोरो व बिन्स की फलियां के दाम भी कमी बनी रही। रुपये की नई खेप एटीएम व बैंक तक न आने की दशा में पुराने नोटों को बचाए रखने की प्रवृत्ति भी बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण बनता प्रतीत हो रहा है। फिलहाल तो ठंड के मौसम में लोग सस्ती सब्जी की मजा ले रहे हैं।

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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