November 15, 2018

सुविधाओं से महरूम है उद्योग, उद्योग बंधु योजना कागजों तक सिमटी

पंचायत खबर टोली
मऊ :उम्मीदों के प्रदेश उत्तर प्रदेश के मउ में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है विशेष रूप से उद्योग के लिहाज से।  एक तरफ केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुद्रा बैंक व स्कील इंडिया सहित अनेक योजनाअों के जरिए स्टार्ट अप से स्टैंड इंडिया की दिशा में बढ़ने की योजना बना रही है ताकि मध्यम, लघु व कुटीर उद्योग की स्थिति को बेहतर किया जा सके। लेकिन कोई भी योजना कारगर तब होती है जब वह जमीन पर उतरे। प्रयास हो रहे हैं लेकिन उन योजनाओं को क्रियान्वयन अभी जमीन पर नहीं होने से जिले में उद्योगों की स्थिति खस्ताहाल हो चली है। बैठकों तक सिमटी उद्योग बंधु की स्थिति से परेशान उद्योग कर्मियों के लिए राहत की कोई राह नजर नहीं आ रही है। हालत यह कि योजनाओं को क्रियान्वित करने की दिशा में बैंकों का रवैया घोर लापरवाही भरा है। कागजात व जांच में लटकाने के बाद सुविधा शुल्क न मिलने की दशा में फाइल रोक दी जाती है। कोरमपूर्ति तक सिमटे प्रशासनिक प्रयास के बीच जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से हालत बद से बदतर होते जा रहे हैं। खस्ताहाली की ओर बढ़ रहे उद्योग जगत को अभी अपने अच्छे दिन का इंतजार है। प्रशासनिक निष्क्रियता और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से हाल-फिलहाल इतनी जल्दी आने की संभावना भी नहीं दिखाई दे रही है।

kutirrrrr-3मऊ जिले में उद्याेग की स्थिति ठीक नहीं है। नगर में गाजीपुर तिराहा व ताजोपुर में, दो औद्योगिक क्षेत्र हैं। पांच वर्ष में औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर में सीमेंटेड ईंट की दो, पशु आहार की एक व साड़ी कैलेंडर की एक, लाई-चूरा निर्माण की दो लघु इकाइयाें की स्थापना हुई। पांच वर्ष में ताजोपुर में आटा उद्योग की तीन, साड़ी निर्माण की एक तथा बल्ब निर्माण की एक लघु उद्योग की इकाई बंद हो चुकी है। गाजीपुर तिराहा पर स्थित औद्योगिक क्षेत्र बिजली की कमी से जूझ रहा है, तो औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर में चहारदीवारी, पुलिस पोस्ट, वाटर फायर टैंक, सड़क व बिजली की समस्या बनी हुई है। जिले में खाद्य प्रसंस्करण व बुनकरी क्षेत्र में लघु उद्योग की अपार संभावना है। इस दिशा में केंद्र सरकार द्वारा अनेक योजनाअों के संचालन के बाद भी जमीन पर उसे न उतर पाने की दशा में कहीं भी प्रगति नहीं दिखाई दे रही है। जिले की सबसे सक्रिय बढुआ गोदाम इकाई का हाल यह है कि सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। शाम होते ही अंधेरे का साम्राज्य हो जाता है। फायर टैंक जैसी मूलभूत सुविधा का विकास अभी नहीं हो पाया है। ऐसे में लघु व कुटीर उद्योग के विकास के लिए पीएम की प्रतिबद्धता के बाद जगी आस विभागीय निष्क्रियता से टूट रही है।

kutir-2-2

पहले से बदतर हुए हैं हालात
औद्योगिक क्षेत्र बढुआ गोदाम के अध्यक्ष संजय सिंह कहते हैं कि, हालत पहले से बदतर हो गए हैं। पूर्व में उद्योग के विकास के लिए जमीन, मैटेरियल व मशीनरी में सब्सिडी मिलती थी। बिक्री कर में 10 वर्ष तक का छूट भी इस दौरान दिया जाता था। उद्योग की सक्रियता के लिए जिला उद्योग केंद्र से रा-मैटेरियल छूट पर प्रदान किया जाता था। यह सभी सुविधाएं समाप्त हो चली हैं। दूसरी ओर जिला उद्योग बंधु एक बैठक भर रह गई है। एजेंडा पर चर्चा करना ही इसका उद्देश्य होता जा रहा है। दूसरी ओर विभिन्न विभागों द्वारा चेकिंग के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। निदेशालय द्वारा मरम्मत शुल्क बढ़ा दिया गया है लेकिन सड़क, बिजली व अन्य सुविधाएं बदहाल हो गए है। पीएम की कोई भी योजना इस अभी तक जिले में उतर नहीं पाई हैं। ऐसे में मझोले, लघु व कुटीर उद्योग समाप्त होने की दशा में हैं।

बैंकों की लापरवाही से अटकी योजनाएं
वही जिला उद्योग केंद्र, मऊ के प्रबंधक रामसरीख यादव कहते हैं कि बैंक गंभीर नहीं हैं। बंधु की बैठक में एजेंडा का क्रियान्वयन होता है। योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंकों का लापरवाही भरा रवैया उद्योग के विकास में भारी पड़ रहा है। इस दिशा में सांसद को इस विषयक पर पत्राचार भी किया गया। बावजूद इसके उनके रवैए में कोई अंतर नहीं। इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों को पत्रचार किया गया है।

kutir-3

लापरवाहों पर होगी कड़ी कार्रवाई
घोसी लोकसभा के सांसद हरिनरायन राजभर का कहना है कि इस विषय पर सूचना मिलते ही जिलाधिकारी के साथ सभी बैंक कर्मियों के साथ बैठक कर योजनाओं के क्रियान्वयन करने का सख्त निर्देश दिया गया था। इसके बाद भी कोई यथोचित प्रगति न होने की दशा में इन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संदर्भ में विभाग के संबंधित मंत्री से पत्राचार करने सहित पीएमओ को भी इस दशा से अवगत कराउंगा। जिलाधिकारी को लापरवाह कर्मी व संबंधित बैंकों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा है। उद्योग जगत के लिए यह गंभीर मुद्दा है। वे इसे संसद में भी उठायेंगे।

About The Author

एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *