November 15, 2018

बिहार की धरती अन्नापूर्णा,राष्ट्रपति ने जारी किया तीसरा कृषि रोड मैप

संतोष कुमार सिंह
पटना: भारत कृषि प्रधान देश है,और बिहार की उपजाउ मिट्टी की तो बात ही निराली है। लेकिन बिहार कृषि क्षेत्र का अगुआ नहीं बन सका है। हालांकि बिहार सरकार कृषि रोड मैप के जरिए अक्सर ये सपना बुना करती है कि प्रत्येक भारतीय की थाली में बिहारी व्यंजन हो। आज तीसरा रोड मैप सामने आया। राज्य का तीसरा कृषि रोड मैप 2017-22 का शुभारंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ज्ञान भवन के बापू सभागार में करते हुए बिहार की धरती को अन्नापूर्णा बताया। आज फिर से वर्षों पुराने उस सपने को जमीन पर उतार लाने की बात हुई जिसमें कहा गया देश के प्रत्येक व्यक्ति की थाली में बिहारी व्यंजन हो।

कृषि रोड मैप में क्या है खास
बिहार में इन्द्रधनुषी क्रान्ति के लिए तथा कृषि और किसानों के विकास के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा समर्पित राज्य सरकार की 1.55 लाख करोड़ रुपये के तीसरे कृषि रोड मैप – 2017-22 में गंगा कि अविरलता को भी विशेष महत्व दिया गया
सात लक्ष्य रखे गयें है कृषि रोड मैप में
– जैविक खेती के जरिए किसानों की माली हालत सुधारना, प्रत्येक भारतीय थाली में कम से कम एक बिहारी व्यंजन, खाद्य सुरक्षा, नई तकनीक के जरिए पोषण वाली पैदावार, लागत कम उपलब्धि ज्यादा के साथ कृषि बाजार का विकास, रासायनिक खाद के बदले वर्मी कंपोस्ट के लिए प्रोत्साहन, मिट्टी के स्वास्थ्य कार्ड के जरिए खेतों की नियमित सेहत जांच, मछली- पशुपालन के जरिए किसानों का समावेशी विकास।

  • कृषि रोड मैप की कार्ययोजना में पहली बार कृषि रोड मैप में गंगा की अविरलता एवं निर्मलता के लिए अभियान को शामिल किया गया है।
  • पटना से भागलपुर तक गंगा एवम राजकीय राष्ट्रीय सड़कों के किनारे जैविक कृषि कॉरिडोर का विकास किया जाएगा।
  • धान गेहूं मक्का दलहनी तिलहनी फसलों के प्रमाणित बीज उत्पादन के लिए स्थानीय लोगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
  • बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने के लिए जिलों का चयन कर गुणवत्ता वाले बीजों का प्रचार प्रसार किया जाएगा।
  • जिलों के लिए अलग-अलग बागवानी फसलों को चिन्हित कर उनके विकास के लिए कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
  • बगीचों को बचाने पर जोर दिया जाएगा और 5 साल के आम लीची के पौधे एवं इससे अधिक उम्र के बगीचे की रक्षा की जाएगी।
  • पशुओं से फसलों की बर्बादी रोकने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरणों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • जलवायु परिवर्तन एवं बाढ़ सुखाड़ के असर से निपटने के लिए आपदा से पहले विशेष उपाय किए जाएंगे।
    विभिन्न विभागों के लिए तय लक्ष्य

पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग

  •   इस विभाग को पशु विज्ञान विश्वविद्यालय कॉलेज एवं अनुसंधान इकाइयों को मजबूत करने को कहा गया है।
  • यह विभाग दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए डेयरी फार्म और बछिया पालन को बढ़ावा देगा।
  • 25 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के नए आधुनिक डेयरी प्लांट लगाने की योजना है।
  • गौशालाओं को मॉडल में तब्दील किया जाएगा और प्रखंडों में चारा के लिए नई नर्सरी बनाई जाएगी।
  • मौसमी तालाबों में वर्ष भर मत्स्य बीज पालन एवं भंडारण की व्यवस्था की जाएगी।
  • जल संसाधन विभाग के लक्ष्य
  • गंगा किनारे के सभी शहरों के गंदे पानी को ट्रीटमेंट के बाद सिंचाई के लायक बनाना।
  • सिंचाई क्षमता को बढ़ाकर 36.31 लाख हेक्टेयर करना।
  • 15 लाख हेक्टेयर खेत को बाढ़ से सुरक्षित करना 1731 किलोमीटर नए तटबंधों का निर्माण करना।

सहकारिता विभाग के लक्ष्य –

  • पैक्स -व्यापार मंडलों में सब्जी प्रसंस्करण इकाई की स्थापना।
  • शीत गृहों का निर्माण ,राइस मिल की स्थापनाज़ सहकारी बैंकों एवं नाबार्ड से किसानों को आसानी से ऋण दिलाना तथा खाद्य निगम की भंडारण क्षमता बढ़ाना।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के लक्ष्य –

  • भूखंडों का अद्यतन मैप बनाना ,सभी जिलों में राजस्व भू मानचित्र उपलब्ध कराना।

पर्यावरण एवं वन विभाग –

  • राज्य की हरियाली क्षेत्र को 15 से बढ़ाकर 17 प्रतिशत करना।
  • तटबंधों के किनारे 15 किलोमीटर में 1500000 पौधे लगाना।
  • पुरानी पार्कों की सुरक्षा और 120 नए पार्कों का विकास।

खाद्य प्रसंस्करण विभाग –

  • 1000000 मेट्रिक टन अतिरिक्त मक्का प्रसंस्करण तथा फल-सब्जी शहद की प्रसंस्करण क्षमता को 1500000 मेट्रिक टन करना।
  • गन्ने की उत्पादकता एवं चीनी मिलों की पेराई क्षमता का विस्तार।

ऊर्जा विभाग –

  • डीजल पंप सेट को विद्युत चालित पंप सेट में बदलना।
  • कृषि कनेक्शन के लिए नए विद्युत केंद्र और उप केंद्र की स्थापना।
  • ​कृषि फीडर का निर्माण
  • दूसरे कृषि रोड मैप की कुछ उपलब्धियां
    दूसरा कृषि रोड मैप 2012-17 का शुभारंभ तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने किया था। इसके निम्नलिखित फायदे हुए।
    – 2012 में चावल, 2013 में गेहूं एवं 2016 में मक्का के उत्पादन में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया है।
    – 2012 में नालंदा में 224 क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान और 729 क्विंटल प्रति हेक्टेयर आलू का उत्पादन का विश्व रिकार्ड बना।
    – कृषि रोड मैप लागू करने के पहले राज्य में औसतन चावल का उत्पादन 44 लाख टन प्रति वर्ष था, जो कृषि रोड मैप लागू होने के बाद बढ़ कर 76.67 लाख टन हो गया है।
    क्या कहा मुख्यमंत्री ने
    कृषि रोड मैप से जमीन के विवाद में कमी आएगी और किसानों को बहुत फायदा मिलेगा।खासतौर से इस रोडमैप की शुरूआत से बिहार के किसानों को हर तरह की सुविधा देने की शुरुआत की गई है। पहले और दूसरे कृषि रोडमैप में भी बहुत काम किया गया। बिहार के एक किसान ने आलू का बेहतरीन उत्पादन कर चीन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस नए कृषि रोडमैप से बीज विकास, वर्मी कंपोस्ट के क्षेत्र में काफी फायदा मिला है।

अॉर्गेनिक खेती में बिहार बनेगा अव्वल

नीतीश कुमार ने कहा कि हम चाहते हैं कि सब्जी के मामले में बिहार नंबर वन बन जाए। गांव-गांव में बिजली पहुंचाने की कोशिश हो रही है। हम परंपरागत तरीके से जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहते हैं और इसके लिए हमारे किसान काफी कुछ कर रहे हैं। हम किसानों को आगे लाने का प्रयास कर रहे हैं।
नीतीश कुमार ने कहा कि किसानोें को सब्सिडी देंगे। हरियाली मिशन पर तेजी से काम हो रहा है। हर भारतीय की थाली में बिहार का एक व्यंजन पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।
मंगला राय का अहम योगदान
कृषि रोडमैप का प्रारूप कृषि विशेषज्ञ डॉ. मंगला राय ने तैयार किया था। उस समय रोड मैप में श्रीविधि से पंक्ति में धान की रोपनी शुरू हुई। बीज प्रतिस्थापन दर (पुराने की जगह नए बीज का प्रयोग) बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। पहले जहां 5 प्रतिशत भी नए बीज का प्रयोग नहीं होता था। आज कृषि रोड मैप के कारण ही धान का 35 प्रतिशत नए बीज का प्रयोग होने लगा। इसी प्रकार गेहूं, दलहन व तेलहन में हुआ। रोड मैप में अनाज भंडारण क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। पहले 3 लाख टन ही राज्य में अनाज भंडारण क्षमता था। रोड मैप की योजनाओं के कारण आज भंडारण क्षमता 13 लाख टन हो गया है। पिछले 10 वर्षों में कृषि रोड मैप के कारण अनाज उत्पादन में डेढ़ से दो गुना वृद्धि हुई है। तकनीकी तौर पर किसान समृद्ध हुए है। रोड मैप में ही कृषि यांत्रिकीकरण का लक्ष्य तय किया गया था। आज गांवों में मजदूरों की कमी मशीन कर रही है। कंबाइन हार्वेस्टर से धान की कटाई हो रही है। रोपनी, बुआई से लेकर जुताई तक के लिए विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े कृषि यंत्र किसानों के खेतों में आ गए हैं। कृषि रोड मैप में किसानों को कृषि यंत्र पर विशेष सब्सिडी देने का लक्ष्य रखा गया। किसानों को नए फसल उत्पादन के साथ ही मछली उत्पादन, अंडा और मांस उत्पादन के लिए प्रशिक्षण के बिहार के साथ बाहर के राज्यों में भेजा जाने लगा। इसका असर दिखने भी लगा है। बिहार राज्य में कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि क्षेत्र का योगदान 18 प्रतिशत, जबकि राष्ट्रीय औसत 14 प्रतिशत है बिहार की कृषि पर जनसंख्या का दबाव अधिक है।

 

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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