September 16, 2019

700 महिला प्‍लंबरों को प्रशिक्षण देगा वी आर वाटर फाउंडेशन इंडिया

समूचे भारत में कुल 1600 प्लंबर किये जायेंगे प्रशिक्षित,रोका के वी आर वाटर फाउंडेशन इंडिया ने प्‍लंबरों को कौशल प्रदान करने के लिये इंडियन प्‍लंबिंग स्किल्‍स के साथ किया एमओयू पर हस्‍ताक्षर

संतोष कुमार सिंह

नई दिल्‍ली: भारत के गांवो में बहुत सारे परंपरागत कौशल हैं और हमारी महिलायें तो न जाने किन—किन गुणों की खान होती हैं। प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान शुरू किया तो न जाने कितनी महिलाओं को राजमिस्त्री का ट्रेनिंग देकर उनको शौचालय निर्माण के काम में लगाया गया और दर्जा मिला रानी मिस्त्री का। इसी तरह का एक परंपरागत कौशल है प्लंबिग का जो कि गांव से शुरू होता है लेकिन दिनोदिन होते शहरों के विस्तार के क्रम में इसका दायरा और विस्तृत होता चला जाता है। हर व्यक्ति को पानी संबंधी,शौचालय संबंधी जरूरतों के मद्देनजर प्लंबर की जरूरत होती है। इन्हीं जरूरतों के मद्देनजर युवाओं को इस ​क्षेत्र में रोजगार मिल सके इसके लिए पूरे भारत में 1600 प्‍लंबरों को प्रशिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। विशेष रूप से महिला प्लंबरों को प्रशिक्षित किये जाने की तैयारी की गई है। इस दिशा में वी आर वाटर फाउंडेशन व इंडियन प्‍लंबिंग स्किल्‍स काउंसिल (आइपीएससी) के बीच एक एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किया गया है ताकि प्लंबिग से जुड़कर लोगों को रोजगार मिल सके। गौरतलब है कि वी आर वाटर फाउंडेशन रोका बाथरूम प्रोडक्‍ट्स प्राइवेट लिमिटेड की सीएसआर इकाई है जिसने इस पहल को नाम दिया गया है ‘प्‍लंबिंग की पाठशाला।’

नेशनल स्किल्‍स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसडीसी) के तत्‍वधान में शुरू किये गये इस पहल का लक्ष्‍य समूचे भारत में प्‍लंबिंग श्रमबल को प्रशिक्षण उपलब्‍ध कराना है। इसमें महिलाओं पर विशेष फोकस किया जायेगा और बाथरूम इंडस्‍ट्री में लॉन्‍च की गई नई तकनीकों एवं उत्‍पादों को समझने में उनकी मदद की जा रही है। इस समझौते के मुताबिक ये दोनों ही संगठन नेशनल स्किल क्‍वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्‍यूएफ) के अनुसार, विशिष्‍ट रोजगार भूमिकाओं के लिये फ्री स्किल ट्रेनिंग उपलब्‍ध कराने के लिये एकसाथ काम करेंगे। प्रशिक्षण के आधार पर, प्‍लंबरों का मूल्‍यांकन किया जायेगा और उसके बाद उन्‍हें ट्रेनिंग प्रोग्राम्‍स को सफलतापूर्वक पूरा करने पर स्किल इंडिया एवं आइपीएससी सर्टिफिकेशन दिया जायेगा।

इस साझेदारी के बारे में बताते हुये केई रंगानाथन, मैनेजिंग ट्रस्‍टी, वी आर वाटर फाउंडेशन ने कहा, ”रोका-ड्ब्‍ल्‍यूएड्ब्‍ल्‍यूएफआइ में हमारा विश्‍वास खासतौर से महिलाओं को सशक्‍त बनाने की आइपीएससी की इस अद्भुत पहल में सहयोग करने में है। भारत में प्‍लंबिंग तकनीशियनों को प्रशिक्षित करने की बहुत ही जरूरत है। व्यक्ति के जीवन में बाथरूम का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। जिस तरह से तकनीक का दायरा इस क्षेत्र में बढ़ा है और जिस तरह के उत्पाद इसमें शामिल हो रहे हैं, ऐसे में इसे सुचारू और सहज रूप से चलाने के तकनीशियनों को प्रशिक्षित करना हो गया है। हम ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को सशक्‍त बनाने के लिये आइपीएससी के साथ साझेदारी करते रहेंगे, ताकि एक सेहतमंद व सम्‍मानित जीवन जिया जा सके।”

इस साझेदारी के संबंध में अपनी बात रखते हुए आइपीएससी के चेयरमैन आर. के सोमानी ने कहा, ”आइपीएससी समूचे भारत में प्‍लंबिंग तकनीशियनों का उत्‍थान करने के लिये प्रतिबद्ध है। हमने अब तक 1,00,000 से अधिक तकनीशियनों को आवश्‍यक प्‍लंबिंग स्किल्‍स प्रदान किये हैं। उन्होने कहा कि इस दिशा में हो रहे कार्यों मे हमारा सहयोग करने के लिये हम रोका-ड्ब्‍ल्‍यूएड्ब्‍लयूएफआइ के आभारी हैं।”


गौरतलब है कि प्लम्बर का काम पानी से संबंधित होता है। किसी भी घर या इमारत के बाथरूम या रसोईघर में पानी के पाइप को जोड़ने और उनकी मरम्मत करने वाले को प्लम्बर कहा जाता है। इसके अलावा बड़े-बड़े नहर से शहरों तक पाइप द्वारा पानी लाना या शहरों से गाँव में पानी लेकर जाना ये सभी काम प्लंबिंग इंजीनियरिंग की मदद से किया जाता है।
बावजूद इसके देश के विनिर्माण एवं इससे जुड़े प्रक्षेत्र के लिये प्‍लंबरों को पेशेवर प्रशिक्षण का घोर अभाव है, जोकि इस कार्य को बेहतर किये जाने की दिशा एक सबसे बड़ी कमी है। कौशल विकास की इस प्रक्रिया से लाभार्थियों को उनके श्रमबल को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और इस तरह रोजगार, उद्यमिता एवं आमदनी का उनकी सक्षमता बढ़ेगी।
उल्लेखनीय है कि कई राज्यों में महिला प्लंबरों को प्रशिक्षण देने की दिशा में व्यापक प्रयास किया गया है। मध्यप्रदेश में स्व-रोजगार गतिविधियों से जोड़ने के लिए आजीविका मिशन स्व-सहायता समूह की महिलाओं को राजमिस्त्री, प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि समूह से जुड़ी लगभग 10 हजार महिला सदस्यों ने इसमें रुचि व्यक्त की है, और इनका प्रशिक्षण प्रारम्भ कर दिया गया है।

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