June 06, 2020

पंचायती राज व्यवस्था की बेहतरी की दिशा में आगे बढ़ता हरियाणा, बदली है गांव की सूरत

संतोष कुमार सिंह
कहते हैं भारत की आत्मा गांव में बसती है क्योंकि देश की अधिकांश आबादी गांव में निवास करती है। आज देशभर में लगभग ढाई लाख ग्राम पंचायतें निरंतर भारत के विकास में अहम भूमिका निभा रही है। इन ढाई लाख पंचायतों में हरियाणा की 6500 पंचायतें भी शामिल हैं जिनको सशक्त बनाने का बीड़ा प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सत्ता में आते ही लिया था। वैसे तो भारत में ग्राम स्वराज और गांवों के आत्मनिर्भरता की परिकल्पना आजादी से पहले की है, लेकिन गाँधीजी ने एक दार्शनिक की तरह इस विचारधारा को विश्व के समक्ष रखा इसीलिए वो मील के पत्थर की तरह है और उनका ग्राम स्वराज दशकों बाद भी इतना ही प्रासंगिक है। क्योंकि इसमें गाँवों की आत्मनिर्भरता की बात है, उनके सशक्तीकरण की बात है, शोषण के विरुद्ध एक ठोस नीति की बात है। गांधी के सपनों को जमीन पर उतारते हुए प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल ने संकल्पों के जरिए हरियाणा में पंचायती राज व्यवस्था को नई उंचाई देने का प्रयास किया है।

एक तरफ उन्होंने प्रदेश के सभी 6500 पंचायतों को पढ़ी लिखी पंचायत का दर्जा दिलवाकर देश के समक्ष नया मिसाल कायम किया वहीं दूसरी ओर जिला परिषद को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक जिला परिषद को 20—25 करोड़ रूपये का बजट निर्धारित किया है। जिसे ये जिला परिषद अपने दायरे में आने वाली पंचायतों व गांव के विकास के लिए खर्च कर सकती हैं। इस लिहाज से ये जिला परिषद आत्मनिर्भर हो गयी हैं और उन्हें बजट के लिए सरकार की तरफ देखने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अंतर जिला परिषद का गठन किया है। वे खुद अंतर जिला परिषद की बैठक में तीन बार शामिल हो चुके हैं।

क्या होगा अधिकार

वित्तिय अधिकारों के संपन्न ये जिला परिषदें जिला ग्राम्य विकास अधिकरण यानी डीआरडीए और मनरेगा के तहत किये जाने वाली सारी कार्यों का निष्पादन करेंगी। इतना ही नहीं सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा आयोग के अधिकारियों को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया। महत्वपूर्ण बात ये जिला परिषदों के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने के साथ ही सरकार ने उन्हें जिला परिषद के खाते से वेतन देने की व्यवस्था भी की है। जिला परिषद के अध्यक्ष के पास मुख्य कार्यकारी अधिकारी का वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट लिखने का अधिकार भी दिया गया है। जिससे ये अधिकारी जिला परिषद के प्रति जवाबदेह बने रहें। अब जिला परिषद के सदस्य मुख्य कार्यकारी अधिकारी के साथ परामर्श कर विकास योजनाएं बनायेंगे।

पंचायतों को प्रोत्साहन के लिए सेवेन स्टार रेनबो पुरस्कार

प्रदेश के सभी पंचायत विकास के मामले में एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए और गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों को जमीन पर उतारने की दिशा में प्रयास करें इसके लिए प्रदेश सरकार ने सेवन स्टार रेनबो पुरस्कार शुरू किया। प्रदेश सरकार ने दूसरी बार पंचायतों को पुरस्कृत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें शामिल होने वाली पंचायतों को 30 जून तक आवेदन करना होगा। इनके आवेदन के जांच की प्रक्रिया 20 जुलाई तक चलेगी जबकी चयनित ग्राम पंचायतों के अवार्ड की घोषणा 31 जुलाई तक की जा सकती है और अगस्त के पहले सप्ताह में अवार्ड समारोह का आयोजन किये जाने की संभावना है।

क्या है सेवेन स्टार रेनबो स्कीम

हरियाणा सरकार ने सामाजिक स्तर पर विभिन्न मानक निर्धारित किये हैं जिसके आधार पर प्रदेश में पंचायतों को स्टार रैंकिग दिये जाने का प्रावधान है। ये मानक हैं लिंग अनुपात, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, ड्राप आउट न होना, गुड गर्वनेंस व सामाजिक भागीदारी। जो पंचायत सभी मानकों में बेहतर प्रदर्शन करेंगी उन्हें सेवेन स्टार रैंकिंग प्रदान करते हुए इंद्रधनुष पंचायत माना जाएगा। इतना ही नहीं इन इंद्रधनुषी रंगों के आधार पर भी पंचायतों को पहचान दी है। गुलाबी रंग का स्टार उस पंचायत को प्रदान किया जाता है जिसने अपने क्षेत्र में लिंगानुपात में सुधार के लिए कार्य किया है। इसी तरह सफेद रंग स्वच्छता के लिए, हरा रंग पर्यावरण के लिए केसरिया रंग अपराध मुक्त होने पर,आसमानी रंग बेहतर शिक्षा व्यवस्था, स्वर्ण रंग सुशासन, सिल्वर रंग विकास गतिविधियों में पंचायत की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी के लिए निर्धारित किया गया है।

सरपंचो को दिया गया है प्रशिक्षण

इस रैंकिग प्रक्रिया में शामिल होने वाले पंचायतों के ग्राम सचिवों व सरपंचों एकदिवसिय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें पूरी जानकारी दी गयी है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 व 12 जून को रोहतक में आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्हें आनलाइन आवेदन, आवेदन के समय संलग्न होने वाले दस्तावेजों,उनके सत्यापण की प्रक्रिया की पूरी जानकारी मुहैया करायी गयी है। प्रत्येक जिले में जिला पंचायत अधिकारी कार्यालय इनका पंजीकरण किये जाने का प्रावधान है। साथ ही पहले स्तर पर जिला स्तरीय कमिटी इसकी समीक्षा करेगी। दूसरे स्तर पर इसकी समीक्षा अंतर जिला समिति द्वारा किया जाएगा। गौरतलब है कि गत वर्ष 18 प्रतिशत पंचायतों को स्टार दिए गये थे। जबकी इस वर्ष अभी तक 346 पंचायतों ने पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की है। अब तक 43 पंचायतों ने आनलाईन आवेदन अपलोड किया है।

पंचायतों को मिलेगा विशेष अनुदान

स्टार रैंकिग हासिल करने वाले पंचायतों के लिए प्रदेश के विकास और पंचायत विभाग द्वारा उनके प्रदर्शन के आधार पर विकास कार्यों के लिए विशेष अनुदान राशि दी जाती है। 6 स्टार पाने वाली ग्राम पंचायत को 20 लाख रूपये दिये जाने का प्रावधान है। वहीं 5 स्टार हासिल करने वाले पंचायतों को 15 लाख, चार स्टार वालों को 10 लाख रूपये की अतिरिक्त विकास निधि दिये जाने का प्रावधान है।

 

बदली है पंचायतों की सूरत

इतना ही नहीं मनोहर लाल ने प्रशासन में पारदर्शिता को सर्वाधिक महत्व देते हुए न सिर्फ पंचायती राज संस्थाओं को नई पहचान देने की दिशा में कदम बढ़ाया है अपितु साथ ही साथ राज्य को कैरोसीन और खुले में शौच मुक्त बनाया गया। कन्या भ्रूण हत्या का कलंक को खत्म करने के लिए बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम चलाये। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और छात्रवृत्तियों में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा थे, जिन्हें खत्म किया गया है।

इस लिहाज से देखें तो अब पंचायत पहले की तुलना में काफी बदल गये हैं और गांव में भी विकास की होड़ दिखती है, और गांव तरक्की के लिहाज से एक दूसरे से प्रतिस्प्द्र्धा करते दिखते हैं। मनोहर लाल सरकार के कार्यकाल में पंचायतों की भूमिका में विस्तार हुआ है और उन्हें विकास के लिए जरूरी धन,संसाधन व अधिकार दिये जा रहे हैं जिसका असर हरियाणा के गावों घूमते हुए दिखाई देता है। प्रदेश में कई ऐसे पंचायत हैं,गांव हैं जहां 24 घंटे बिजली उपलब्ध है, पक्की सड़के हैं और गांव का सर्वांगिण विकास हुआ है।

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