March 24, 2019

बदलाव की राह पर आगे बढ़ता ग्राम पंचायत सिंहवाहिनी

rity_nरितु जयसवाल
नमस्ते ! अंतर्मन से आपको प्रणाम ! मैं रितु जयसवाल, मुखिया,
ग्राम पंचायत सिंहवाहिनी, सीतामढ़ी, बिहार, आप को और आपके परिवार को नए साल 2017 की अशेष शुभकामनायें देती हूँ और आप के हर्षित, समृद्ध और शांतिप्रिय नव वर्ष के लिए परम पिता परमेश्वर से प्रार्थना करती हूँ |
बीता साल 2016 मेरी ज़िन्दगी का अब तक का सब से महतव पूर्ण साल रहा जिसकी महत्ता बयां करती हमारी ये तस्वीर | ये दिन था बिहार ग्राम पंचायत चुनाव के नतीजे का जब असल जिम्मेदारियों का बोध हुआ | बात है साल 2013 के अप्रैल महीने की जब शादी के 17 साल बाद मैंने घर में अपना स्वसुराल देखने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद दिल्ली से बिहार राज्य के सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड के ग्राम पंचायत सिंहवाहिनी के एक छोटे से गाँव नरकटिया का सफ़र शुरू हुआ |

mukhiyaaaaaaaaaaaaaa_nपास में एक जगह है भुतही | वहां तक का सफ़र तो सामान्य था पर उसके आगे उबड़-खाबड़ सड़के शुरू हुई और पंचायत आते आते आगे जा कर रास्ता सड़क-विहीन हो गया | गाडी कीचड़ में फंस चुकी थी, फिर बैल-गाडी का सहारा लेना पड़ा क्यूँ की उस फिसलन से भड़ी मिट्टी में पैदल चलना भी दूभर था | अब आगे जा कर घुटने भर पानी जहाँ बैल गाडी ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए | उस घुटने भर पानी में घुस कर जाना हुआ और वैसे रस्ते पर तकरीबन 1 किलोमीटर तक चलने के बाद आखिरकार आ गया हमारा गाँव नरकटिया और वहां स्थित हमारा छोटा पर प्यारा सा पैतृक घर | चारों ओर नज़र दौडाने पर एक भी बिजली का खम्भा तक नहीं दिखा, हाँ दिए की टिमटिमाती रौशनी कहीं कहीं ज़रूर नज़र आती थी जो ये हौसला देती थी की चलो अँधेरे में भी रोशिनी की एक उम्मीद तो है | घर में गई तो सोने एक कमरा जिसमें सापों का डर अलग से | सुबह सुबह गाँव भ्रमण करना हुआ तो शिक्षा के नाम पर पता चला की गाँव में एक भी लड़की मैट्रिकुलेट नहीं | कुछ संपन्न नौकरी वाले लोगों को छोर चारों तरफ बेरोजगारी, अपराध का बोल बाला, भुखमरी, बिमारी और भ्रष्टाचार | इश्वर की कृपा से बचपन से कभी किसी चीज़ की कमी नहीं हुई थी और अचानक लोगों की इतनी दुखदायी स्थिति को देख मन व्यथित हो गया और अन्दर ही अन्दर अपने आप को कोसने लगी की हम सब बाहर में देश भर में बड़े बड़े कार्यों में लगे रहते हैं और जो घर हमारी मातृभूमि है उसकी सेवा में ही चुक जाते हैं | रात भर सोचते सोचते आखिरकार भोर में मैंने घर वालों से फ़ोन पर बात की और कहा की मुझे अब यही रहना है | यही पर अपने गाँव के लोगों के बीच रह कर गाँव के उत्थान पर कार्य करना है | इतना सुनते ही कुछ सवाल जवाब के बाद सब ने मेरे इस फैसले पर अपनी सहमती दी और हर कदम पर बदलाव लाने की इस मुहीम में मेरा हर संभव तरीके से साथ देने का भरोसा दिया | उसके बाद गाँव के अपने छोटे से घर में रहना शुरू किया जिसमें मुलभुत सुविधाओं का भी अभाव था पर फिर भी एक अजीब सी सुकून की अनुभूति होती थी | फिर शुरू हुआ गाँव की समस्याओं के निराकरण की मुहीम |

mukhiya 2_nएक टीम बनी जिसमें 12 लडकियां थी | सब को पढ़ाना शुरू किया और पिछले साल सब ने मैट्रिक की परीक्षा दी और पहली बार गाँव से एक साथ 12 लडकियां मैट्रिकुलेट हुईं | उन्हें मैंने ब्यूटी टिप्स से ले कर मशरूम की खेती तक की ट्रेनिंग भी दी | ये कारवां बढ़ता गया और आज इन्ही बच्चों के सहयोग से पूरे पंचायत से तकरीबन 520 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं | विद्युत् विभाग में गाँव के विद्युतीकरण के लिए गई तो पता चला की पूरा पंचायत कागज़ी तौर पर पहले से ही विद्युत्कृत है | यहाँ पर काफी भाग दौड़ के बाद अपने व्यक्तिगत संपर्क से आखिरकार एन.एच.पि.सी और बिहार राज्य पावर होल्डिंग कम्पनी के सहयोग से विद्युतीकरण कार्य शुरू हुआ जो आज तक चल रहा | पंचायत पुल निर्माण में राशि कम होने की वजह से अवगत हुई तो वहां भी नाबार्ड और ग्रामीण कार्य विभाग से संपर्क कर के 5 करोड़ रुपये निर्गत कराया | सिलाई कटाई प्रशिक्षण शिविर, स्वास्थ जांच शिविर, ये सब लगवाते कराते 2 साल कब बीत गए पता ही नहीं चला | फिर समय आया बिहार पंचायत चुनाव का, लोगों ने कहा की सम्पूर्ण पंचायत को हमारी ज़रूरत है पर मैंने कहा मैं गाँव ठीक करने आई हूँ, राजनीति में मुझे मत धकेलिए क्यूंकि मैं भी उन्ही लोगों में से एक हूँ जो आज के राजनीति से नफरत करती हूँ | पर सब ने समझाया की जिसे आप राजनीति समझ रही हैं वो हकीकत में जिन लोगों के बीच आपने बदलाव की एक दीप प्रज्वलित की है उस प्रकाश को सब जगह फैलाने का कार्य है इसलिए ना मत कहिये | और तब हमनें पंचायत चुनाव लड़ने की घोषणा की | जी तोड़ मेहनत की गई | जहाँ सुनने में आता है की लोग पंचायत चुनाव में 20 लाख तक खर्च करते हैं वहां हमारे जो सरकार की ओर से जो अनुमोदित 40, 000 की राशि है उतने ही खर्च हुए | लोगों ने नामांकन में जाने के वक़्त अपने साथ सत्तू पानी ले जाना उचित समझा पर एक पैसे खर्च नहीं होने दिए | जहाँ एक आम राय है की वोटिंग जाती पाती पर होती है, वहां मेरी जाती के मात्र 8 घर होने के बावजूद 1853 वोट से पंचायत के लोगों ने हमें चुनाव जिताया | साल 2016 सबसे महत्वपूर्ण इसलिए है क्यूंकि चुनाव जीतना बड़ी बात नहीं थी | ख़ास था की लोगों ने हमें इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी संभालने के लायक समझा और जात पात, उंच नीच सब से ऊपर उठ कर मुझमें विश्वास जताया | वो हज़ारों महिलाओं की भीड़ आज भी याद है जो मुझमें बदलाव की एक उम्मीद देख कर मेरे लिए आये थे और आज भी हर पल हर समय खड़े रहते हैं |

logooooooooooo_n
अब इतने महीने बाद सामाजिक बदलाव की एक नीव जो हम सब ने मिल कर रखी थी उसका असर चारों दिशाओं में फैलता दिख रखा है | अपने लोगों से नए साल में एक वादा करती हूँ की जो उम्मीद उन्होनें हमसे लगाई है उसे कभी भी टूटने नहीं दूँगी | कभी भी जाती-धर्म, ऊँच-नीच के कीचड़ में खुद को नहीं जाने दूँगी और सदा ही निस्वार्थ भावना से दिल से आपकी सेवा करती रहूंगी | हाँ ! कुछ गलतियाँ कभी होंगी, उस समय एक सेवक की तरह ही छोटों के सुझाव और बड़ों की डांट सुनने के लिए सदा आगे रहूंगी | नया साल 2017 मेरे द्वारा अपने इलाके में स्वास्थ, सड़क, और शिक्षा के क्षेत्र में एतिहासिक कार्य करने के लिए जाना जाएगा इसकी आज ही घोषणा करती हूँ | आपका प्रेम और विश्वास यूँ ही बना रहे | एक बार फिर से नव वर्ष की शुभकामनायें |

About The Author

एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *