October 17, 2019

प्रधानमंत्री ने सुनी मन की बात

राजीव चन्देल

बड़े सुबह सूचना आई. पूछा गया कि आपने मा. प्रधानमंत्री जी से किसी चीज की डिमांड की थी. रात दो बजे तक किताब (बिजली मिलेगी, पानी नहीं) पर काम करने की वजह से अधखुली नींद में था, सो झल्लाकर बोल दिया कि हां, कहा तो था कि अमेरिका जा रहे हो तो मुझे भी लेते चलना. उधर से कहा गया कि मजाक मत करिये हम सिंचाई विभाग से इंजीनियर अवनीश हूं. प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर यूपी गवर्नमेंट ने हमारे विभाग को यह जिम्मेदारी दी है ओर आपसे मिलकर प्रोजेक्ट का रैंडम सर्वे करके आज ही रिपोर्ट भेजनी है. आप राजीव चन्देल ही हैं न . इतना सुनते ही मैं एक झटके में उठकर बैठ गया. दिमाग की मेमोरी को ओपेन किया तो सब कुछ याद आ गया.

अप्रैल के महीने में मैने मा. प्रधानमंत्री जी से इलाहाबाद जनपद के टोंस नदी में दो जगहों पर लिफ्ट पंप लगाकर नई नहरें बनाने की डिमांड की थी. सिंचाई विभाग को यह निर्देश प्रधानमंत्री कार्यालय से होते हुए यूपी गवर्नमेंट ने दिया था कि जितनी जल्द हो सके टोंस नदी का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रेषित किया जाय कि बताये गये स्थलों पर क्या लिफ्ट पंप कैनाल स्थापित की जा सकती है.

फिलहाल मैं जल्दी-जल्दी भागा. इंजीनियर साहब अपनी टीम के साथ इंतजार कर रहे थे. मेरी हुलिया देखते ही उन्होंने कहा कि आइए चन्देल जी हम लोग जैसा सोच रहे थे विल्कुल सेम वैसे ही हैं आप. मैंने मुस्कराते हुए पूरी टीम का अभिवादन किया और सभी लोग टोंस नदी की ओर कोहड़ार घाट के लिये निकल पड़े।

कोहड़ार घाट से आगे डाबर गांव है. इस गांव से होकर बेलन नहर प्रणाली से संचालित होने वाली हरदिया राजवाहा निकली है, जो सुजनी तक जाती है. हरदिया गांव से एक ब्रांच ईंटवा कला के लिये निकाली गई है. इन दोनों राजवाहों में करीब दो दर्जन माइनर हैं. लेकिन बेलन नहर प्रणाली की कल्टीवेटिंग कमांड (सीसीए) एरिया इतना अधिक है कि डाबर के बाद से पानी की गति क्षीण पड़ने लगती है. डाबर से आगे सुजनी व ईंटवा टेल तक करीब 27 वर्ग किमीं की परिधि में सिंचाई के सीजन में पानी के लिये भयंकर मारा-मारी मच जाती है. कभी-कभी मेजा जलाशय (जनपद मिर्जापुर) में पानी कम होने से इस क्षेत्र तक नहर का पानी नहीं ही आ पाता.

मैंने यही बात मा. प्रधानमंत्री जी को बतायी और कहा कि कोहड़ार से आगे ममोली गांव के किनारे टोंस नदी में एक लिफ्ट पंप लगाकर पानी डाबर गांव के सामने बेलन प्रणाली की हरदिया राजबहा में छोड़ दिया जाय तो डाउन स्ट्रीम में 27 किमी परिधि के कल्टीवेटिंग कमांड एरिया के हर खेत में पानी पहुंच जायेगा..उधर बेलन नहर के इस बचे हुए पानी को मांडा एरिया में दे दिया जाय, जिससे उस एरिया में वर्षों से बंद पड़ी माइनरें फीड होने लगेंगी.

दूसरा विकल्प हमने मेजा के ही धंधुआ गांव में टोंस नदी से लिप्ट पंप द्वारा पानी उठाकर दिघलो गांव के पास उसी हरदिया हरदिया राजवाहे में छोड़ने का विकल्प दिया था. हालांकि यहां से सिंचाई का एरिया डाबर के अपेक्षा कम है, लेकिन धंधुआ गांव के समीप टोंस नदी में पानी इतना अधिक पर्याप्त है कि एक-दो साल पानी न भी बरसे तो भी पंप चलती रहेगी.

फिलहाल मुझे खुशी है कि डाबर और धंधुआ दोनों जगहों पर टोंस नदीं में लिप्ट पंप स्थापित करने को लेकर फौरी रिपोर्ट बन गई. इंजीनियरों की टीम ने कहा कि इस स्कीम को सफल करने के लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी… हमने कहा नो टेंशन आप रिपोर्ट बनाकर उपर भेजिए बाकी आगे का काम मुझ पर छोड़ दीजिये।

इन परियोजनाओं को पास कराने के लिए में जुलाई माह में मुख्यमंत्री योगी जी व कृषिमंत्री राधामोहन सिंह जी से मिलूंगा..। देखते हैं क्या होता है….

मेरा विश्वास अटल है कि कुछ करते रहने से ही कुछ-कुछ होता रहता है..।

About The Author

एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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