August 20, 2019

उत्तराखंड पंचायत चुनाव: हजारों प्रत्याशियों की दावेदारी अधर में

हरिद्वार: उत्तराखंड में उहापोह के बीच पंचायत चुनाव प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन इसके साथ ही शुरू हो गया है घमासान। एक तरफ सरकार पर पंचायत चुनाव को शांतीपूर्ण तरीके से कराने की चुनौती है, वहीं दावेदारों के बीच प्रक्रिया को लेकर खींचतान। इस बीच उच्च न्यायालय ने यह साफ कह दिया है कि आगामी चार माह में पंचायत चुनाव कराना होगा। हालाकि सरकार के सामने 12 जिलों में 67 हजार पदों के चुनाव से जुड़ी व्यवस्था करने की चुनौती है जो बहुत आसान नहीं है। इस बीच शासन ने आरक्षण की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। जिलाधिकारियों को इस संबंध में कार्रवाई के लिए चिट्ठी भेज दी गई है। दो बच्चों की शर्त और शैक्षिक योग्यता की व्यवस्था लागू होने के बाद बहुत सारे लोग चुनाव नहीं लड़ पायेंगे।

आरक्षण की प्रक्रिया हुई शुरू
पंचायतीराज विभाग में प्रभारी सचिव डॉ.रंजीत कुमार सिन्हा के मुताबिक सभी जिलाधिकारियों को आरक्षण की प्रक्रिया तय करने के लिए पत्र भेजा गया है। इसका मतलब यह हुआ कि प्रदेश सरकार की तरफ से 12 जिलों के करीब 67 हजार पदों के लिए आरक्षण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शासन स्तर पर जिला पंचायत के अध्यक्षों का आरक्षण तय किया जाएगा, जबकि क्षेत्र और ग्राम पंचायतों का आरक्षण जिले स्तर पर तय होगा। लेकिन पंचायतीराज संशोधन एक्ट 2019 के अनुसार निर्वाचन में आरक्षण को लेकर अब नई नियमावली फिलहाल नहीं बनाई जा रही है। शासन ने अब पुरानी नियमावली के आधार पर ही इस दिशा में कार्रवाई का निर्णय लिया है।
आरक्षण और शैक्षणिक योग्यता से कई दावेदार पस्त
आगामी पंचायत चुनाव में दो बच्चों की शर्त को लागू करते हुए 300 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म कर दिया गया है। इससे एक झटके में हजारों लोगों की दावेदारी मुश्किल है। इसके साथ शैक्षिक योग्यता को ले​क​र किया गया निर्धारण भी कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।


हजारों पुराने प्रत्याशी नहीं लड़ पायेंगे चुनाव

सन् 2014 में हुए पंचायत चुनाव में भाग लेने वाले 15338 प्रत्याशी इस बार चुनाव नहीं लड़ पायेंगे क्योंकि इन प्रत्याशियों ने पिछले वर्ष के चुनाव का विवरण नहीं दिया है। हालांकि हाईकोर्ट से चुनाव कार्यक्रम पर मुहर लग जाने के बाद पंचायती विभाग और राज्य विभाग की तैयारियां तेज हो गई है। नियम के अनुसार चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को एक महीने के अंदर चुनावी खर्च का सारा विवरण रिर्टनिंग अधिकारी को देना पड़ता है। आयोग के नोटिस जारी होने पर भी इनमें से अधिकांश ने खर्च का विवरण नहीं दिया। ऐसे में आयोग ने ऐसे कुल 15338 प्रत्याशियों पर 6 वर्ष के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी। और साथ ही साथ जिला निर्वाचन अधकारी कार्यलयों को संबधित लिस्ट भी उपलब्ध करा दी है,ताकि उनमें से कोई भी चुनाव न लड़ सके। 20 सिंतबर तक आरक्षण प्रकिया पूर्ण होगी। अर्थात अक्टूबर के अंत तक ग्राम प्रधान,क्षेत्र सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव संपन्न कराए जाएंगे। दूसरे चरण में 30 नवंबर तक क्षेत्र पंचायत प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव होने भी है। नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को हरिद्वार में भी चुनाव सही समय पर हालांकि 2020 दिसंबर तक कराने को कहा है।

बीडीसी,जिला पंचायतो में बैठेंगे प्रशासक
पंचायतीराज विभाग नें 9 अगस्त को क्षेत्र पंचायत एवं 12 अगस्त को जिला पंचायत की कार्यकाल समाप्त होते ही दोनों जगहों पर प्रशासकों की नियुक्ति के आदेश जारी किए है। पंचायती राज सचिव रंजीत कुमार सिन्हा ने जिला पंचायतीराज अधिकारियों को चुनाव के लिए जरूरी आदेश निर्गत कर दिया है। उधर राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को जरूरत के अनुसार नामांकन पत्रों की छपाई करने के आदेश जारी कर दिए है।

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