October 17, 2018

धान की बेहतर पैदावार के लिए घास नियंत्रण जरूरी

पंचायत खबर टोली

  • रोपाई के 21 दिन बाद धूप में करें दवा का छिड़काव
  • विलंब होने की दशा में प्रभावित होंगे कल्ले व बढ़वार

    मउ:खरीफ की प्रमुख फसल धान की कमोबेश बुआई पूरी हो गयी है। अ​ब किसान भाई खर पतवार नियंत्रण को लेकर परेशान है। क्योंकि खरीफ की मुख्य फसल धान में घास नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण विषय होता है। अच्छी जोताई, उर्वरक प्रबंधन और सघन रोपाई के बाद भी घास पर नियंत्रण न करने से पौधों के कल्लों में कमी के साथ पैदावार में भी गिरावट आ जाती है।
    कृषि वैज्ञानिकों की राय है कि घास नियंत्रण के लिए रोपाई के समय या 21 दिन बाद रसायनों का छिड़काव किया जाना चाहिए। लेकिन दवा छिड़काव के समय किसान भाईयों को विशेष सावधानी बरतने की भी जरूरत है।
    ऐसा न होने पर कल्लों की संख्या के साथ फसल की बढ़वार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में उत्पादन में 25 प्रतिशत गिरावट आने की संभावना बन जाती है।

  • क्या कहते हैं विशेषज्ञ
    वरिष्ठ केवीके वैज्ञानिक डा. वीके सिंह बताते हैं कि रिमझिम फुहारों से धान के साथ घास में आशातीत वृद्धि होगी। मजदूरों द्वारा घास नियंत्रण सावधानी से कराया जाना चाहिए, जबकि दवा छिड़काव हमेशा धूप में किया जाना चाहिए। दवा छिड़काव के बाद कम से कम चार घंटा तेज धूप का होना नितांत आवश्यक है। रोपाई के समय घास का नियंत्रण न होने की दशा में 21 से 25 दिन बाद दूसरी बार किया जाता है। इस दौरान खेत से पानी निकाल देना चाहिए। खेत में पानी होने से दवा उस क्षेत्र में प्रभावी नहीं होगी। दूसरी बार नोमिनी गोल्ड, एंडूरा या पारस नामक दवा का प्रयोग 100एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से करना चाहिए। दवा छिड़कने के चार घंटे तक धूप खिली मिलने पर दवा और भी प्रभावी हो जाती है। कल्ले निकालने से पहले घास का प्रबंधन हर हाल में कर देना चाहिए। इस दौरान यूरिया छिड़काव को लेकर सचेत करते हुए डा. सिंह बताते हैं कि खरीफ की मुख्य फसल धान में यूरिया के पहले छिड़काव के लिए इस तरह का बरसाती मौसम सबसे अनुकूल है। यूरिया के दानों का विगलन त्वरित होते हुए पौधे की जड़ से लेकर पत्ती तक प्रभावी होगा। इसी समय पहले छिड़काव में ही जिंक का प्रयोग करने से आगामी दिनों में कम वर्षा की स्थिति में भी फसल में रोग प्रतिरोध क्षमता का विकास होगा।

About The Author

एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *