July 19, 2019

प्रदेश में ​विकास का दावा..खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा यूपी-बिहार के मजदूर

संतोष कुमार सिंह
 नई दिल्ली: बिहार,उत्तर प्रदेश खासकर  पूर्वांचल से बड़ी संख्या में पलायन देश के महानगरों में ही नहीं अपितु छोटे—छोटे शहरों में भी रोजी रोटी की तलाश में होता रहा है। एक तरह से कहें तो इस पूरे क्षेत्र में ये प्रवासी मजदूर ही गांव—गंवई के लोगों के खुशहाली का सबब बने हुए हैं। लेकिन अब इस दायरे का और विस्तार हुआ है। बड़ी संख्या में नौजवान मजदूरी या छोटे—मोटे काम की तलाश में विदेशों का भी रूख करने लगे हैं। विशेष रूप से खाड़ी देशों में। कुल मिलाकर कहें तो इस पूरे क्षेत्र की खुशहाली मनिआॅडर इकोनॉमी पर आधारित है। राजनीतिक नेतृत्व के विकास के तमाम दावों के बावजूद खेती—किसानी करने वाला हमारे किसान परिवार के युवा बड़ी संख्या में अपना श्रम विदेशों में बेचने को मजबूर हैं।  हाल ही में जारी विदेश मंत्रालय के पीओई ( प्रोटेक्टोरेट जनरल ऑफ इमीग्रेंट्स ) के ताजा आंकड़ों की माने तो अब बिहार उत्तर प्रदेश के इन प्रवासी मजदूरों ने  केरल व तमिलनाडु को भी पीछे छोड़ दिया है।

क्या कहती है रिपोर्ट
इस रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक विदेश जाने वाले श्रमिकों या कामगारों में सबसे ज्यादा लोग तमिलनाडु और केरल के होते थे लेकिन अब उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग उनसे काफी आगे निकल चुके हैं। इन प्रवासी मजदूरों की संख्या सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देश में काफी है। ऐसा भी नहीं है इन देशों में जिंदगी आसान है। एक तरफ तेल की गिरती कीमत के कारण रोजगार के अवसर हुए हैं। वहीं दूसरी ओर समय—समय पर इन देशों में मजदूरों के साथ ज्यादती की खबरें भी सुर्खियों में होती हैं।
क्या कहते हैं आकड़े
यदि विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों पर गौर करें तो  सउद अरब, कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान जैसे में देशों में 85 लाख भारतीय मजदूर काम कर रहे हैं। पिछले वर्ष देश से बाहर जितने श्रमिक गए हैं उनमें 30 फीसद उत्तर प्रदेश के और 15 फीसद बिहार के हैं। जबकि केरल से जाने वाले श्रमिकों की हिस्सेदारी महज 9 फीसद है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में सऊदी अरब में सबसे ज्यादा 1.65 लाख भारतीय श्रमिक हैं। जबकि यूएई में 1.63 लाख, ओमान में 63 हजार, बहरीन में 12 हजार और कुवैत में 72 हजार भारतीय श्रमिक हैं।

बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा
ऐसा नहीं ये विदेश में विपरित परिस्थितियों में रह रहे बिहार और उत्तर प्रदेश के नौजवान केवल अपने घरों को ही खुशहाल कर रहे हैं,अपितु देश की खुशहाली में भी इनका अहम योगदान है। विशेष रूप देश में विदेशी मुद्रा जुटाने में इनकी अहम भूमिका है। विदेशों में काम कर रहे है भारतीयों से आने वाली विदेशी मुद्रा में 40 फीसदी हिस्सेदारी खाड़ी देशों के मजदूरों की है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक श्रम से विदेशी मुद्रा प्राप्त करने वाले एशियाई देशों में भारत 2014-15 और 2015-16 में 70 और 69 अरब डॉलर के साथ शीर्ष पर है।
क्या है पलायन का कारण
वैसे तो कृषि मंत्रालय कृषि संगठनों के लगातार यह बात दुहराये जाने के बावजूद की सूखे से बड़ी संख्या में किसान प्रभावित हैं और पलायन बढ़ा है को स्वीकारने को तैयार नहीं। बार—बार यह दावा किया जाता रहा है कि केंद्र सरकार के प्रयासों से सूखे का प्रभाव आम जनमानष पर नहीं परा है। लेकिन विदेश मंत्रालय के अधिकारी और प्रवासी मजदूरों के महा संरक्षक एम सी लूथर का कहना है कि सूखे से प्रभावित राज्यों से सबसे ज्यादा संख्या में विदेश जाते हैं। इस बार तो अहम वजह सूखा लग रहा है। 2016-17 के रुझान में यूपी बिहार की हिस्सेदारी में काफी बढ़ोतरी हुई है। हमने जब आंकड़ों का अध्ययन किया गया तो यह पता चला कि जिन दस जिलों में सबसे यादा सूखा पड़ा है वहां से सबसे यादा श्रमिक विदेश गए हैं। इन दोनों राज्यों के ग्रामीण इलाकों में यादातर लोग खेती कार्यो से जुड़े हैं लेकिन कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की काफी कमी हो गई है। ऐसे में इन्हें रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।’

विदेश मंत्रालय की नजर में हैं प्रवासी
विदेश जाने वाले भारतीय कामगारों के हितों की रक्षा के लिए विदेश मंत्रालय ने इमाइग्रेट नाम से एक योजना शुरू की है। इससे न सिर्फ श्रमिकों को बाहर भेजने वाले एजेंसियों के कामकाज पर नजर रखी जाएगी बल्कि विदेश में फंसे भारतीय मजदूरों को कई तरह से मदद भी मुहैया कराई जाएगी। विदेश जाने वाले हर भारतीय श्रमिक को एक विशेष नंबर और कार्ड देने की योजना भी शुरू की गई है। इससे विदेश में फंस जाने पर या पासपोर्ट वगैरह गुम हो जाने की स्थिति में भारतीय कामगारों को काफी मदद मिलेगी। कामगारों की मदद के लिए ईलॉकर सेवा की भी शुरुआत की गई है। इसमें विदेश जाने से पहले इन कामगारों के हर जरूरी प्रपत्रों की कॉपी सुरक्षित रहेगी। (इनपुट: मिंट से साभार)

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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