June 06, 2020

श्रमिकों की मदद के साथ बिहार के नवनिर्माण के लिए सार्थक पहल कर रहे हैं प्रवासी बिहारी

मंगरूआ
नयी दिल्ली: कोरोना महामारी के इस दौर में एक तरफ जहां देश के अन्य राज्यों से प्रवासी बिहारियों का तमाम तरह की दु​श्वारियां उठाते हुए बिहार लौटने का सिलसिला जारी है, और इस क्रम में जिस तरह की तस्वीरें मीडिया,सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए आ रही हैं वो निश्चित रूप से बिहार जैसे गौरवशाली अ​तीत वाले राज्य के ​भविष्य के विषय में चिंता बढ़ाती हैं। लेकिन कहते हैं न हिम्मते मरदा, मददे खुदा। लेकिन सवाल सिर्फ हिम्मत का भी नहीं है और न ही इस क​ठिन घड़ी में खुदा से मदद मिलने की उम्मीद है और कुल मिला के देश दुनिया संवारने निकले बिहारियों पर यह शायरी फिट  है कि
न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम, न इधर के हुए न उधर के हुए
रहे दिल में हमारे ये रंज-ओ-अलम, न इधर के हुए न उधर के हुए।
बावजूद इसके इस ​कठिन समय में भी बिहार से बाहर रह रहे कुछ प्रगतिशील युवाओं ने माटी का कर्ज चुकाने के लिए बिहार प्रवासी एसोसिएशन की परिकल्पना के जरिए कमर कस ली है। संगठन से जुड़े युवाओं ने एक तरफ मुश्किल घड़ी ​में देश के अन्य राज्यों में लॉकडाउन पीरियड में भूखमरी और परेशानियां झेल रहे आम श्रमिकों के मदद का बीड़ा उठाया वहीं दूसरी तरफ बिहार के बेहतर भविष्य और पुर्ननिर्माण के मद्देनजर लगातार लॉकडाउन पीरियड में भी संवाद की प्रक्रिया बनाये रखी है ताकि बिहार की आत्मनिर्भरता और ग्रामीण ईलाकों में देश के अन्य राज्यों से गांव लौटे श्रमिकों के लिए कामकाज की व्यवस्था के बीच पुल का काम कर सकें जिससे पलायन से इस दुष्चक्र से मुक्ति मिल सके। इस क्रम में उन्होंने खेती—बाड़ी से लेकर बड़े—छोटे उद्योगों के स्थापना, सेवा क्षेत्र के विस्तार, बुनियादी से लेकर उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की दिशा में व्यापक विचार विमर्श की प्रक्रिया शुरू की है और यह प्रक्रिया लगातार चल रही है और इसके सुखद परिणाम भी सामने आने की उम्मीद है।
जैविक खेती पर हुई चर्चा


बिहार प्रवासी एसोसिएशन बिहार में जैविक खेती, आयुर्वेदिक खेती और फल-सब्जियों की खेती की संभावनाएं और अवसर के परिप्रेक्ष्य में 7 मई को एक परिचर्चा का आयोजन किया। इस परिचर्चा में एग्रोमिशन फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के निदेशक कुंदन कुमार बिहार में कृषि में रोजगार सृजन और किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाने से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से अपनी बात रखी। वहीं परिचर्चा में शामिल महिला उद्योग संघ की अध्यक्षा श्रीमती उषा झा ने कृषि में महिलाओं के योगदान और उनकी चुनौतियों और भविष्य के रास्ते पर अपनी बात रखी ताकि महिलाओं के लिहाज से कृषि में संभावनाओं,चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा कर अधिक से अधिक महिला शक्ति को कृषिउन्मुख बनाया जा सके। इतना ही नहीं इस परिचर्चा में बहुत सारे कृषक, कृषि उद्यमी, कृषि के क्षेत्र मे कार्य करने वाले व्यापारी और खेती किसानी में नवोन्मेष को बढ़ावा देने वालेनयी पीढ़ी ने भाग लिया।
कपड़ा उद्योग की बिहार में असीम संभावना


बिहार प्रवासी एसोसिएशन, बिहार में कपास, जूट, ऊन, रेशम, नायलॉन को कपड़ा उद्योग के संभावनाओं, अवसरों और चुनौतियों के एक परिचर्चा का आयोजन किया थाI इसका मुख्य उद्देश्य बिहार की वैश्विक पहचान और सतत विकास के लिए कपास, जूट, ऊन, रेशम, नायलॉन के कपड़ा उद्योग को प्रोत्साहित करना। गूगल मीट पर आयोजित इस परिचर्चा में कई कपड़ा उद्योगपति, डिजाइनर सह विशेषज्ञ, सलाहकार और सेवा प्रदाता बिहार में कपड़ा उद्योग के क्षेत्र में अवसरों और संभावनाओं जुड़ी अपनी बात विस्तार से रखी। इस क्रम में एम-टेक्स ग्लोबल संस्थापक सह निदेशक ललित किशोर ने टेक्सटाइल उद्योग में संभावनाओं और अवसरों पर अपना बात रखी। इस क्रम में उन्होंने लोगों को बिहार में कपड़ा क्षेत्र में अपने व्यवसाय का विस्तार करने सुझाव दिया। एकॉस्ट इंडिया संस्थापक सह निदेशक उज्ज्वल कुमार ने बिहार में कॉटन उद्योग स्थापित करने के लिए अपनी रुचि दिखाते हुए कहा कि कपास उद्योग के पास अच्छा अवसर है जहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी मात्रा में रोजगार का सृजन किया जा सकता है। ट्रेंडी डाइस सीईओ सह-संस्थापक अरविंद कुमार ने कहा कि बिहार में बाजार हैं जहां कपास, जूट और रेशम उद्योग न्यूनतम प्रतिस्पर्धा और संसाधनों के साथ विकसित किए जा सकते हैं। टेक्सटाइल प्रोफेशनल और एक्सपर्ट्स देव कुमार की राय थी कि टेक्सटाइल उद्योगपति को अंडरग्राउंड प्रोडक्ट पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिनकी घरेलू बाजार के साथ-साथ बिहार में भी काफी मांग है। जबकि बिहार प्रवासी एसोसिएशन के परामर्श मंडल में शामिल रोमित रंजन ने कहा कि टेक्सटाइल में कई अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल क्षेत्र से सभी प्रवासी बिहारी को बिहार और बिहारी समुदाय की बेहतरी के लिए एक साथ जुड़ना, सहयोग करना और मिलकर काम करना चाहिए। इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए संजीव श्रीवास्तव ने बिहार में कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अपना विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वे 2013 से जमीन पर काम कर रहा हूं। इस लिहाज से उन्हें लगता है कि वस्त्र उद्योग के लिए संसाधन और कौशल उत्पन्न करना आसान है।

प्रजेश झा ने अपने सुझाव में कहा कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में कपड़ा काम को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने के लिए हमे मिलकर काम करना चाहिए। वहीं निशांत कुमार निराला ने कहा कि हम इसके लिए श्रमशक्ति आउटसोर्सिंग करने के लिए तैयार हैं। गौतम अज़ाद, संजीव कुमार,संदीप साहिल, अभिषेक कुमार, आशुतोष कुमार, सुष्मिता कुमारी,रवि प्रकाश,रंजय सिंह,संजीव, विकाश बिहारी, कुमार देवब्रत,और कई अन्य लोग का योगदान बहुत सराहनीय तथा सूचनात्मक थाI जहां कपड़ा उद्योगपति, डिजाइनर सह विशेषज्ञ, सलाहकार और सेवा प्रदाता और बहुत सारे लोगो ने भाग लिया।
उल्लेखनीय है कि बिहार प्रवासी एसोसिएशन द्वारा एक तरफ रास्ते में फंसे श्रमिकों की मदद की जा रही है वहीं दूसरी तरफ इस तरह की सा​र्थक परिचर्चा के जरिए भविष्य की संभावनाएं भी टटोली जा रही है। एसोसिएशन द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर पंचायत खबर आगे भी अपने पाठकों को रूबरू करायेगा ताकि संस्था की गतिविधियों की जानकारी आम लोगों तक पहुंच सके। (शेष अगली कड़ी में)

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