August 18, 2018

रिपोर्ट..मनरेगा में यूपी और बिहार का प्रदर्शन अच्छा नहीं

 

पंकज कुमार पाण्डेय

  • प्रति परिवार औसत दिन का रोजगार बेहद कम, इस साल सुधार के लिए केंद्र ने योजना बनाई
  • दिसंबर तक अधूरे काम पूरे करने के निर्देश

नई दिल्ली:  मनरेगा के तहत देश भर में रोजगार की स्थिति उत्साहजनक नहीं है। विभिन्न राज्यों में प्रति परिवार मिलने वाला औसत दिन का रोजगार काफी कम है।ग्रामीण विकास मंत्रलय की वर्ष 2016-17 के प्रदर्शन और वर्ष 2017-18 के लिए योजना रिपोर्ट (परफार्मेस और प्लान रिपोर्ट 2017-18) में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक अशांति के बावजूद जम्मू कश्मीर में यूपी व बिहार की तुलना में प्रति परिवार औसत दिन का रोजगार ज्यादा है। हालांकि पारिश्रमिक में देरी लगभग सभी राज्यों में बनी हुई है। राज्यों में बड़ी संख्या में अधूरे काम भी मनरेगा के उद्देश्य को पलीता लगा रहे हैं। राज्यों को कहा गया है कि वे तय समय अवधि में अधूरे काम को पूरा करें और पारिश्रमिक में होने वाली देरी कम की जाए। सिक्किम और त्रिपुरा जैसे राज्य रोजगार के मामले में काफी बेहतर है। राजस्थान का प्रदर्शन भी यूपी बिहार जैसे राज्यों से अच्छा है।

घाटी में अशांति के बावजूद रोजगार का दावा : जम्मू कश्मीर में बीते एक साल से जारी अशांति के बावजूद मनरेगा में प्रति परिवार को औसतन 48 दिन का रोजगार मिला। जबकि यूपी में 31 दिन,बिहार में 37 दिन,झारखंड में 40 दिन और गुजरात में 38 दिन ही साल में औसत रोजगार प्रति परिवार को दिया गया। तर्क है कि मनरेगा के तहत काम मांग पर आधारित होता है इसलिए काम मांगने पर ही दिया जाता है।

पैसा समय से नहीं मिला : रिपोर्ट में कहा गया है 2016-17 के दौरान उत्तरप्रदेश में 78 फीसदी पारिश्रमिक भुगतान के मामलों में देरी हुई है।

दिसंबर तक अधूरे काम पूरा करने के निर्देश: उत्तरप्रदेश में 14 फीसदी काम अधूरा है। यूपी को सितंबर तक नौ लाख से ज्यादा अधूरे काम पूरा करने का लक्ष्य दिया दिया गया है। बिहार में 30 फीसदी से ज्यादा काम अधूरा पाया गया। झारखंड में करीब 28 फीसदी काम तय अवधि में अधूरा था। केंद्र ने विभिन्न राज्यों को अलग समय सीमा देते हुए कहा है कि सितंबर से दिसंबर तक की अवधि में सभी अधूरे काम पूरे कर लिए जाएं। (हिन्दुस्तान से साभार)

About The Author

एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *