July 14, 2020

ढ़ीले-ढ़ाले लॉकडाउन में सीधा-सीधा ‘मन की बात’…खुद बरतें सावधानी, सिर्फ राम रखवार

मंगरूआ
नयी दिल्ली: कोरोना के रोजाना बढ़ते आंकड़े और महामारी के संक्रमण के खतरे के बीच देश को अनलॉक करने की घोषणा हो गई है। आज लॉक डाउन का आखिरी दिन है। ऐसे में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 65वीं बार ‘मन की बात’ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन में लोगों को ढील जरूर दे दी गई है लेकिन अभी भी सतर्कता की जरूरत है, कोरोना वायरस का खतरा कम नहीं हुआ है, दो गज की दूरी और मास्क जैसे नियमों का पालन करना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कोरोना संक्रमण के दौरान हुई परेशानियों और वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा किया।  प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वायरस, कोरोना योद्धाओं, बंगाल में सुपर साइक्लोन अम्फान, खेतों में टिड्डियों के हमले समेत तमाम मुद्दों पर विस्तार से बात किया। साथ ही देश को आश्वस्त करते भी नजर आये कि कोरोना को लेकर हमारे देश के लैब में हो रहे वैक्सीन पर काम को लेकर पूरी दुनिया की नजर है। कोरोना पर बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। इसके खिलाफ भारत मजबूती से लड़ाई लड़ रहा है।


प्रवासी मजदूरों की परेशानी
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में भी कोई वर्ग ऐसा नहीं है जो कठिनाई में न हो, परेशानी में न हो और इस संकट की सबसे बड़ी चोट अगर किसी पर पड़ी है तो वो हमारे गरीब, मजदूर, श्रमिक वर्ग पर पड़ी है। उनकी तकलीफ, उनका दर्द, उनकी पीड़ा शब्दों में नहीं कही जा सकती है। उन्होंने कहा कि ‘हमारे रेलवे के साथ दिन-रात लगे हुए हैं। केंद्र हो, राज्य हो, स्थानीय स्वराज की संस्थाएं हो- हर कोई दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। जिस प्रकार रेलवे के कर्मचारी आज जुटे हुए हैं, वे भी एक प्रकार से अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर्स ही हैं।’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘प्रवासी मजदूरों को देखते हुए नए कदम उठाना जरूरी हो गया है। हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कहीं माइग्रेशन कमीशन बनाने की बात हो रही है। केंद्र सरकार के फैसलों से रोजगार मिलने वाले हैं। ये फैसले आत्मनिर्भर भारत के लिए हैं।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है देश
आज हमारे श्रमिकों की पीड़ा में, देश के पूर्वीं हिस्से की पीड़ा को देख सकते हैं। उस पूर्वी हिस्से का विकास बहुत आवश्यक है। कहीं श्रमिकों की स्कील मैपिंग का काम हो रहा है, कहीं स्टार्टसअप इस काम में जुटे हैं। साथ ही केंद्र सरकार ने अभी जो फैसले लिए हैं उससे गांवों में रोजगार, स्वरोजगार और लघु उद्योग से जुड़ी विशाल संभावनाएं खुली हैं। बहुत से लोगों ने ये बताया है कि उन्होंने, जो जो समान उनके इलाके में मिलते हैं, उनकी पूरी लिस्ट बना ली है। ये लोग अब लोकल प्रोडक्ट्स को ही खरीद रहे हैं और वोकल फॉर लोकल को प्रमोट कर रहे हैं। देश के सभी इलाकों से महिला स्वयं सहायता समूह के परिश्रम की भी अनगिनत कहानियां इन दिनों हमारे सामने आ रही हैं। गांवों, कस्बों में, हमारी बहनें-बेटियां, हर दिन मास्क बना रही हैं। तमाम सामाजिक संस्थाएं भी इस काम में इनका सहयोग कर रही हैं.कितने ही उदाहरण रोजाना दिखाई और सुनाई देते हैं। लोग अपने प्रयासों के बारे में मुझे नमो ऐप के जरिए बता रहे हैं। कई बार मैं समय की कमी के चलते नाम नहीं ले पाता हूं। ऐसे सभी लोगों की मैं प्रशंसा करता हूं।

सोशल डिस्टेंशिग के​ लिए नये तरीके निकाले
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में इनोवेशन, गांवों से लेकर शहरों तक, छोटे व्यापारियों से लेकर स्टार्टअप तक, हमारी लैब्स, कोरोना से लड़ाई में, नए-नए तरीके इज़ाद कर रहे हैं, नए इनोवेशन कर रहे हैं। कई दुकानदारों ने दो गज की दूरी के लिए, दुकान में बड़े पाईपलाइन लगा लिए हैं, जिसमें, एक छोर से वो ऊपर से सामान डालते हैं, और दूसरी छोर से ग्राहक अपना सामान ले लेते हैं। उन्होंने कहा कि ‘किसी भी परिस्थिति को बदलने के लिए इच्छाशक्ति के साथ ही बहुत कुछ इनोवेशन पर भी निर्भर करता है। इसके साथ प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों का भी जिक्र किया जो कोरोना काल में नई तकनीक की मदद से बचाव कर रहे हैं। उन्होंने नासिक के राजेंद्र की बात बताई। सतना गांव के इस किसान ने गांव को कोरोना से बचाने के लिए ट्रैक्टर से जोड़कर सैनिटाइजर मशीन बना ली। मोदी ने उन दुकानदारों की भी तारीफ की जो दो गज की दूरी बनाने के लिए पाइप से सामान देने का आइडिया या ऐसा ही कुछ अलग कर रहे हैं।


इनके सेवाभाव की चर्चा
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने तीन सेवाभावियों का जिक्र किया और इन तीनों की तारीफ की।  मोदी ने सबसे पहले तमिलनाडु के मदुरै में सी मोहन की चर्चा की। वह मदुरै में छोटा सा सलून चलाते हैं। उनकी एक बेटी है। उसकी शादी के लिए मोहन ने 5 लाख रुपये जोड़े थे। लेकिन जब देश पर संकट आता दिखा तो उन्होंने वो पैसे जरूरतमंदों पर खर्च कर दिए।
इसके बाद मोदी ने अगरतला के गौतम दास की बात बताई। वह अपने बचाए पैसों से भूखे लोगों को रोज दाल-चावल खिलाकर उनका पेट भर रहे हैं। इसके बाद प्रधानमंत्री ने पठानकोट के दिव्यांग राजू का नाम लिया। वह अबतक 3 हजार से ज्यादा मास्क बनवाकर बांट चुके हैं। उन्होंने 100 परिवारों के लिए खाने का राशन जुटाया है। उन्होंने कहा कि देश के कई इलाकों से सेवा की कहानियां सामने आ रही हैं। हमारी मांएं-बहनें लाखों मास्क बना रही हैं। कई लोग मुझे नमो ऐप पर मुझे अपने प्रयासों के बारे में बता रहे हैं। वे समयाभाव के चलते कई लोगों का नाम नहीं ले पाता, पर उनका तहेदिल से अभिनंदन करता हूं।

साथ रहेंगे तो आसान होगा रास्ता
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरफ जहां पूर्वी भारत तूफान अम्फान से हुए नुकसान से जूझ रहा है, वहीं, कई हिस्सों में खेती पर टिड्डी दल का हमला हुआ है। हम साथ रहे तो काफी कुछ बचा लेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘जैव विविधता दिवस आने वाला है। लॉकडाउन में जीवन की रफ्तार धीमी हुई है, लेकिन कई पशु-पक्षी इस समय राहत की सांस ले रहे हैं। अब लुप्तप्राय समझे जा रहे पक्षियों की आवाजें आ रही हैं। हवा साफ हो गई है तो घरों से पर्वतों की चोटियां नजर आ रही हैं। हम सुनते हैं कि जल है तो कल है। बारिश की एक-एक बूंद को बचाना है। इसके लिए हमारे पास कई परंपरागत उपाय हैं। यही जल हमारी शक्ति बन जाएगा। इस वर्षा ऋतु में हम सबकी कोशिश होनी चाहिए कि पानी का संरक्षण करें। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर पेड़ लगाएं।
उन्होंने देशवासियों से कहा कि हम सबको ध्यान रखना होगा कि कितनी तपस्या के बाद देश पटरी पर लौटा है। आपको, आपके परिवार को कोरोना से उतना ही खतरा हो सकता है। दो गज की दूरी, मास्क, हाथ धोने का उसी तरह पालन करते रहें। विश्वास है कि आप, अपनों और देश के लिए ये सावधानियां जरूर रखेंगे।

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *