April 04, 2020

यमुना किनारे से कला केंद्र तक लिट्टी चोखा और संवाद का सफर

संतोष कुमार सिंह
लिट्टी चोखा ओर संवाद का सफर यमुना किनारे से चलकर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र तक पहुंच गया है। प्रत्येक वर्ष की भांती इस वर्ष भी गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली में 12 जनवरी 2020 को इस अनूठे कार्यक्रम का विशाल आयोजन किया जाएगा। ‘दिल से लोकल सोच से ग्लोबल’ टैग लाइन के साथ यह कार्यक्रम दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड सहित कई राज्यों में अपनी खास पहचान बना चुका है।
लेकिन हम इस मौके पर ठहर आपको फिर से लिये चलते हैं यमुना किनारे। जी हां, 11 साल की शर्मिली (गीता) अपने मां-बाप के साथ दिल्ली के यमुना नदी के किनारे रहती है। वो अभी पहली कक्षा में पढ़ाई करती है। उसके मां-बाप दिल्ली यमुना नदी किनारे इसलिए रहते हैं ताकी उसकी बेटी अंग्रेज़ी माध्यम से पढ़ाई कर सके। यह ईलाका है अक्षरधाम मंदिर का। मंदिर के ठीक पीछे करीब 1200 परिवार रहते हैं। दूर से देखने पर पता चलेगा कि ये क्षेत्र जंगल है, मगर अंदर जाने के बाद आपको एक अलग दुनिया दिखेगी। यहां आपको सब्ज़ी उगाते किसान मिल जाएंगे, दूध दुहने वाले ग्वाले भी मिल जाएंगे। फेरी लगाने वाले लोग भी मिल जाएंगे. आपको आने के बाद ऐसा लगेगा जैसे आप एक गांव में आए हुए हैं. गांव में शहर होना तो समझ में आता है, मगर शहर में गांव होना समझ नहीं आता है.

जी हां, इस अनजान गांव में करीब 300 से ज़्यादा बच्चे रहते हैं, जो शर्मिली के साथ पास के ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल में न लाइट की सुविधा है और ना ही अच्छी शिक्षा। टीचर बस अपनी जेब खर्च के लिए स्कूल चला रहा है. स्कूल फीस भी बहुत कम है। गांववाले सब्ज़ी उगाने के अलावा फूल की खेती करते हैं साथ ही साथ समोसे और नमकीन की रेहड़ी भी लगाते हैं।

लिट्टी चोखा ओर संवाद कार्यक्रम के मुख्य कर्ताधर्ता बिक्रम जो कि पेशे से पत्रकार हैं, कहते हैं कि मैं मयूर विहार में रहता था, यहां एक स्टोरी के सिलसिले में आया था। स्टोरी करने के दौरान मैं जंगल के काफी अंदर आ गया था। शुरुआत में तो मुझे डर लगा मगर आते-जाते लोगों को देखकर हैरानी बी हुई। अंदर एक शानदार बस्ती बसी हुई थी। लोग खेती कर रहे थे, दूध बेच रहे थे। उसी समय मेरी दोस्ती शर्मीली से हुई। पहले नर्सरी में पढ़ती थी अब दूसरी में पढ़ती है। मुझे शर्मीली और उसके दोस्तों से दोस्ती हो गई। मैंने उनको पढ़ाना शुरु किया। पढ़ाने के दौरान उनको कहानियां सुनाता था, एक्टिंग सिखाता था, फोटो खींचना सिखाता था। साथ ही साथ बच्चों को सपने देखना भी सिखाता था। बातचीत से पता चला कि ये बच्चे बहुत आगे बढ़ सकते हैं. अगर इन्हें अच्छे से पढ़ाया जाए तो ये दुनिया जीत सकते हैं। ऐसे में मैंने सोचा क्यों न एक ऐसा कार्यक्रम किया जाए जो बच्चों के विकास के लिए लाभदायक हो।

इसी पृष्ट भूमी में मेरे मन में ख्याल आया कि न्यू ईयर पार्टी के मौके पर सभी लोग पार्टी करते हैं। दोस्तों को कहा कि इस बार लिट्टी-चोखा का कार्यक्रम करते हैं, और बच्चों के साथ पार्टी करते हैं। सभी दोस्तों ने अपनी सहमती दे दी। अपने दोस्तों की मदद से लिट्टी-चोखा कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में डॉक्टर, इंजीनीयर, अधिकारी, मोटीवेट, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों को आमंत्रित किया. 25 दिसंबर 2016 को हमने पहला कार्यक्रम किया था। विश्वास करें इससे पहले मैंने कभी भी इतना बड़ा कार्यक्रम नहीं किया।
चुनौतियों से जूझता हुआ आगे बढ़ा है संवाद
इस कार्यक्रम में हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी दिक्कत लोकेशन की थी। जब लोगों से बातचीत शुरू किया तो लगा कि दिल्ली की 99.99 प्रतिशत जनता को इस लोकेशन के बारे में नहीं पता है। इस कार्यक्रम में मेरे कई दोस्तों ने साथ दिया। ना लकड़ी थी ना उपले थे और 400 से ज़्यादा भीड़ इकट्ठा हो गई थी। लगातार 8 घंटे फोन पर बातचीत करना, सबको रास्ते बताना, समझिए कि एक जंग लड़ रहा था। खुशी इस बात की थी कि बच्चों को अच्छा लग रहा था। वे इन्जॉय कर रहे थे। नए कपड़े पहने हुए थे। कई लड़कियां लिपस्टिक लगाई हुई थीं। सब देख कर अच्छा लग रहा था। अंदर से खुशी थी। कार्यक्रम के बाद बच्चों से और उनके पैरेंट्स से मिलना जुलना हुआ। हमने दूसरा कार्यक्रम किया और बच्चों की पढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें व्हाइट बोर्ड और किताबें पढ़ने को दीं।

इस वर्ष संवाद का आयोजन
कला संस्कृति और आपसी मेल जोल का वार्षिक कार्यक्रम ‘लिट्टी चोखा और संवाद’ अपने चार सफलतापूर्वक कार्यक्रमों के आयोजन के बाद अब पांचवे संस्करण के लिए तैयार है।
वर्ष 2016 से लगातार ‘संवाद’ अपनी विशेष पहल लिट्टी चोखा और संवाद का आयोजन कर रहा है। 13 जनवरी 2019 को आयोजित कार्यक्रम के चौथे संस्करण में 22 राज्यों के करीब 3000 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में 10 विदेशी मेहमानों ने भी अपनी भूमिका दर्ज कराई। लोकसंगीत, खान-पान और कला प्रदर्शन के इस खास कार्यक्रम का उद्देश्य गांव की माटी और संस्कृति से दूर शहरों में रह रहे लोगों को एक साथ लाना, एक ऐसा मंच देना है जिसमें वह गांव-कस्बे के देसीपने को खुल कर जी सकें।

ये बड़े चेहरे बढ़ाएंगे कार्यक्रम की शोभा
कार्यक्रम में राजनीति, मीडिया और कला क्षेत्र से जुड़े कई प्रसिद्ध चेहरे शिरकत कर रहे हैं। दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी, उत्तर पश्चिमी दिल्ली से सांसद और सूफी गायक हंसराज हंस, डीडी न्यूज के एंकर और वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव, न्यूज18 के समूह संपादक प्रबल प्रताप सिंह, मशहूर प्लास्टिक सर्जन डॉ योगी एरॉन, मशहूर भोजपुरी गायक प्रभाकर पाण्डेय जैसे कई बड़े चेहरे शामिल होंगे।
इस बार क्या होगा खास
लिट्टी चोखा और संवाद कार्यक्रम इस बार और बड़े आयाम के साथ आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम को टेक्नोलॉजी से जोड़ा गया है। इस बार कार्यक्रम में दो खास रोबोट भी होंगे, जो लोगों को चाय देंगे, उनसे उन्ही की भाषा में बात भी करेंगे। एक ओर जहां यूपी-बिहार के गांवो से आए बेहतरीन कलाकार कार्यक्रम में लोक संगीत की प्रस्तुति देंगे वहीं दूसरी ओर आज के जमाने के नए गानों के साथ बैंड कलाकार भी लोगों का मनोरंजन करते दिखेंगे।

लिट्टी-चोखा ही क्यों?

लिट्टी-चोखा एक ऐसा व्यंजन है, जिसे बिहार और पूर्वांचल के लोग चाव से खाते हैं. लेकिन इस व्यंजन को भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। घर-परिवार के लोग हों या फिर गांव-ज्वार के लोग, एक साथ मिलकर उपले की आंच पर बनाते हैं। इस व्यंजन में सामाजिक भावना देखने को मिलती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से हमने कई ज़िंदगियों के चेहरे पर खुशियां लाने का काम किया है। सोचिए, दिल्ली जैसी जगह में हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमें खाने का समय नहीं मिलता है, हम फेसबुक और सोशल मीडिया पर दोस्त तो हैं, मगर मिलने में सालों लग जाते हैं। लिट्टी-चोखा में अपनत्व की भावना देखने को मिलती है। ऐसे में ये व्यंजन आपसी जुड़ाव के लिए महत्वपूर्ण है।

इस कार्यक्रम का मक़सद सिर्फ इतना है कि आपकी ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन दिन आपको जीने के लिए मिले। इस कार्यक्रम में बच्चों की खुशियों के अलावा परदेश में रहने वाले दोस्तों के चेहरे पर भी खुशियां लाना है। खान-पान के अलावा गप्पे होती हैं। सभी दोस्त इकट्ठे होकर ठहाके लगाते हैं तो ऐसा लगता है कि ज़िंदगी गुलज़ार हो गई है।

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