August 15, 2020

कोक नहीं काढ़ा की बढ़ी मांग, कोरोना में चाय की चुस्की भूल गर्म पानी का हो रहा है सेवन

अभिषेक राज

  • कलौंजी पीस और आंवला रस पीकर भी कोरोना को ठेंगा न दिखा पाये बच्चन
  • ठंढ़ा मतलब कोकोकाला और गरम-गरम चाय की चुस्की भूल लोग काढ़े का स्वाद ले आम लोग बढ़ा रहे हैं इम्युनिटी

नई दिल्ली: महानायक अमिताभ बच्चन का वह कोरोना गीत जिसमें वो कहते हैं
“बहुत इलाज बताते हैं जन-जनमानस सब,
किसकी सुनें, किसकी नहीं कौन बताए अब।
कोई कहता है कलौंजी पीसो कोई कहता है आंवला रस,
कोई कहता है घर में बैठो हिलो न टस से मस।
ईर कहते हैं और बीर कहते हैं ऐसा कुछ भी करो न,
बिना साबुन हाथ न धोएं और किसी को छुएं न।
हमने कहा कि चलो हम ही कर देते हैं जैसा बोल रहे हैं सब,
आने दो कोरोना-वोरोना ठेंगा दिखाओ तब। “

हालांकि महानायक के लिए न कलौंजी पीसना काम आया, और न ही आंवला रस। यहां तक की घर में रहते भी महानायक कोरोना—वोरोना को ठेंगा नहीं दिखा पाये और बेटे समेत वायरस संक्रमित होकर मुंबई के नानावटी अस्पताल में कोरोना का ईलाज करा रहे हैं। हालांकि कोरोना महामारी के समय में अगर किसी चीज पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है तो वो ये है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे मजबूत बनाया जाए, उसे कैसे बढ़ाया जाए। यहां तक कि आयुष मंत्रालय भी लगातार इसे बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े का सेवन करने की सलाह दे रहा है, जिससे कोरोना वायरस से ठीक होने में मदद मिल सके या फिर उसके संक्रमण से बचा जा सके। एक ऐसे ही काढ़े की रेसिपी आजकल खूब वायरल हो रही है, जिसे इम्युनिटी बूस्टर कहा जा रहा है।

इस कोरोना काल में दिल्ली हो दौलता बाद, उत्तर प्रदेश हो या मध्यप्रदेश, बिहार हो या गुजरात इस कोरोना काल में ठंढ़ा मतलब कोकोकाला और गरम—गरम चाय की चुस्की भूल लोग काढ़े का स्वाद ले इम्युनिटी बढ़ा रहे हैं और कोरोना के संक्रमण से बचाव की लड़ाई लड़ रहे हैं। यही कारण है एक तरफ गर्मी के बावजूद ठंढ़े पेय और चाय की मांग कम हुई और काढ़ा का मांग बढ़ा है तो स्वाभाविक है इससे जुड़े उद्योगों में भी उभार दिखाई दे रहा है। लोग एक ओर जहां घरेलू स्तर पर काढ़ा तैयार कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर काढ़ा बनाने वाले कंपनियों में भी मांग बढ़ी है।

हर प्रदेश में बढ़ी काढ़ा की मांग
एक तरफ जहां दिल्ली नगर निगम द्वारा कोरोना से बचाव के लिए आयुष मंत्रालय के सुझाव के अनुरूप सफाई कर्मचारियों के लिए स्पेशल काढ़ा तैयार कर यह दावा किया है कोरोना के खिलाफ जंग में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है और इस काढ़े को पीने के बाद तकरीबन 3 दिनों तक सफाई कर्मचारियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता जबरदस्त बनी रहेगी। इस काढ़े को बनाने में काली मिर्च, लौंग और गिलोय का इस्तेमाल किया गया है। निगम से जुड़े जयप्रकाश का कहना है कि इसे बनाने के लिए गिलोय, काली मिर्च, दालचीनी, सोंठ, तुलसी को पानी में डालकर 2 घंटे तक उबालते हैं। उसके बाद इसमें गुड़ डालकर अच्छी तरह पकाते हैं। यह शरीर को ताकत देता है।

सारंडा में दिखा नवाचार
झारखंड के चाईबासा में जहां एशिया के प्रसिद्ध सारंडा जंगल में पाए जाने वाले औषधीय पौधों से वन एवं पर्यावरण विभाग ने आयुर्वेदाचार्यो की मदद से एक काढ़ा तैयार किया है। इस हर्बल पेय को ‘इम्युनिटी बूस्टर’ (प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला) बताया जा रहा है। इस पेय पदार्थ के निर्माण में मुख्य रूप से गिलोय, अर्जुन वृक्ष की छाल, अमरूद की पत्तियां, अदरक, काली मिर्च, गुड़ इत्यादि का प्रयोग किया गया है। इस काढ़े का नाम ‘सारंडा इम्युनिटी बूस्टर’ दिया गया है। यहां भी आयुष मंत्रालय के द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के तहत सारंडा वन क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय गुण से परिपूर्ण जड़ी बूटियों की मदद से प्रशिक्षण केंद्र के आयुर्वेदाचार्य मधुसूदन मिश्रा के नेतृत्व में इसको तैयार किया गया है।
हो रहा है वनोपज का इस्तेमाल
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में स्थित साल के जंगलों के लिए प्रसिद्ध सारंडा जंगल में औषधीय पोधे बहुतायत में पाए जाते हैं। इनमें सफेद मूसली, काली मूसली, मुलेठी, सतावर, गुडमार, चेरेता, कालीहारी, पत्थरचूर, तुलसी, अर्जुन, र्हे आदि प्रमुख हैं।
सबसे पहले अर्जुन की छाल को पीसकर चटनी जैसा बनाने के बाद 500 ग्राम गिलोय, 250 ग्राम अमरुद की पत्ती, 350 ग्राम हल्दी, 250 ग्राम अदरक, 300 ग्राम तुलसी, 100 ग्राम दालचीनी, 100 ग्राम इलायची का बीज, 150 ग्राम काली मीर्च, 100 ग्राम लौंग को पीसकर 15 लीटर पानी में मिला दें। उसके बाद गुड़ तीन किलोग्राम घोलकर एक साथ मिला दें। उसके बाद किसी बर्तन में रखकर गर्म करें। एक घंटा में यह इम्युन बूस्टर बनकर तैयार हो जाएगा।


मध्यप्रदेश में सरकार ने बांटा काढ़ा
कोरोना महामारी में लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए खुद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जीवन अमृत योजना का शुभारंभ किया और कहा कि हमारे ऋषियों एवं वैद्यों ने आयुर्वेद में ऐसी औषधियां बनाई हैं, जिनसे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हम स्वस्थ्य रहते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष विभाग द्वारा तैयार किया गया विशेष ‘त्रिकटु चूर्ण’ काढ़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अत्यधिक कारगर है। इसे प्रतिदिन तीन से चार बार पिएं। मध्यप्रदेश लघु वनोपज संघ द्वारा इस काढ़े के 50-50 ग्राम के पैकेट तैयार किए गए हैं। ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में लगभग एक करोड़ व्यक्तियों को यह काढ़ा मुफ्त में वितरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीपल, सोंठ एवं काली-मिर्च को समान मात्रा में मिलाकर तथा कूटकर तैयार किए गए त्रिकटु चूर्ण को 3-4 तुलसी के पत्तों के साथ एक लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाए, तब लगभग एक-एक कप कुनकुना काढ़ा दिन में तीन से चार बार पिएं।

ट्रेन में चाय नहीं काढ़ा मांग रहे हैं पैसेंजर
जिंदगी है तो यात्रा तो करनी ही होगी। ट्रेन खुल गया है तो लोग अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं लेकिन माहौल कुछ बदला—बदला सा है। आम दिनों में जैसे ही ट्रेन खुलती थी पैसेंजर की चाय की तलब देखते हुए चाय बेचने वाले चाय—चाय आवाज लगाते थे। लेकिन कोरोना ने लोगों की आदतों को बदल दिया या फिर संक्रमण से बचाव के लिए यात्री चाय की नहीं काढ़ा और गर्म पानी की मांग कर रहे हैं। यहीं कारण है कि ट्रेनों के पैंट्री कारों में अब डिप चाय की बजाय तैयार काढ़ा यात्रियों को दिया जा रहा है। यहां तक की दूध की चाय के शौकीन लोग भी काढ़ा उपलब्ध नहीं होने पर अदरक-तुलसी की बिना दूध-शक्कर वाली चाय पी रहे हैं।
लंबी दूरी की ट्रेनों में बदला माहौल
मुजफ्फरपुर से नई दिल्ली जाने वाली सप्तक्रांति एक्सप्रेस की पैंट्रीकार के मैनेजर असगर अली बताते हैं कि एक जून से ट्रेनें चल रही हैं। सप्तक्रांति में रोज पांच सौ कप से ज्यादा काढ़ा की मांग है जबकि दूधवाली चाय 100 कप भी नहीं बिक रही है। यही हाल वैशाली, गोरखधाम, कुशीनगर और एलटीटी एक्सप्रेस में भी है। मजबूरी में ट्रेनों में सफर के दौरान भी लोग पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। यही वजह है कि ज्यादातर ट्रेनों में दूध की चाय की मांग न के बराबर रह गई है। यात्री काढ़ा, तुलसी, अदरक व काली मिर्च वाली चाय की डिमांड कर रहे हैं। असगर बताते हैं कि मुजफ्फरपुर से दिल्ली तक रोजाना 500 से 550 कप काढ़ा की मांग है। वह बताते हैं कि पैंट्रीकार में कुकिंग की अनुमति नहीं है। ऐसे में यात्रियों के काढ़ा मांगने पर अदरक, तुलसी और कालीमिर्च के मसाले को गर्म पानी में अच्छे से मिलाकर सर्व किया जा रहा है। यात्री इसे खूब पसंद कर रहे हैं। यही आलम अन्य ट्रेनों का भी है। वैशाली एक्सप्रेस के पैंट्रीकार मैनेजर आरके तिवारी बताते हैं कि आठ-दस दिन से यात्री गर्म पानी और काढ़ा की डिमांड ज्यादा करने लगे हैं। ऐसे में अदरक, तुलसी की चाय में कालीमिर्च पाउडर डालकर सर्व किया जा रहा है। यात्रियों को यह मसाला चाय बेहद पसंद आ रही है। वैशाली में रोजाना 350 से 400 कप काढ़ा की डिमांड है जबकि दूध वाली चाय की डिमांड बमुश्किल 30 से 35 कप ही रह गई है।
बढ़ रहा है औषधी कारोबार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा को अवसर के रूप में देखने और आत्मनिर्भर होने की बात कही थी। इस लिहाज से देखें तो कोरोना औषधी कारोबारियों के लिए अवसर बन के आया है। उत्तर प्रदेश हा हाथरस हो या पंजाब का रूपनगर कोरोना संकट में कई व्यापार तो ठप होने के कगार पर आ गए हैं तो काढ़ा तैयार करने का कारोबार कई गुणा फलफूल रहे हैं। यदि हाथरस की बात करें तो एक दर्जन से ज्यादा फैक्ट्रियों में 90 फीसदी उत्पादन काढ़े का हो रहा है और लगभग एक हजार क्विवंटल काढ़ा कई प्रदेशों में सप्लाई किया जा रहा है। आर्युवेद के परंपरागत व्यापारी वैद्य कृष्णलाल शर्मा कहते हैं कि उन्होंने 70 साल पहले उमा आर्युवेद नाम से फैक्ट्री खोली। इस फैक्र्टी में आर्युवेद की अन्य औषधियों के साथ काढ़ा भी तैयार किया जाता था। लेकिन अपेक्षित मांग न होने के कारण व्यापार फल फूल नहीं रहा था। लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान काढ़े के मांग में तेजी आई है और इस ईलाके दर्जनो फैक्ट्रियों में काढ़ा तैयार किया जा रहा है। यही नहीं काढ़े के साथ ही आर्युवेद के अन्य उत्पादों में भी ईजाफा हुआ है हालांकि 90 फीसदी व्यापार काढ़े का है। इस ईलाके से दूसरे राज्यों मसलन मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तिसगढ़ और झारखंड में आर्युवेदिक दवायें भेजी जा रही हैं।


कोक नहीं काढ़ा दीजिए जनाब
गर्मी के दिनों में जहां कोक कंपनियां करोड़ों का कारोबार करती थीं, वहीं कोरोना काल में काढ़े की मांग है। साथ ही साथ रुहअफजा और जलजीरा और ठंडाई की बिक्री भी बढ़ी है। जिला रूपनगर में 12 करोड़ की बिक्री करने वाली कोल्ड ड्रिंक्स कंपनियों को इस सीजन में तगड़ा घाटा पड़ा है। गली गली बिकने वाली कोल्ड ड्रिंक्स की मांग कोरोना की वजह से 30 फीसद ही रह गई है। दूसरी तरफ, आयुर्वेदिक नुक्सों का इस्तेमाल इस कदर बढ़ा है कि लोग इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले प्राकृतिक खाद्य पदार्थों की तरफ लौटने लगे हैं। जी हां, काढ़ा और शरबत और जलजीरा की बिक्री डबल हो गई है। इसका सीधा मतलब है कि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हो रहे हैं।

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