पूर्वांचल के उद्यमियों की आस..नई नीति में मिले लघु उद्योग को राहत, विशेष पैकेज

पंचायत खबर टोली

 मऊ : जब भी सरकार द्वारा कोई नई नीति लाई जाती है या कोई नई व्यवस्था बनाई जाती है तो जनता के मन में एक उधेड़बुन होता है। थोड़ा संशय होता है। लोग इसे संदेह की नजर से देखते हैं। इसी कड़ी में सरकार द्वारा अक्टूबर में नई औद्योगिक नीति लाये जाने की बात कही गयी है। ऐसी स्थिति में इसे जारी किए जाने को लेकर लाभार्थियों में उत्सुकता तो है साथ ही व्यापारी वर्ग में उत्साह के साथ अभी संशय भी बना हुआ है। उन्हें उम्मीद है कि इसके लागू हो जाने पर पूर्वांचल के दिन बहुरेंगे। उन्हें लगता है कि पूर्वांचल में लघु उद्योगों की खस्ता होते हालत के बीच इस नई नीति में अपने लिए राहत मिल सकती है। साथ ही साथ इस नई नीति से न सिर्फ बड़े उद्योग अपितु लघु व कुटीर उद्योगों से जुड़े उद्यमियों को लगता है कि इसके संरक्षण के लिए अलग प्रावधान किये जाएंगे। उन्हें लगता है कि यदि ऐसा होता है उद्योग के दिन बहुरेंगे।

पांच माह पूर्व सरकार द्वारा जारी की गई औद्योगिक नीति के बाद अक्टूबर माह में इसे पूर्ण रूप देने तक वह उद्योग की सतही समस्या और उसके निदान के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर बल देते नजर आ रहे हैं। इस दौरान जीएसटी अनिवार्यता के बीच इसकी नेटवर्किंग की समस्या के साथ बिजली व सुरक्षा को लेकर भी नई नीति से अपेक्षा लगाए हुए हैं। इतना ही नहीं उन्हें लगता है कि देश के प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री पूर्वांचल से जुड़े हैं, ऐसे में उनका दबाव और उम्मीद इस बात को लेकर भी है कि पूर्वांचल को  विशेष जोन घोषित करने के साथ आर्थिक पैकेज मिलने की राह सुगम होगी।

क्या कहते हैं उद्यमी

औद्योगिक क्षेत्र ताजोपुर के अध्यक्ष, उद्यमी संजय सिंह बताते हैं कि नई उद्योग नीति अभी स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में इस दिशा में बस कयास ही लगाए जा सकते हैं। नई नीति स्पष्ट न होने की दशा में सबसे बड़ी समस्या पंजीकरण की है। इस दौरान प्लाटों का पंजीकरण प्रभावित हुआ है। यूपीएसआईडी कानपुर द्वारा नए प्लाट के रजिस्ट्रेशन के लिए जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर रजिस्ट्री आफिस में पुरानी नीति के तहत रजिस्ट्रेशन किया नहीं जा रहा है। सरकार द्वारा बड़े उद्यमियों को जिस तरह से छूट प्रदान किया जा रहा है, उसी प्रकार छोटे उद्यमियों को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। पूर्वांचल के औद्योगिक क्षेत्रों में प्लाट की स्थिति को देखते हुए बड़े उद्योग की संभावना बहुत है। ऐसे में लघु उद्योगों को बड़े उद्योगों की तरह छूट मिलने के बाद भी इस क्षेत्र का विकास संभव हो पाएगा। नई नीति आने तक यह संशय बरकरार रहेगा। छोटे प्लाटों में बड़ा उद्योग स्थापित नहीं हो सकता है और छोटे उद्यमी बड़े जैसी सुविधाओं प्राप्त न होने की दशा में विकास नहीं कर सकते।

पूर्वांचल को ​मिले विशेष जोन का दर्जा

नई औद्योगिक नीति में सरकार द्वारा पूर्वांचल को विशेष जोन घोषित करने के साथ ही विशेष आर्थिक पैकेज प्रदान किया जाना आवश्यक है। ऐसे न होने की दशा में दम तोड़ते उद्योगों को जीवित नहीं किया जा सकता है। फिलहाल अभी तो सरकार द्वारा नई औद्योगिक का इंतजार व्यापारियों को है।

 पीएफ व इएसआई से मिले छूट

उद्यमी सुशील अग्रवाल बताते हैं कि नई नीति के आने में अभी विलंब है। अभी तो व्यापारी जीएसटी से ही परेशान है। नेटवर्किंग समस्या होने की स्थिति में इस नए नियम से व्यापारियों की परेशानी बढ़ी हुई है। ऐसे नई औद्योगिक नीति में उद्यमियों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा। लघु उद्योग के लिए बिना गारंटी ऋण प्रदान किए जाने के निर्देश होने के बाद बैंकों द्वारा इस दिशा में व्यापक लापरवाही बरती जाने भी दुश्वारियां बनी हुई हैं। पूर्वांचल में लघु उद्योग की बाहुलता होने के कारण 15-20 मजदूरों वाले उद्योग को पीएफ और इएसआई जैसे नियमों को समाप्त करना चाहिए। यहां के उद्योगपति प्रोडेक्शन और सेल मार्केट खुद ही बनाता है लेकिन तकनीकी रूप से मजबूत न होने की दशा में मऊ का साड़ी उद्योग बेहतर होने बाद भी पिछड़ा हुआ है। नई नीति में व्यापारियों को सुरक्षा और बिजली आदि की सुविधाओं के साथ उद्योग लगाने की अड़चनों को ध्यान में रखना होगा। लघु व कुटीर उद्योगों को विशेष सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।

 

 

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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