November 15, 2018

ओ गंगा बहती हो क्यों ?

ध्रुव गुप्त का फेस बुक पोस्ट.. साभार
उत्तराखंड में गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए हरिद्वार का आध्यात्मिक केंद्र ‘मातृ सदन’ हमेशा से ही प्रतिबद्ध और आंदोलनरत रहा है। गंगा में अवैध खनन के विरुद्ध मातृ सदन समय-समय पर अपने सन्यासियों की तपस्या और अनशन के माध्यम से लोगों को जागरूक करता रहा है। आश्रम के एक सन्यासी निगमानंद गंगा के लिए अपने प्राणों की आहुति भी दे चुके हैं। उत्तराखंड में पहले कांग्रेस की सरकार और अब भाजपा की सरकार राजस्व के नाम पर जिस तरह ठेकेदारों को गंगा में खनन की अनुमति देती रही है, उससे गंगा के अस्तित्व पर ही संकट उपस्थित हुआ है। एक बार फिर प्रदेश सरकार और ठेकेदारों की मिलीभगत से गंगा और उसकी सहायक नदियों के दोहन के विरुद्ध ‘मातृ सदन’ के परमाध्यक्ष गुरुदेव स्वामी शिवानंद न सिर्फ अनशन पर बैठ गए हैं, बल्कि उन्होंने जल का भी परित्याग कर दिया है। उनके शिष्य आत्मबोधानंद का अनशन पहले से जारी है।

स्वामी शिवानंद ने कुछ ऐसे सवाल उठाए हैं जिनका जवाब खोजे बगैर गंगा को बचाना नामुमकिन होगा।

1 क्या गंगा के पाताल जाने का समय आ गया है ?
2 क्या उत्तराखण्ड का गठन केवल गंगा को दफन करने के लिये हुआ है ?
3 क्या गंगा का विनाश ही रोजगार का एकमात्र साधन है ? क्या अपना पेट भरने के लिये मां को नीलाम करना जायज है ?
4 क्या भारत सरकार उत्तराखण्ड में गंगा की दशा से अनभिज्ञ है या गंगा की बर्बादी में वह भी सहभागी है ?
5 क्या धर्माधिकारियों का दायित्व केवल गंगा के नाम पर लोगों को उल्लू बनाकर अपनी कोठियां सजाना भर है?
7 क्या गंगा की धारा की अविरलता और स्वच्छता के लिये राक्षसों का विरोध करना पाप है ?
8 क्या संकृति की रक्षा के नाम पर सरकार चलानेवालों को संस्कृति की इज्जत लूटने का अधिकार मिल जाता है ?
9 क्या हम अपने बच्चों को यह पढाने के लिये तैयार हो चुके हैं कि कभी गंगा नाम की एक नदी हुआ करती थी ?

भाजपा सरकार का फासीवादी चेहरा !

उत्तराखंड में गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए बरसो से आन्दोलनरत हरिद्वार के आध्यात्मिक केंद्र ‘मातृ सदन’ के परमाध्यक्ष गुरुदेव स्वामी शिवानंद अपने शिष्यों के साथ प्रदेश सरकार तथा ठेकेदारों की मिलीभगत से गंगा और उसकी सहायक नदियों के खनन और दोहन के विरुद्ध पिछले कई दिनों से अन्न, जल और वाणी का त्याग कर अनशन पर बैठे थे। उनसे वार्ता कर समस्या के समाधान के रास्ते खोजने के बजाय हरिद्वार के प्रशासन ने पिछली रात भारी पुलिस बल के साथ आश्रम पर हमला कर जो हंगामा खड़ा किया, वह बेहद शर्मनाक था। उन्होंने न सिर्फ आश्रम में तोड़फोड़ की, सन्यासियों को डराया और धमकाया, बल्कि बिजली के कटर से गुरुदेव के छोटे-से तपस्या कक्ष की ग्रिल तोड़ने के प्रयास में कमरे को धुएं से भर दिया जिसकी वज़ह से उनका दम घुटने लगा। प्रशासन उन्हें अबतक गिरफ्तार तो नहीं कर सका है, लेकिन भारी पुलिस बल ने आश्रम को घेरा हुआ है। उत्तराखंड सरकार के इस अमानवीय कृत्य की हर तरफ निंदा हो रही है। हैरानी यह है कि गंगा की कमाई खाने वाले बाबा रामदेव सहित हरिद्वार के सभी सरकारी संत, पीठ और आश्रम सरकार की इस ज्यादती पर चुप्पी साधे हुए हैं ! पिछली कांग्रेस की सरकार ने भी गंगा के लिए अपना आंदोलन वापस लेने के लिए ‘मातृ सदन’ पर कई तरह से दबाव बनाया था और धमकियां भी दी थी, लेकिन इतनी वीभत्सता तो वह भी नहीं कर पाई थी। भारतीय संस्कृति के झूठे झंडाबरदारों और ‘नमामि गंगे’ के नाम पर जनता को ठगने वाली भाजपा सरकार के फासीवादी चरित्र पर क्या अब भी किसी को कोई शंका रह गई है ?

फोटो – Lisasabina Harney

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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