August 15, 2020

गांव, गरीब और गाछ बचाने के लिए एकजुट हुए गांधीजन

प्रसून लतांत

सलाहकार संपादक, पंचायत खबर

नयी दिल्ली: कोरोना महामारी के इस दौर में एक ओर जहां देश कठिन परिस्थिती से गुजर रहा है, न जान बचाने की जुगत है और न खाने—पीने की सुविधा। कब कौन संक्रमण का शिकार हो जाये, पता नहीं। यह वही वर्ष है जब देश गांधी की 150 वीं जयंती वर्ष भी मना रहा है। ऐसे में देश भर के गांधीजन ने गांधियन कलेक्टिव इंडिया की उपवास श्रृंखला का आयोजन किया है। इस तरह की व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत 5 जून पर्यावरण दिवस की बिहार के चंपारण से शुरू हुई। सत्याग्रहियों द्वारा राष्ट्रीय उपवास श्रृंखला 2 अक्टूबर विश्व अहिंसा दिवस और महात्मा गांधी जयंती तक चलेगी। गांधी जयंती तक चलने वाले इस सत्याग्रह में कुल 119 सत्याग्रही शामिल होंगे। इन सत्याग्रहियों में गांधी के विचारों में विश्वास रखने वाले और उसके अनुरूप काम करने वाले लोग शामिल हैं जो महामारी के इस भयावहता के बीच पूरी तरह से सक्रिय हो गए हैं। उनकी सक्रियता से अब गांधी, गांव, गरीब और गाछ को लेकर कुछ खास कर गुजरने की सूरत भी निकलती दिखाई पड़ रही है। गांधियन कलेक्टिव इंडिया की उपवास श्रृंखला में पहले तो इसमें गांधी संस्थाओं और संगठनों से मुक्त लोग शामिल हुए लेकिन जब से इस का नियमित और अविराम सिलसिला चल पड़ा है तो गांधी संस्थाओं और संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल होने लगे हैं।


देखी जा रही है युवाओं की भागीदारी

पहली बार देखा जा रहा है उपवास के लिए अच्छी खासी संख्या में युवा वर्ग भी शामिल हो रहा है। नहीं तो गांधी जी की डेढ़ सौवीं जयंती वर्ष शुरू होने के पहले महात्मा गांधी की याद में बड़े बड़े आयोजन करने के लिए सरकारी घोषणाएं हो रही थीं और केंद्र और राज्य स्तर पर समितियों का गठन किया जा रहा था। साथ ही सरकारों से अलग थलग होकर गांधी से जुड़ी संस्थाएं और संगठन भी अपने सामर्थ्य भर कुछ करने के लिए एकांगी पहल कर रहे थे।
शताब्दी आयोजनों की शुरुआत भी हो गई थी लेकिन लोकसभा चुनाव आने और उसके बाद दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़कने के बाद देश भर में एक प्रकार की दुखद चुप्पी सी छा गई थी।

गांधी जैसी बात करने वाले को भी देशद्रोही करार दिया जा रहा था। ऐसा लगने लगा था कि गांधी के देश में ही गांधी की बात करना गुनाह है। गांवों की और गरीबों की जरूरी बातें भी स्मार्ट शहरों के शोर में गुम हो गई थीं। संसद की चर्चा से भी गायब।
मीडिया सहित फिल्म और धारावाहिकों में भी नहीं। यह तो कोरोना के प्रकोप पर रोक लगाने के लिए लागू लॉक डाउन के दौरान देश के आम लोग जब सड़कों पर अपने गांवों की ओर निकल पड़े तो शहरों के बढ़ते वैभव का खोखला पन उभर कर सामने आ गया और गांव की चर्चा तेज हो गई। करोड़ों की संख्या में निकले आम लोगों ने पैरों से हजारों किलोमीटर चल के गांव पहुंचने की हिम्मत दिखा कर फिलहाल इस समय देश की दिशा बदल दी है।


केवल चर्चा तक सीमित है गांव और गरीब

गांव और गरीब इन दिनों चर्चा के केंद्र में हैं। ऐसे में पिछले एक महीने से गांधियन कलेक्टिव इंडिया समूह से जुड़ कर लोगों का शुरू हुआ व्यक्तिगत सत्याग्रह का सिलसिला भी निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। नई सदी का व्यक्तिगत सत्याग्रह। पिछली सदी में जब ब्रिटिश हुकूमत भारत को दूसरे विश्व युद्ध में झोंकने की कोशिश कर रही थी। तब उसके विरोध के लिए महात्मा गांधी ने आचार्य विनोबा से व्यक्तिगत सत्याग्रह के लिए कहा था।
विनोबा के बाद दूसरे व्यक्तिगत सत्याग्रह करने वाले नेहरू थे। व्यक्तिगत सत्याग्रह के कारण गांधीयन कलेक्टिव इंडिया समूह गांधी,गांव और गरीबों के कल्याण के मुद्दों पर लोकशाही की आवाज को बुलंद करने का मंच बन गया है। रोज नए नए लोग जुड़ रहे हैं। एक महीने पहले से हरेक दिन एक सत्याग्रही अलग अलग राज्यों से बैठ रहे हैं।


क्या है उद्देश्य

पहले सत्याग्रही मोतिहारी के दिग्विजय कुमार हैं। उन्होंने उपवास कर सत्याग्रही की शुरुआत कर दी है। दिग्विजय गांधीयन कलेक्टिव इंडिया समूह की राष्ट्रीय समिति के संयोजक हैं। उपवास का मकसद श्रमिकों, किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार , समाज और स्वयं को झकझोरना है बदलना है। ताकि कोरोना से बच सकें और मजबूत हिंदुस्तान बन सकें। अब तक इस उपवास श्रृंखला में मणिपुर, गोआ, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र,राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा,बिहार, छत्तीसगढ़,असम आदि राज्यों में एकल और सामूहिक रूप से तीस से अधिक सत्याग्रही उपवास पर बैठ चुके हैं।

गांधीयन कलेक्टिव इंडिया का कहना है कि यह पहल देश की मौजूदा राजनीति में अंतिम जन को केंद्र में लाना है और गांधी जी की डेढ़ सौवीं जयंती वर्ष पर गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हुए देश और दुनिया में फैले गांधी प्रेमियों को एक मंच पर लाकर एक बड़ी पहल करने की तैयारी को अंजाम भी देना है।

गांधीयन कलेक्टिव इंडिया की मांगें इस प्रकार हैं
1. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश जो प्रवासी मजदूरो को निःशुल्क यातायात,भोजन एवं आवास से सम्बंधित है उसके प्रभावी धन से लागू करे के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का निर्माण किया जाए।
2. करोना संकट के समाप्ति तक गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को कम से कम 5 हजार रूपये दिए जाएं।
3. बंदी के कारण जिन परिवारों की जान माल का नुकसान हुआ है उसे क्षति पूर्ति दी जाए।
4. विभिन राज्यों में श्रमिकों के अधिकार को सीमित करने वाले आदेश को वापस लिया जाए।
5. आम जन को रोजगार देने के लिए छोटे एवं श्रम आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करते हुए बडी कम्पनियों इन क्षेत्रों में आने से रोका जाए। इससे ग्रामीण एवं कुटीर उद्योगों का संरंक्षण एवं सच्चे अर्थो में स्वदेशी भावना की ओर कदम बढ़ाए।
6. स्थानीय स्तर पर अध्ययन करा कर भोजन और स्वास्थ देख रेख के क्षेत्र में स्वराज सुनिश्चित किया जाय Iसाथ ही ऐसी कार्य योजना और नीति लाई जाए जो इस भावना को आगे बढ़ाए।
7. सार्वजानिक उपक्रम का निजीकरन बंद किया जाए।
8.करोना त्रासदी को देखते हुए 100 करोड से अधिक सम्पति वाले व्यक्ति और व्यापारिक घराने से विशेष कर लिया जाए।

गांधियन कलेक्टिव इंडिया समूह की ओर से गांधी जयंती तक चलने वाले इस सत्याग्रह में कुल 119 सत्याग्रही शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि इस राष्ट्रव्यापी उपवास श्रृंखला में शिक्षक, समाज कर्मी, कलाकार, लेखक, पत्रकार, वैज्ञानिक, पर्यावरणवादी और छात्र व युवा पूरे उत्साह से भाग ले रहे हैं। इनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी हैं। गांधी जयंती के दिन कुछ खास करने कि परिकल्पना कि जा रही है। इस बीच वेबीनार के जरिए कोरो ना सहित गांधी, गांव और गरीब के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के बारे में संवाद प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी चल रही है। उपवास के दौरान हाथ से लिखे बैनर का इस्तेमाल किया जा रहा है और पेड़ पौधे भी लगाए जा रहे हैं।

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *