नोट बंदी से फलों की ब्रिकी कम लेकिन नहीं घटे दाम

पंचायत खबर टोली

मऊ : नोटबंदी का तीसरा सप्ताह चल रहा है। सब्जी बाजार ने भले ही किसानों का दम निकाल दिया हो लेकिन फल बाजार सीना ताने हुए है। सब्जी के दाम में आशातीत गिरावट के बाद आमजन में फल के सस्ता होने की उम्मीद भी बरकरार है। हालांकि अभी तक दाम में कोई गिरावट नहीं हुई। न सिर्फ बाहर से आयात होने वाले फल अपितु घरेलू स्तर पर अच्छा उत्पादन होने के बाद भी यह स्थिर बना हुआ है। सेव, अंगूर, अनार, संतरा आदि के दाम बाजार में नोट नहीं होने के बाद भी पहले की तरह से हैं। अच्छी आवक के बाद भी व्यापारी इस आस में हैं कि बाजार में नोट की नई खेप अाने के साथ ही मुद्रा की समस्या समाप्त हो जाएगी। हालांकि उनके मन में इस बात का डर बना हुआ है कि  बाजार में माल डंप न हो जाए। दूसरी ओर यदि आम ग्राहकों की बात करें तो वह यह सुनिश्चित कर लेना चाहता है कि पहले उसके बटुए में पूरा पैसा आ जाए तभी वह फलों के खरीदारी की ओर रूख करे। इस तरह से दाम न घटने और जेब में नोट अभी न होने के कारण आमजन भी फल खरीद के प्रति उत्साहित नहीं है।

selllखुदरा फल बाजार में पहले की तरह ही तेजी बनी हुई है। सेब 90 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बना रहा। अनार भी सौ रुपये प्रति किग्रा के साथ बेचा जाता रहा। अनुकूल मौसम के बीच अच्छा उत्पादन होने के बाद भी नोटबंदी के इस दौर में संतरा 50 रुपये किग्रा बेचा गया। नोटबंदी से बाजार में रुपयों की कमी के बीच अंगूर के पांच किग्रा का डब्बा पांच सौ रुपये की दर बनाए रहा। केला 25-30 रुपये दर्जन तो नारियल का 30 रुपये प्रति नग की दर से बिक्री हुई। फल विक्रेताओं का मानना है कि एक पखवारा तक फल खराब न होने की दशा में घाटा सह कर बेचने को बाजार तैयार नहीं है। बाजार में नोट कम और फुटकर न होने को स्वीकार करते हुए वे बताते हैं कि पांच सौ व हजार के नोट प्रचलन से बाहर किए जाने के बाद 30-35 प्रतिशत ग्राहक बाजार से गायब हैं। ऐसे में बाजार का मंदा होना स्वाभाविक है। हाट में आये अधिकांश ग्राहको का कहना है  कि नोटबंदी के बाद छोटी करेंसी कम होने से लोगों का ध्यान अपनी रोजमर्रा की अावश्यकताओं पर की केंद्रित है। इस दौरान सब्जी बाजार में आई मूल्य गिरावट को देखते हुए लोगों को फल बाजार में भी कमी का अनुमान था। इसके बाद मूल्य में कोई कमी नहीं होने से ग्राहक भी इससे अभी दूर हो गए हैं।

selllllll लग्न के कारण बाजार में तेजी
फलों के दाम में अभी कमी न आने एक मुख्य कारण लग्न यानि शादी विवाह के मौसम का होना भी है। लग्न में फलों की बिक्री अमूमन बढ़ जाती है। नोटबंदी की परेशानियों के बीच भी शादी विबाह जैसे भी हो, निपटाए जा ही रहे हैं उसमें फल की खरीददारी भी उतना ही अनिवार्य है। यही तर्क सब्जियों पर ही लागू होता है लेकिन उसे मांग और पूर्ति का बाजार प्रभावित करने वाला फार्मूला दबाए हुए है, क्योंकि यह वैसे ही सब्जियों का अनुकूल मौसम है, जबकि फलों के साथ इसके उलट है और उसमें कुछ टिकाऊपना भी होता है।

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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