November 14, 2019

​तीस्ता की याद हुई ताजा, बहन सृष्टि ने दी अभूतपूर्व श्रद्धाजलि

संतोष कुमार सिंह
सारण: किसी भी कलाकार के लिए इतनी बड़ी श्रद्धाजलि न कभी किसी ने देखा होगा और न ही सुना होगा। लेकिन इतिहास नये रूप में सामने इतनी जल्दी सामने आयेगा इसकी कल्पना तो शायद ही किसी को रही होगी। कुछ ऐसा ही दृश्य था छपरा जिला अंतर्गत रिवीलगंज निवासी व टीवी कलाकार भोजपुरी के जानी मानी हस्ती उदय नारायण सिंह पुत्री अनुभूति शांडिल्य उर्फ तीस्ता की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का। वीरकुंवर सिंह गाथा का जीवंत प्रस्तुति देने वाली दिवंगत लोक कलाकार तीस्ता की याद में आयोजित कार्यक्रम में देश के अलग—अलग हिस्सों से आये भोजपुरी प्रेमियों ने शिरकत की। लेकिन इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहा उदय नारायण सिंह की दूसरी बेटी सृष्टि की प्रस्तुति।

सृष्टि को वीर कुंवर सिंह गाथा गान की प्रस्तुति करता देखना दर्शकों के निश्चित रूप से चौकाने वाला था। वही शैली,वही हाव भाव मानो तीस्ता का पुनर्जन्म सृष्टि के रूप में हो गया हो। सष्टि की प्रस्तुति देखकर लोगों को यह भरोसा हो गया ​कि भले ही तीस्ता इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन सृष्टि तिस्ता के सपनों को जरूर साकार करेगी। सृष्टि तिस्ता के पद चिन्हों पर चलकर इस व्यास शैली को आगे बढ़ाने के लिए उम्मीद की एक किरण के रूप में दिखाई दे रही है। अपनी प्रस्तुति के जरिये सृष्टि ने समस्त भोजपुरिया समाज को यह अहसास करा दिया कि उसके प्रस्तुति के जरिए तीस्ता की याद अनंत काल तक बनी रहेगी। लोगों के चेहरे के भाव और उनके उत्साह को देखकर सहज ही समझा जा सकता था कि उसकी प्रस्तुति देख कर लोग भावविभोर थे। उनके प्रस्तुति के दौरान लोगों के रोंगटे खड़े हो गए थे, आँखे नम थी क्योंकि उसके शब्दो में गज़ब की ऊर्जा थी। जी हां यह नजारा था छपरा के मौलाना मजहरुल हक एकता भवन का।


उल्लेखनीय है की तीस्ता एक महान लोक गायिका जो मात्र 16 वर्ष की आयु में पिछले वर्ष दिवंगत हो गई। “तीस्ता” नाम की यह भोजपुरी लोक गायिका “भोजपुरिया गौरैया”जो भोजपुरी में “बाबू कुंवर सिंह”की वीर गाथा एवं अन्य वीर पुरुषों की गाथा जब गाती थी ,तब श्रोताओं के रोंगटे खड़े हो जाते थे, श्रोता फूट-फूटकर रो देते थे। लोग उसे अवतारी कलाकार मानते हैं और भोजपुरी समाज को इस कलाकार से काफी उम्मीद बढ़ गई थी। लेकिन तीस्ता इतनी कम उम्र में अपनी अद्भुत कला को दिखाकर अमर हो गई।


तीस्ता की याद में सुबह से लेकर देर शाम तक कई कार्यक्रम आयोजित किये गये। एक दिन पूर्व से ही कार्यक्रमों का दौर शुरू हो गया। लोगों ने तीस्ता को श्रद्धांजली देते हुए पौधारोपण और रक्त दान शिविर का आयोजन भी किया । अगले प्रात: छह बजे कला प्रेमियों ने शहर के दारोगा राय चौक से लेकर नगरपालिका चौक तक प्रभातफेरी का आयोजन किया गया। तीस्ता के श्रद्धांजली सभा के पश्चात उसकी याद में एक स्मारिका का विमोचन किया गया और कवि सम्मेलन व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
जल्द शुरू होगी भोजपुरी की पढ़ाई
इस सत्र में शिरकत करते हुए जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरिकेश सिंह ने तीस्ता को श्रद्धांजलि देते हुए विश्वविद्यालय में भोजपुरी की पढ़ाई पर जोर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जयप्रकाश नारायण की जन्म तिथि से पहले ही सीनेट व सिंडिकेट में पास करा कर राजभवन से अनुशंसा के बाद भोजपुरी की पढ़ाई शुरू होगी। डॉ हरिकेश सिंह ने कहा ​कि तीस्ता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिसके साथ भोजपुरी की पढ़ाई प्रारंभ होगा।
तीस्ता की याद में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान जिला और राज्य के बाहर से आए कलाकारों ने अपनी अपनी प्रस्तुति तीस्ता को समर्पित की। जिसमें अजीत आनंद, रामेश्वर गोप, आईपीएस ध्रुव गुप्त सहित जाने माने कलाकारों ने अपने-अपने ढंग से श्रद्धांजलि दी। इतना ही नहीं इस मौके पर पूर्व आइएएस अधिकारी अरूण कुमार ने अंगदान करने की घोषणा भी की। कई कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से तीस्ता को श्रद्धांजलि दी जिसमें पद्मश्री मालिनी अवस्थी, पद्मभूषण शारदा सिन्हा, चंदन तिवारी जैसे कलाकार शामिल रहे। इस आयोजन में वहीं देर रात महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिघ्रवाल स्थानीय नेता सत्य प्रकाश राय, जी मीडिया के स्थानीय रिपोर्टर राकेश कुमार सिंह, सुहेल अहमद हाशमी सहित सैकड़ों लोगों ने सहयोग कर इस कार्यक्रम को सफल बनाया।

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