August 21, 2019

बढ़ती गर्मी में मछली पालक जलाशय प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान

पंचायत खबर टोली
तटबंध व जलस्तर को लेकर बरतें तत्परता-करें पोषक आहार प्रबंधन, चूना का छिड़काव

मऊ : गर्मी बढ़ रही है। ऐसे में इंसान को तो परेशानी होती ही है जलीय जीवों को भी परेशानी का सामना करना होता है। इस मौसम में यदि मछली पालन करने वाले जलाशयों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें,उनकी साफ—सफाई करें..जलाशयों में पानी की प्रचुरता बनायें रखें तो उन्हें खासा लाभ हो सकता है। इतना ही नहीं जलस्तर को लेकर सचेत रहने के साथ आहार प्रबंधन के प्रति भी सतर्कता आवश्यक है। मौसम में बदलाव के साथ् जलाशय के प्रबधंन का भी यह सबसे खास महीना होता है। इस दौरान मत्स्य पालकों को जल के प्रबंधन के साथ संपूरक आहार के प्रति जागरुकता बरतनी हाेती है। दूसरी ओर जलाशय में निरंतर जाल चलाकर चूना का छिड़काव करना भी अावश्यक होता है। इस समय की लापरवाही आगामी महीनों में उत्पादन को प्रभावित करेगी।

क्या है विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ केवीके वैज्ञानिक डा.वीके सिंह बताते हैं कि अप्रैल के पहले सप्ताह में ही माह गर्म होने से जलाशय में नियमित रुप जाल चलाकर चक्रमण करना चाहिए। जल में चक्रमण कम होने से मछलियों की वृद्धि के साथ जल की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सुबह या शाम को नियमित रुप से जलाशय में पानी भरना चाहिए। इससे गर्मी में होने वाले आक्सीजन की कमी की पूर्ति हो जाती है। मछलियों को संपूरक आहार के रूप में सरसों की खली आहार के रूप में लगातार नियमित मात्रा में प्रयाेग करते रहना चाहिए।

पूरक आहार का भी रखें ध्यान
आहार में मत्स्य पालकों को टेट्रासिन की दो गोली तोड़कर अवश्य डाल दें। इससे बदलते मौसम में उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। कहा कि गर्मी में हरा चारा के रूप में बरसीम का गठ्ठर बनाकर तालाब में कई स्थान पर डाला जाना चाहिए। आहार के रूप में इसका प्रयोग भी किया जा सकता है। जलाशय प्रबंधन के प्रति वह मत्स्य पालकों को सचेत करते हुए बताते हैं कि बरसात से पूर्व जलाशय के चारो तरफ तटबंध की सुरक्षा इसी समय करा लेना चाहिए। तालाब में जल की निश्चित मात्रा के उपरांत एक जगह से जल निकास का प्रबंध भी इसी समय कराना श्रेयकर होता है।

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