October 17, 2019

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले किसान संगठन हुए एकजुट

संतोष कुमार सिंह
6 जुलाई को मंदसौर से चलकर 18 जुलाई दिल्ली पहुंचेगी यात्रा
• कर्ज-मुक्ति और लागत से ड्योढ़े दाम की दो मांगों पर राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने को बनी सहमति

नयी दिल्ली: अन्न दाता के खुशहाली के सवाल पर सरकार का दावा रहा है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दुगनी होगी लेकिन कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब देश के किसी न किसी इलाके से किसानों के आत्महत्या की खबरें न आती हो। मध्यप्रदेश से शुरू हुआ किसान आंदोलन देश के अलग—अलग भागों में फैला। लगभग एक माह से अलग—अलग राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने अपने—अपने स्तर मंदसौर और महाराष्ट्र के किसानों के साथ,उनकी मांगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित किया। यही कारण है कि सौ से ज्यादा किसान संगठन एक मंच पर एकत्रित होकर अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति बनाकर 6 जुलाई को मंदसौर से 18 जुलाई को दिल्ली तक किसान मुक्ति यात्रा निकालेंगे। उनका कहना है कि कर्ज-मुक्ति और ड्योढ़े दाम की मांग पर देश के सभी किसान संगठन एकजुट हुए हैं। किसानों की शहादत ने किसान संगठनों में एक नयी राष्ट्रव्यापी एकता पैदा कर दी है।
क्या है प्रमुख मांग
राजधानी के चंद्रशेखर भवन में आगामी यात्रा की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए योगेंद्र यादव ने कहा कि हम दो प्रमुख मुद्दों पर एकजुट हो गए हैं.. किसानों को सभी फसलों का पूरा दाम और सभी किसानो की पूर्ण कर्जा-मुक्ति।
1. किसान को उसकी फसल की लागत से 50 फीसदी अधिक दाम दिलवाया जाय। यह दाम देश के हर किसान को, हर फसल में और हर हालत में मिले। अगर किसान उस दाम से कम में फसल बेचने पर मजबूर होता है तो सरकार उस कमी की भरपाई करे।
2. लाभकारी दाम के साथ किसान नए सिरे से शुरुआत कर सकें इसलिए एक अंतरिम उपाय के तौर पर एक बार किसान द्वारा किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक या फिर राज्य की सहकारी समिति या वित्तीय संस्थानों से लिया गया ऋण पूरी तरह से माफ किया जाना चाहिए। साहूकार के ऋण से भी मुक्ति की व्यवस्था हो।
किन राज्यों से गुजरेगी यात्रा
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा मंदसौर पुलिस गोली चालन में शहीद हुए किसानों की स्मृति में 6 जुलाई को पिपल्यामंडी (मंदसौर) से किसान मुक्ति यात्रा निकाली जाएगी। यात्रा का उद्देश्य किसानों की कर्जा मुक्ति और किसानी की लागत से डेढ़ गुने समर्थन मूल्य पर सभी कृषि उत्पादों की खरीद जैसे महत्वपूर्ण मुददो पर देश के किसानों के बीच जागृति पैदा करना है। यह यात्रा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से होते हुए 18 जुलाई को दिल्ली पंहुचेगी। रास्ते में यह यात्रा बारदोली और खेड़ा जैसे किसान आंदोलन के ऐतिहासिक स्थलों पर भी जायेगी। दिल्ली पंहुचकर यह मार्च जंतर मंतर पर एक मोर्चे का स्वरुप ले लेगा।

ये किसान नेता हुए शामिल
प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वी एम सिंह के अलावा इस समिति के कार्यकारिणी सदस्य और पूर्व सांसद हन्नान मौला (ऑल इंडिया किसान सभा), लोक सभा सदस्य राजू शेट्टी (स्वाभिमानी शेतकरी संगठन), पूर्व विधायक डा. सुनीलम (जनांदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय) और योगेंद्र यादव (जय किसान आंदोलन) उपस्थित थे। उनके इलावा राष्ट्रीय किसान समन्वय समिति की ओर से दशरथ कुमार और ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा की ओर से डॉ. आशीष मित्तल उपस्थित थे।
गौरतलब है कि देश में चल रहे किसान आंदोलनों को दिशा देने के लिए 16 जून 2017 को अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति का गठन किया गया था। 142 किसान संगठनों के समर्थन का दावा करते हुए मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि यह समन्वय पिछले कई दशकों में देश भर के किसान संगठनों का सबसे बड़ा गठबंधन बन गया है। इनका कहना है कि अन्य संगठनों के साथ ही गुरनाम सिंह, हरपाल सिंह और कक्का जी के नेतृत्व में चल रहा ‘राष्ट्रीय किसान संघ’ भी इसी पहल से जुड़ गया है।

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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