November 15, 2018

खत्म हुआ बिचौलियों का झंझट, ई पशु हाट से जुड़ घर बैठे खरीदें पशुधन

संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: बिहार के सोनपुर में विश्वप्रसिद्ध पशुमेला धूमधाम से चल रहा है। इस बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने एक वेबसाईट ई पशुधन हाट पोर्टल की शुरूआत की है http://www.epashuhaat.gov.in जिसके जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पशुओं की खरीद बिक्री आसान हो जाएगी और किसान घर बैठे सही कीमत पर अच्छी नस्ल के मनचाहे पशु खरीद सकेंगे। वर्तमान में पशुधन के लिए कोई संगठित बाजार नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा की गयी इस पहल को इस दिशा में बड़ी शुरूआत माना जा रहा है।

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पोर्टल का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि देश मे पहली बार राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन के अंतर्गत ई पशुधन हाट पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल देशी नस्लों के लिए प्रजनकों और किसानों को जोड़ने मे एक महतवापूर्ण भूमिका निभाएगा। इस पोर्टल के द्वारा किसानो को देशी नस्लों की नस्ल वार सूचना प्राप्त होगी। इससे किसान एवं प्रजनक देशी नस्ल की गाय एवं भैंसो को खरीद एवं बेच सकेंगे। देश मे उपलब्ध जर्मप्लाज्म की सारी सूचना पोर्टल पर अपलोड कर दी गयी है। जिससे किसान इसका तुरंत लाभ उठा सके। इस तरह का पोर्टल विकसित डेयरी देशों मे भी उपलब्ध नहीं है। इस पोर्टल के द्वारा देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन को एक नई दिशा मिलेगी।

gupta-dairy_nअभी तक क्या थी समस्या
किसानो को इस पोर्टल की शुरूआत से बड़ी मदद मिलेगी। अभी तक यदि कोई किसान कोई पशुधन खरीदना चाहता था तो उसे न तो पशुधन के गुणवत्ता की सही जानकारी मिलती थी और न ही उसका कोई रेट तय होता था। ऐसे में बिचौलियों का बोलबाला था। अब इस पोर्टल के जरिए देश के किसी भी हिस्से से किसान भाई अपनी जरूरत के मुताबिक एक प्लैटफार्म से सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह इलेक्ट्रानिक मार्केट न केवल किसानों गाय भैंस खरीदने में मदद करेगी अपितु यहां से जमे हुए सीमेन और भ्रूण भी खरीदे जा सकेंगे। साथ ही साथ इस पोर्टल पर पशु आहार और चारे की उपलब्धता से संबंधित जानकारी भी डाली जाएगी। यदि कोई बिहार का किसान राजस्थान में पाये जाने वाले गिर नस्ल के पशुधन को बिहार ले जाना चाहे तो ढुलाई से संबंधित पूरी सुविधा की जानकारी भी पोर्टल पर होगी। इतना ही नहीं यह पोर्टल किसानों को उन सभी स्रोतों के बारे में जानकारी देगा जहां हिमित वीर्य, भ्रूण तथा जीवित पशु, पशुधन प्रमाणन के साथ उपलब्धग है। किसानों की सुविधा के लिए देश के 56 वीर्य केंद्रों (20 राज्यों), 4 सीएचआरएस (4 राज्य तथा 7 सीसीबीएफ (6 राज्य) के साथ जोड़ेगा तथा “किसान से किसान तक” तथा “किसान से संस्थान तक” संपर्क स्थापित किया जा सके।
भारत में श्वेत क्रांति के जनक डा. वर्गीज कुरियन के जन्म दिन को राष्ट्रीय दूग्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मंत्रालय द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए राधामोहन सिंह ने कहा कि इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी । वेब पोर्टल को खोलने पर किसान जीवित पशु, वीर्य तथा भ्रूण के विकल्प को चुन सकता है, ब्यौरे की तुलना कर सकता है, पूरी सूचना दे सकता है तथा अपनी स्थान पर पशु की डिलीवरी लेने के लिए आनलाइन पैसा अदा कर सकता है। कृषि मंत्री ने आगे बताया कि दूध की बढ़ती मांग पूरा करने के साथ किसानो के लिए दुग्ध उत्पा्दन को और लाभदायक बनाने के लिए भारत सरकार ने एक नई योजना राष्ट्रीय गोवंश उत्पादकता मिशन को 825 करोड़ रुपए के आवंटन के इसके एक हिस्से के रूप में किया जाएगा।

gupta-2_nसहकारी संगठनों की अहम भूमिका
कृषि मंत्री ने कहा कि डॉ. कुरियन ने दुग्ध सहकारी संस्थानों का निर्माण करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि भारत पिछले 15 वर्षों से दुग्धक उत्पारदन के क्षेत्र मे दुनिया में नंबर वन बना हुआ है और इसका श्रेय छोटे दुग्ध उत्पादकों को जाता है। उन्होंने आगे कहा कि अभी इस क्षेत्र में बहुत काम करना है ताकि देश के हर बच्चे को दूध सहित पर्याप्तह पोषण दिया जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि 190.90 मिलियन गोपशुओं के साथ (19वीं पशुधन संगणना 2012 के अनुसार) विश्व गोपशु आबादी का 13% भारत में है। इसमें से 151 मिलियन देशी है, जो कुल गोपशु आबादी का 80% है। 108.7 मिलियन भैंसों के साथ देश में विश्व के भैंस आबादी का 57% है। हमारा देश बोवाईन आबादी में पहले स्थान पर है। यहां विश्व आबादी के कुल 18% बोवाईन हैं जो विश्व के कुल दुग्ध उत्पाादन में 20% का योगदान कर रहे हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि देशी गोपशुओं की उत्पाहदकता को बढ़ाने के लिए देशी नस्लों के विकास और संरक्षण हेतु आवंटन को कई गुना बढ़ाया गया है। अब इसे 2013 के 45 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 582 करोड़ रुपए कर दिया गया है।

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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