November 15, 2018

दाल की खेती में बढ़ रही है बिहारी खेतिहरों की रूची

basu_nबासु मित्र

पटना: पिछले साल आम आदमी के खाने की थाली से गायब होने के बाद लोगों को दाल की अहमियत का पता चला। लोग समझने लगे हैं कि दलहन की खेती बढ़ेगी तभी उनकी थाली में दाल की कटोरी आएगी। वर्तमान समय में बिहार दाल उत्पादक राज्य की श्रेणी में दूर –दूर तक नहीं है। दाल के फसल की उन्नत खेती के लिए किसानो को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार में केंद्र सरकार के सहयोग से कई ऐसेकार्यक्रम चलाये जा रहे हैं जिससे बिहार दाल उत्पादन के क्षेत्र में न सिर्फ आत्मनिर्भर हो जाये, बल्कि देश के प्रमुख दाल उत्पादक राज्य की श्रेणी में शामिल हो सके ।बिहार में किसानों को दाल की खेती के लिए  प्रोत्साहित करने के लिए सरकारके द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास मिशन के द्वारा अलग –अलग  अतिरिक्त दलहन आच्छादन और मक्का के साथ दलहन अंतरवर्तीय प्रत्य्क्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है ।

chana-2_thumbnailसाल- दर साल बाद रहा है खेती का रकबा

राज्य में दलहन की खेती का रकबा साल दर साल बढ़ते जा रहा है, साल 2013-14 में  रबी और खरीफ को मिला कर जहाँ लगभग 5 लाख हेक्टेयर में दलहन की खेती की गई थी वहीँ 2014-15 में यह बढ़ कर 5 लाख 6 हजार हेक्टेयर हो गया है । जबकि गरमा फसल को छोड़ कर 2015-16 में 3 लाख 92 हजार हेक्टेयर में दलहन की खेती की जा चुकी है कृषि विभाग की उम्मीद है की इस साल दलहन की खेती और ज्यादा बढ़ेगी । गंगा और दक्षिण बिहार का इलाका है मुख्य वैसे तो बिहार सरकार के द्वारा राज्य के सभी जिलों में दलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाओ का क्रियान्वयन की जा रहा है , लेकिन पारम्परिक खेती के इलाकों के आधार पर पटना , नालंदा, भोजपुर रोहतास, गया, औरंगाबाद, लखीसराय, बांका, नवादा ,भभुआ, शेखपुरा के इलाकों में कुल रकबा का करीब 80 प्रतिशत इलाका आता हैं जहाँ दलहन की खेती प्रमुख रूप से की जा रही है ।

बहु फसलीय खेती पर दिया जा रहा है जोर
बिहार में दलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार के द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास मिशन के द्वारा चलाये जा रहे   अतिरिक्त दलहन आच्छादन और मक्का के साथ दलहन अंतरवर्तीय प्रत्य्क्षण कार्यक्रम के तहत मक्का के साथ मूंग, अरहर, चना, और मसूर की खेती के लिए प्रोत्साहित की जा रहा है । इसके तहत किसानों को अनुदानित दर पर बीज के साथ-साथ किसानो को प्रयोग के तौर पर खेती भी करवाया जा रहा है और उसके लिए 2200 रूपये से लेकर 5000 रूपये प्रति एकड़ तक अनुदान भी दे रही है ।

arhar_2282337fदलहन के खेती के लिए मुफ्त बीज
दलहन की उन्नत खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मक्का के साथ दलहन अंतरवर्तीय प्रत्य्क्षण कार्यक्रम के तहत मक्का के साथ मूंग, उड़द, के अलावा अरहर दाल की खेती के लिए किसानो को प्रोत्साहित किया जा रहा है । केंद्र और बिहार सरकार के द्वारा  प्रयोग के तौर पर राज्य के सभी जिलो में 11 हजार 824 एकड़ में खेती की जा रही है। योजना के तहत किसानों प्रोत्साहित करने के लिए  2260 रूपये प्रति एकड़ अनुदान के तौर दे रही है । वहीँ  क्लायमेटिक चेंज की स्थिति से क्रोपिंग पेटर्न बदलने के लिए  अरहर दाल की खेती के बढ़ावा के लिए सरकार के द्वारा किसानो को 720 रूपये प्रति एकड़ की दर से दस हजार एकड़ में खेती की जा रहीहै ।
बीज विस्तार योजना से भी मिला है लाभ
बिहार में खास कर दलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग के द्वरा मुख्यमंत्री तीव्र बीज विकास योजना के तहत हरेक गावं के दो चयनित किसान को आधे  कीमत पर बीज के विकास के लिए 4 किलो अरहर 2 किलो चना 4
किलो मसूर का बीज उपलब्द करवाया गया था । इस अभियान का मुख्य उद्देश्य था की किसानों को बीज के मामले में आत्म निर्भर बनाना । विभाग के अनुसार इस अभियान में पुरे बिहार के 78 हजार से ज्यादा किसानों को बीज उपलब्ध करवया
गया था । बिज विस्तार योजना के भी राज्य के प्रति  किसान दलहन की खेती के प्रति जागरूक हुए हैं ।
तकनीकी सहायता के लिए मेला का आयोजन
किसानो को उन्नत खेती के लिए तकनीकी उपकरणों के लिए बड़े शहरों या राजधानी का चक्कर न लगनी पड़े इसके लिए सरकार के द्वारा जिला स्तर पर ही कृषि मेला का आयोजन करवाया जाता हैं । इस मेले में न सिर्फ किसान अनुदानित मूल्य पर उन्नत उपकरण खरीद रहे हैं । मल्टीक्रॉप प्लान्टर, रोतावेटर , पवार स्प्रेयर  जैसे अनेक  उन्नत उपकरणों के माध्यम से राज्य में खेती के तौर तरीके में काफी बदलाव आया है इसका फायदा पैदावार के रूप में किसानों को मिल रहा है ।

mangaकिसान स्कूल और कृषि सलाहकार देती है टिप्स
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के प्रभारी पदाहिकारी कौशल किशोर शर्मा बताते हैं है की जिला स्तर पर कृषि विबाग और आत्मा परियोजना के द्वारा समय- समय पर उन्नत खेती की सलाह दी जाती है, ताकि किसान उन्नत तरीके से खेती कर ज्यादा से ज्यादा पैदावार ले सके । किसानों की सहायता के लिए सरकार के द्वारा पंचायत स्तर पर कृषि सलाहकार की नियुक्ति की गई है ।
संचार सेवा का मिल रहा है लाभ
किसान के द्वारा बिहार सरकार के द्वारा चलायी जा रही  किसान संचार सेवा से नियमित लाभ लिया जा रहा है । यहाँ से किसानों को मौसम से लेकर , फसल में होने वाली मौसमी बीमारी से उपाय  के बारे में बताया जा रहा है । इतना ही नहीं किसानों के लिए पोर्टल भी बनाया  गया है जिसके द्वारा  किसानों की समस्याओं को जानकारी पहुचायी जा रही है ।

दलहन उत्पादन के आंकड़े
बिहार में होने वाली दलहन फसल चना , मूंग , उड़द, मसूर, मूंग, अरहर
वर्ष                    रकबा                                                    एकड़ में    उत्पादन
2015-16   3
लाख 56 हजार हेक्टेयर(गरमा फसल को छोड़कर )   3 लाख  92     हजार मीट्रिक टन
2014-15    5
लाख 6 हजार हेक्टेयर              4 लाख 29 हजार मीट्रिक टन
2013-14       5
लाख हेक्टेयर                         5लाख 22 हजार मीट्रिक टन
(
स्रोत्र:-राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन , बिहार )


बिहार में दाल की उपज आकड़ों में
नाम                  रकबा(हेक्टेयर में)                उपज (मीट्रिक टन)
चना                           60933                              71231
मूंग                            10766                               6869
खेसारी                      62611                               68614
तूअर                        21277                                30001
उड़द                         15039                               13540
कुल्थी                      8182                                    7847
समर मूंग               156699                              90725
अन्य दाल                3000                                 1800
सभी आकडे कृषि विभाग के है , समर मूंग साल 2014-15 का है

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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