July 14, 2020

अन्नदाताओं के लिए आफत बनी कोरोना के बीच राहत देती एमएसपी में बढ़ोतरी की खबर

मंगरूआ
नयी दिल्ली: कोरोना काल में किसानों की परेशानियों से जुड़ी खबरें तो आपने भी देखी,सुनी, पढ़ी होगी। कभी किसान की फसल खेत में रह जाने की खबर, कभी कोरोना की वजह से मजदूर न मिलने की परेशानी, आगलगी के कारण फसल बर्बादी, कभी टमाटर, प्याज और सब्जियों के कौड़ी के दाम बिकने की खबर। लेकिन इन सब के बीच एक अच्छी खबर भी तब आई जब मोदी सरकार की कैबिनेट प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में लॉक डाउन खुलने के पहले ही दिन बैठी और यह सूचना दी गई कि देश भर में बंपर पैदावार हुआ है, फसलों की रिकार्ड खरीदगी चल रही है।  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कैबिनेट के बैठक में किसान हित में लिए गये फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने खरीफ की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 50 से 83 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। इससे करोड़ों किसानों को फायदा होगा। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी बताया कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में किसानों के कर्ज भुगतान की तिथि 31 अगस्त तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई।

क्या कहा कृषि मंत्री ने


नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भी सरकार की पहली नजर किसान और गरीब पर ही थी। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल समय में भी इस साल बंपर उत्पादन हुआ है। मक्का में 52 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। सरकार की तरफ से अबतक 95 लाख मीट्रिक तक धान और 360 लाख मीट्रिक टन गेंहू खरीदा जा चुका है। तोमर ने बताया कि सरकार ने किसानों को उनके उत्पादों के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए वर्ष 2020-21 विपणन मौसम की खरीफ फसलों की एमएसपी में वृद्धि की है। सरकार ने खरीफ फसलों के एमएसपी में 50 फीसदी से 83 फीसदी तक की वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान का एमएसपी 50 फीसदी बढ़ाकर 1868 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इसी प्रकार ज्वार का एमएसपी 2620 रुपये और बाजरे का 2150 रुपये प्रति क्विवंटल तय किया है। गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपये से बढ़कर 1925 रुपये हो गया है।
ये हैं आंकड़े
रागी, मूंग, मूंगफली, तिल, कपास और सोयाबीन के समर्थन मूल्य में भी 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है।  इस तरह से देखें तो एमएसपी की सर्वाधिक वृद्धि रामतिल (755 रुपये प्रति क्विंटल), तिल (370 रुपये), उड़द (300 रुपये) और कपास -लंबा रेशा (275 रुपये प्रति क्विंटल) की गई है। जौ का समर्थन मूल्य 2620 रुपये, बाजरा का 2150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके अलावा रागी, मूंग, मूंगफली, सोयाबीन, तिल और कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 50 फीसदी बढ़ाया गया है।
इसके अलावा खेती और उस जुड़े काम के लिए 3 लाख तक के अल्पकालिक कर्ज के भुगतान की तिथि 31 अगस्त 2020 तक बढ़ाई गई है। साथ ही ब्याज छूट योजना के तहत 31 अगस्त तक ऋण अदायगी करने वाले किसानों को 4% ब्याज पर ही कर्जा मिलेगा।


क्या है न्यूनतम समर्थन मूल्य
अक्सर ऐसा होता है कि यदि किसान की बंपर फसल होती है तो उसे खरीदार ​नहीं मिलता है, और यदि मिलता भी है तो खरीदार की कोशिश होती है कि उसे कम मूल्य पर खरीदा जाये। ऐसे में किसानों को कभी कभार लागत मूल्य से भी कम पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है। किसान इस तरह की परिस्थिति में न फंसे और किसानों को उसकी फसल का लागत से ज्यादा मूल्य मिले, इसके लिए भारत सरकार देशभर में एक न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। यदि किसानों को उसकी फसल का खरीदार नहीं मिलता है तो किसान सरकार को निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच सकता है। इस तरह से देखें तो कृषि उत्पादों के मूल्यों में गिरावट को रोकने के लिए सरकार मुख्य फसलों का एक न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करती है, जो एक सत्र के लिए मान्य होता है। किसानों का इसका सीधा फायदा ये है कि इससे अनाज की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है। यदि किसान फसल बोता है तो उसे न्यूनतम मूल्य मिलने की गारंटी होती है।


न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण को लेकर है मतभेद

वैसे तो न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करते समय विशेषज्ञ कई बातों का ध्यान रखते हैं मसलन उत्पादक की लागत, मूल्यों में परिवर्तन, इनपुट-आउटपुट मूल्य में समानता, मांग-आपूर्ति जैसी बातें महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की प्रक्रिया में कई खामियां हैं, जिसका नुकसान किसानों को उठाना पड़ता है। कई विशेषज्ञों की तो यह राय भी है जब बाकी चीजों का दाम उत्पादक तय करता है तो किसानों को भी उनकी फसलों के मूल्य निर्धारण का अधिकार मिले। हालांकि सैद्धांतिक तौर मोदी सरकार अक्सर यह दलील देती रही है कि किसानों को उसकी फसल का डेढ़ गुणा लाभकारी मूल्य दिये जाने के स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में अग्रसर है। इस लिहाज से देखें महत्वपूर्ण फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का आज के कैबिनेट फैसला उसी दिशा में बढ़ाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है।

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