November 15, 2018

गांव में हो रोजगार सृजन..बजट से गांव को यही उम्मीद

नीरज प्रताप सिंह
भागलपुर: कुछ दिनों बाद आम बजट आने वाला है । हर वर्ग को इससे बहुत कुछ आशाएं होती है कि इसबार सरकार के पिटारे में उनके लिये कुछ होगा ।  ग्रामीण इलाके में रहने वाले लोगों को इस बार इस सरकार से उम्मीद कहीं ज्यादा है । क्योंकि पिछले बजट में भी मोदी सरकार की प्राथमिकता में गांव—गरीब व किसान की झलक देखी गयी थी। उसके पहले की सरकारों ने भी हालाकि इनके विकास का नारा देते हुए ही बजट बनाने का दावा किया लेकिन जमीन पर जो दिखा उससे यही लगा कि अबतक की सरकारें उन्हें सिर्फ ठगने का ही काम किया है ।

भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसके चलते यहां की अर्थव्यवस्था का आधार भी खेती-किसानी है।आज भी गांव व शहर की आबादी को मिलाकर अस्सी फीसदी तक लोग खेती-किसानी के काम में जुटे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता  है कि केन्द्र सरकार जो भी काम करेगी या निर्णय लेगी इतनी बड़ी आबादी को ध्यान में रखकर ही लेगी। अगर हम पूर्वांचल की बात करें तो गांव के किसानों की सबसे बड़ी समस्या है उनके खेतों की सिंचाई का ,अभी गेंहूँ के फसल में पानी का एकमात्र साधन डीजल पम्पसेट है ,जो कि काफी महंगा हो गया है ,लेकिन किसान क्या करे मजबूरी में वो इसको अपने कंधे पे ढो रहे है । अगर इसके स्थान पर सरकार उनके लिये बिजली की उचित व्यवस्था करे तो किसानों को इससे काफी बचत और प्रदूषण भी कम होगी । हालाकि मोदी सरकार गांव—गांव बिजली पहुंचाने के लक्ष्य में लगी हुई है लेकिन बिजली का मतलब सिर्फ दरवाजे पर बल्ब जलना नहीं अपितु किसानों को सिंचाई के साधनों के विस्तार के रूप में बिजली मिले तो इससे उन्हें बहुत ज्यादा फायदा होगा और खेती किसानी आसान हो जाएगा। ग्रामीण भारत में समृद्धि आएगी। वैसे तो सरकार  बार—बार यह दावा भी कर रही है और इस दिशा में कुछ प्रयास होता हुआ भी दिख रहा है..जैसे सरकार ने कहा है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दुगुनी कर देंगे। सिंचाई के साधनों के विस्तार के साथ ही पानी की कमी को देखते हुए सरकार ने ड्रिप सिस्टम से सिंचाई को बढ़ावा देने का प्रयास करती रही है। इससे काफी फायदा होगा और पानी की बर्बादी भी कम होगी। बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किये जाने की उम्मीद है।

  साथ ही कृषि आधारित कुटीर और लघु उद्योगों को अगर सरकार प्रोत्साहित करे तो ग्रामीण भारत से पलायन भी रुकेगा और उन्हें उचित रोजगार भी मिलेगा। सरकार खाद्य प्रोसेसिंग के कामो में तेजी लाने के लिए विशेष बजटीय आवंटन करे तो किसानों को नकदी कृषि की दिशा में बढ़ने और कृषि उत्पाद के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी। एक नेता ने कहा था कि हम आलू की फैक्ट्री लगाएंगे..भले ही वो अपनी बात ठीक से न रख पाए हों..उनकी मंशा रही होगी..आलू के उत्पाद को प्रो​सेसिंग कर बाजारोन्मुख बनाने के लिए उद्योग लगाना। सरकार इसके लिए विशेष बजट दे तो गांवो में रोजगार सृजन होगा। वैसे सरकार का प्रयास है कि जैविक खेती को बढ़ावा मिले। किसान भी चाहते हैं कि वो जैविक खेती करे और उर्वरकों पर खर्च में कमी आए। इसके लिए सरकार विशेष सुविधा दे तो बात बनेगी। गांव का किसान के समृद्धी में पशुपालन एवं इस तरह के अन्य साधनों का अहम योगदान रहा है। मसलन मत्सय पालन,मुर्गी पालन,मछली पालन आदि। इससे यदि किसान की फसल किसी वर्ष कमजोर भी रह गयी तो वह इन रोजगारों के भरोसे अपने परिवार पाल लेता है। इसलिए सिर्फ खेती नहीं बल्कि खेती के साथ अनुषंगी रोजगार को खास तरजीह मिले। बजट में इसके लिए सस्ते दर पर लोन प्राप्त करने की व्यवस्था हो तो काफी मजबूती मिलेगी।
अभी ग्रामीण इलाके में बैंकों की शाखाएं बहुत ही कम है बजट में अगर इस ओर भी ध्यान दिया जाय तो उससे ग्रामीण इलाके के विकास में काफी सहायता मिलेगी
और अंत में सभी ग्रामीण इलाके को अगर सड़क से जोड़ने का उचित कार्य किया जाय तो ये सबसे बड़ा कार्य होगा उनके विकास का । किसान और ग्रामीण आबादी इसके सहारे बाजार से जुड़ेगे और बाजार ही उनके जीवन में संपन्नता का आधार तैयार करेगा।

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