October 17, 2019

बरतें सावधानी.. न करें हरे चारे के रूप में बाजरे का उपयोग

पंचायत खबर टोली

मऊ : गर्मी का दिन है। तापमान में उतार चढ़ाव है। लगभग 40 डिग्री तापमान में महीनों से बहने वाली प्रतिकूल हवा के बीच पशुपालकों को थोड़े सावधानी की जरूरत है। विशेष रूप से उन पशु पालकों को जो पशुओं को हरे चारा के रूप में बाजरा खिलाते है। ऐसे मौसम में हरे चारा के रूप में बाजारा खिलाना जानलेवा साबित हो सकता है।

क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

पशु वैज्ञानिकों की राय है कि  गर्मी भरे इस मौसम में इस दौरान बाजरा में अम्लीय पदार्थों की मात्रा का विकास हो जाता है। ऐसे में असिंचित क्षेत्र की फसल पशु की जान ले सकती है। हरा चारा का प्रयोग करते समय पशुपालकों को बहुत सचेत रहने की आवश्यकता है। इसमें लापरवाही होने की दशा में यह घातक हो सकती है।

ऐसे करें  बचाव

वरिष्ठ केवीके वैज्ञानिक डा.वीके सिंह बताते हैं कि  गर्म होते ही हरे चारे में एल्कोहलिक पदार्थों का प्रभाव बढ़ जाता है। नियमित सिंचाई न होने की दशा में इसका पशु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। डा.सिंह ने पशुपालकों को सलाह दी है कि आवश्यक न होने पर बहुत गर्म मौसम में बाजरा पशु को कदापि न खिलाएं। हरे चारे के रुप में लोबिया व उर्द का प्रयोग किया जा सकता है। पशु आहार के संदर्भ में डा. सिंह बताते हैं कि गर्मी में आहार के साथ खनिज मिश्रण का प्रयोग अवश्य करें। भोजन में दो तिहाई पानी का प्रयोग करें। किसी भी दशा में गर्मी में बासी चारे का प्रयोग नहीं करना चाहिए। बासी चारा देने से पाचन में परेशानी होती है। गर्मी में बिना सिंचाई वाला हरा चारा पशुओं के ऊपर जहरीला प्रभाव छोड़ सकता है। मौसम गर्म होते ही हरे चारे में नियमित रुप से सिंचाई करना अति आवश्यक है। आवश्यकता न होने पर पशुओं को इस तरह के मौसम में हरा चारा खिलाने से परहेज करने की आवश्यकता है।

About The Author

एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *