November 15, 2018

इलाहाबादी अमरूद को वैश्विक पहचान दिलाने में जुटी संचारी

 मनीष अग्रहरि
इलाहाबाद:  देश के कोने—कोने में इलाहाबादी अमरूद अपने खास रंग और स्वाद के लिए जाना जाता है। एक बार जो भी इलाहाबादी अमरूद खाता है हमेशा हमेशा के लिए मुरीद हो जाता है। यहां के अमरूदो में पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। कृषि वैज्ञानिक इसके पीछे यहां के मिट्टी में पाये जाने वाले एक खास तत्व मोन्टमोरोलाइट के पाये जाने को जिम्मेदार ठहराते है।
जी जान से जुटे किसान
इलाहाबाद और इसके गिर्द गिर्द के किसान अमरूद की खेती दिलो-जान से करते है मगर सरकारी तौर पर सही मार्गदर्शन न मिल पाने के कारण भरपूर मुनाफे से मरहूम रह जाते है। इस दिशा में इलाहाबाद में सरकार के साथ सास्कृतिक कार्यक्रमों को सलीके से करने वाली संचारी संस्थान ने पर्यटन विभाग के साथ मिलकर अनूठा प्रयास किया है जिससे उम्मीद है कि आने वाले दिनो में अमरूद किसानों की माली हालत बेहतर हो सकेगीे।

बता दे कि उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (गंगापार, यमुनापार), कौशाम्बी क्षेत्रो में बड़े पैमाने पर अमरूद के बागान है। इन  बागानो में मुख्य रूप से लखनउ-49 (सरदार), इलाहाबादी सफेदा और सुर्खा प्रजाितयों की बागवानी मुख्य रूप से की जाती है। सुर्खा प्रजाति  अपने खास रंग, रूप और स्वाद के कारण देश से इतर विदेश में भी खास तौर पर पसंद किया जाता है। यह देखने में गजब के आकर्षक रंग का होता जो कि हरा और लाल रंग से बिन्दुवत सजा होता है।

संचारी संस्थान का अनुपम प्रयोग

इस संबंध में इलाहाबाद में कई बार सफल रूप से अमरूद और आम का फ्रूट फेस्टिवल आयोजित कराने वाली संचारी संस्थान की पल्लवी चंदेल कहती है “इलाहाबादी अमरूद में सबसे ज्यादा डिमांड सुर्खा या सुर्खाब अमरूद की है। इसकी पहचान अपने विशेष लाल रंगत और लाजवाब स्वाद के कारण है। बाजार में इसकी मांग सर्वाधिक रहती है। जिससे कई बार यह सेब को टक्कर देती पायी जाती है। इसके अलावा एक और प्रजाति जिसे स्थानीय भाषा में लाल बीजी अमरूद कहते है लोगो के सिर चढ़ कर बोलता है। इस अमरूद की खासियत यह होती है कि यह देखने में हरा होता है जब कि अंदर पूरा लाल होता है। ”
अमरूद महोत्सव से बढ़ी पर्यटकों की रू​ची


पंचायत खबर के यह पूछे जाने पर कि अमरूद बागवानो  और व्यापारियो की माली हालत कैसे बेहतर हो सकती है इस पर पल्लवी चंदेल कहती है कि संचारी विगत वर्षो से इस दिशा में ठोस प्रयास कर रही है, इस बार जो अमरूद महोत्सव संस्थान ने आयोजित किया था वह उद्यान विभाग के साथ साथ पर्यटन विभाग के साथ मिलकर किया गया था, कोशिश यही थी कि आने वाले बाहरी पर्यटक भी इसके महत्व और स्वाद को समझे जिससे यहां के अमरूदो का अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात बढ़ सके। वह आगे कहती है कि संचारी अपने सास्कृतिक आयोजनो के जरिये इलाहाबादी अमरूद को लगातार बढ़ावा देने का काम कर रही है। सरकार यदि इसे अमरूद क्लस्टर के रूप में विकशित करके बागवानो और व्यापारियो को विशेष रूप से प्रशिक्षित कर दे तो और भी बेहतर हो जायेगा। जरूरत यह है कि यहाॅं अमरूद आधारित फूड प्रोसेसिंग उद्योग खुले और व्यापारियो को निर्यात करने के गुरूमंत्र बताये जाये।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वही दूसरी ओर यहाॅं के अमरूद में पाये जाने वाले अनेको विशेष गुण पर राजा दिनेश सिंह कृषि विज्ञान केन्द कालाकांकर प्रतापगढ़ के विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यान) डॉ सुधाकर सिंह कहते है कि गंगा यमुना के किनारे की मिट्टियों में खास तत्व मोन्टमोरिलाइट की उपस्थिती के कारण ऐसा है जो कि देश के दूसरे हिस्सो में अपेक्षाकृत इसकी न्यूनता पायी जाती  है।

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