August 15, 2020

कृषि पत्रकार बृहस्पति पाण्डेय को मिला आई सी ए आर का राष्ट्रीय पुरस्कार

आलोक रंजन
लखनऊ: देश में खेती किसानी पर लिखने पढ़ने वाले पत्रकारों में अपनी खास पहचान रखने वाले बृहस्पति कुमार पाण्डेय को 2019 का “चौधरी चरण सिंह पुरस्‍कार” प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें भारत सरकार के भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रिंट मीडिया हिंदी की श्रेणी में दिए जाने वाले कृषि अनुसंधान और विकास में उत्‍कृष्‍ट पत्रकारिता के लिए दिया गया। इसकी घोषणा कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राज्य मंत्री पुरषोत्तम रूपाला और कैलाश चौधरी द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 92वें स्थापना दिवस और पुरस्कार समारोह के मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दी गई। जिसके तहत बृहस्पति पाण्डेय को एक लाख रूपए की नकद राशि के और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार बृहस्पति कुमार पाण्डेय को ‘फार्म एन फूड’ में प्रकाशित उनके लेखों व सफलता की कहानियों के मूल्यांकन के आधार पर प्रदान किया गया है।


कौन हैं बृहस्पति पाण्डेय
प्रिंट मीडिया हिंदी की श्रेणी में पुरस्कृत किये गए बृहस्पति कुमार पाण्डेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के एक छोटे से गाँव थरौली के रहनें वाले हैं। वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखतें हैं। उन्होंने भूगोल विषय में मास्टर डिग्री के साथ ही मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क की पढ़ाई की है। इसके अलावा बह बी.एड. डिग्री धारक भी हैं। उनका बचपन पूरी तरह से खेतों में बीता। वह खेती में पूरी तरह से रचे बसे हैं। उनके पिता जी एक बड़े किसान थे उसके बावजूद वह खेती में लगतार घाटे से जूझ रहे थे ऐसे में उनकी खेती बर्बाद होती गई और एक समय इसके परिवार में ऐसा भी आया की परिवार घोर रूप से आर्थिक तंगी का शिकार हो गया। ऐसे दौर में बृहस्पति पाण्डेय की पढ़ाई बीच में ही छूट जानें की नौबत आ गई। उस समय बृहस्पति 6वीं कक्षा में थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लोकल हॉट मेलों में खिलौनों की दूकान लगा कर अपनें पढ़ाई के खर्चे निकालनें के साथ ही पिता जी को भी आर्थिक सहयोग करना शुरू कर दिया।


वह लगातार समस्याओं से जूझते हुए आगे बढ़ रहे थे इसी बीच उनके पिता को खेती में जबरदस्त घाटा हो गया जिसका उनके दिमाग पर इतना आघात पड़ा की वह ब्रेन हैमरेज का शिकार हो गये और असमय ही वह चल बसे। ऐसे समय में जब उन्हें पिता की ज्यादा जरुरत थी उनकी असमय मृत्यु के चलते वह पूरी तरह से टूट गए। अब उनके जिम्मे अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ घर परिवार की जिम्मेदारी और बर्बाद हो चुकी खेती को भी संभालना था। उधर पिता की मौत के बाद उनके पड़ोसियों नें उनके जमीनों पर कब्जा करना शुरू कर दिया था। ऐसे स्थिति में उनके पास घर छोड़ने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा था क्यों की परिवार चलाने के लिए उनको पैसों की जरुरत थी उसके लिए वह नौकरी की तलास में अपनें गाँव से 15 किलोमीटर दूर बस्ती शहर में आकर रहनें लगे।


वह हालात के चलते अपना गाँव छोड़ कर चले तो आये थे लेकिन खेती और गाँव के प्रति अपना प्रेम नहीं छोड़ पाए। इसी लिए उन्होंने निर्णय लिया की वह न केवल बिगड़ चुकी अपनी खेती की दशा को सुधारेंगे बल्कि वह ऐसे किसानों की कहानियों और कृषि तकनीकी को भी घाटे से जूझ रहे किसानों के सामनें लायेंगे जिसके जरिये उनके जीवन में बदलाव लाया जा सके। इसके लिए उन्होंने खेती बाड़ी से जुडी पत्रकारिता की राह को चुनना शुरू किया और लोकल अखबारों में स्वतंत्र रूप से लेखन का का शुरू कर दिया।
फार्म एन फ़ूड नें दिखलाया रास्ता
इसी क्रम मे दिल्ली प्रेस ने किसानों को ध्यान में रख कर फार्म एन फ़ूड के नाम से एक नई पत्रिका की शुरुआत की। जिसके बाद बृहस्पति पाण्डेय की मनमांगी मुराद पूरी हो गई और उन्होंने खेती और किसानों के मुद्दे पर लेखन की शुरुआत कर दी और लगातार सफल किसानों के खेतों में जाकर उनकी सफलता की कहानियों को दूसरे किसानों के सामने लाते रहे। अब वह फिर से खेती और किसानों से जुड़ गए थे ऐसे में वह कृषि पत्रकरिता के साथ-साथ अपनी बर्बाद हो चुकी खेती को फिर से सुधारने अपने गाँव आना जाना शुरू कर चुके थे।


बृहस्पति पाण्डेय ‘फार्म एन फूड’ में नियमित तौर पर खेती किसानी में उन्नत तकनीकी के जरिए अपनी माली हालत में सुधार लाने वाले किसानों तक पहुंच कर उन की सफलता की कहानियों को लोगों के सामने लाते रहे हैं। ‘फार्म एन फूड’ में लिखे उन के इन लेखों को पढ़ कर अन्य किसानों ने भी बताई गई उन्नत तकनीकी को अपना कर अपनी माली हालत सुधारने में सफलता पाई है। इस के अलावा वे नियमित तौर पर खेती, बागबानी, मत्स्य पालन. डेरी, पशुपालन, मुर्गीपालन, फूड प्रोसेसिंग सहित खेती से जुड़े तमाम मुद्दों को बेहद ही सरल भाषा में किसानों के लिए लिखने का काम करते रहे हैं।


कृषि पत्रकारिता से राष्ट्रीय पुरस्कार तक का सफ़र
कृषि पत्रकारिता में खुद को ढाल लेनें वाले बृहस्पति पाण्डेय को साल चयन मंडल ने ‘फार्म एन फूड’ के पत्रकार बृहस्पति पांडेय द्वारा पिछले 3 वर्षों में लिखे गए कृषि संबंधी लेखों से किसानों के जीवन में आ रहे बदलाव, कृषि में तकनीकी ज्ञान की जानकारी व कृषकों द्वारा अपनाए जा रहे उन्नत खेती-किसानी के लेखों के आधार पर चयन किया । यह पुरस्कार हिंदी प्रिंट माध्यम में भारत के कृषि पत्र पत्रिकाओं से जुड़े किसी एक पत्रकार को दिया जाता है।
फर्जी मुकदमों नें भी जज्बे को झुकने नहीं दिया
उनके खेती में रुझान को देखते हुए उनकी जमीन पर कब्जा कर चुके उनको तंग करना शुरू कर दिया और उनके ऊपर कई तरह के फर्जी मुकदमें खड़े कर दिए लेकिन वह ज़रा भी नहीं झुके और वह स्थानीय न्यायालय से मुकदमा लड़ते हुए जीत भी गए। लेकिन उनके पड़ोसियों नें उनको परेशान करना नहीं छोड़ा और वह हाईकोर्ट में भी चले गए। न्यायालय नें उनके मुकदमें मे जरुरी छान-बीन कराने पर यह पाया की वह पूरी तरह से निर्दोष हैं और अंततः उनके ईमानदारी से उन्हें जीत हासिल हो ही गई।


घाटे से उबार खेती को भी बनाया लाभ का सौदा
बृहस्पति को कृषि पत्रकारिता के दौरान किसानों से ऐसे अनुभव मिले जो उनकी बर्बाद हो चुकी खेती के लिए वरदान साबित हुए और उन्होंने उन अनुभवों का इस्तेमाल अपने बर्बाद हो चुकी खेती में करना शुरू किया तो धीरे-धीरे उनकी खेती लाभ के सौदे में बदलती गई। आज के दौर में वह एक कृषि पत्रकार होनें के साथ ही एक सफल किसान के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकें हैं। उनके पास आज ट्रैक्टर, लेजर लैंड लेवलर , आर एम् बी प्लाऊ, सीड ड्रिल, रोटावेटर, कल्टीवेटर, स्ट्रा चाप कटर जैसे कई आधुनिक कृषि यन्त्र मौजूद हैं।


क्या कहते हैं वरिष्ठ
राज्यसभा चैनल से जुड़े और खेती किसानी की पत्रकारिता के मर्मज्ञ व विशेषज्ञ अरविंद कुमार सिंह बधाई देते हुए कहते हैं कि हमारे प्रांत उत्तर प्रदेश और हिंदी जगत के लिए यह गर्व का विषय है कि कृषि क्षेत्र पर लगातार काम कर रहे युवा और उत्साही पत्रकार साथी बृहस्पति कुमार पांडेय को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा राष्ट्रीय स्तर के चौधरी चरण सिंह कृषि पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वे हमारे गृह जिले बस्ती के निवासी हैं और विपरीत माहौल के बीच काम करते हुए उन्होंने कृषि पत्रकारिता के क्षेत्र में एक पहचान बनायी है। वे मेरे और कृषि पत्रकारिता के चर्चित हस्ताक्षर अरविंद शुक्ल दोनों के प्रिय हैं।
खेती और ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकार और लेखक साथियों के हिस्से में वैसे भी अधिक कष्ट आते हैं। उनके हिस्से में भी आए और जो व्यक्ति राष्ट्रीय फलक पर चमक रहा है, उसे बस्ती के पुलिस प्रशासन ने एक नेता के इशारे पर फर्जी मुकदमे लाद कर बीते महीनों काफी प्रताड़ित किया। लेकिन बड़ा काम हमेशा प्रतिकूल माहौल में होना लिखा होता है। यह बृहस्पति और फार्म एन फूड पत्रिका के लिए भी गर्व की बात है कि एक प्रतिभाशाली युवा पत्रकार साथी को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के इतने प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

 

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