November 15, 2018

बूंदाबांदी के बीच यूरिया के घोल छिड़काव से लहलहायेगी फसल

पंचायत खबर टोली
-बरसाती बने मौसम का उठाएं लाभ, घोल के रूप में करें प्रयोग
-फसल की बेहतरी के लिए बेहतर हुआ मौसम
मऊ : मानसून समापन की ओर बढ़ रहा है लेकिन किसान भाईयों के लिए खुशी की बात है कि लगातार महीने भर प्रतिकूल बने मौसम के बाद भी सितंबर के पहले दिन ही हुई झमाझम बरसात हो रही है। यह सही समय है कि हमारे किसान भाई अपनी फसल के देखरेख और उसके प्रबंधन के काम में जुटें। इसके लिए किसानों को तुरंत वैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग करते हुए फसल प्रबंधन की दिया में तत्पर प्रयास करने की आवश्यकता है। अगेती व मध्यम प्रजाति में बाली आने के समय ही उर्वरक व दवा छिड़काव में पंरपरागत तरीकों को छोड़ वैज्ञानिक विधियों के प्रयोग से फसल सुरक्षा के साथ उत्पादन वृद्धि की संभावना बनती है। साथ ही घास एवं खर—पतवार नियंत्रण के साथ कीट व रोग से मुक्ति के लिए भी किसान भाईयों को सजगता बरतनी होगी। कृषि वैज्ञानिकों ने अगले एक पखवारे तक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है।


क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.वीके सिंह बताते हैं कि मानसूनी हुए मौसम का पूरा लाभ उठाने का समय है। यूरिया का घोल बनाकर छिड़काव करने से किसानों को दोहरा लाभ होगा। छह किग्रा यूरिया को 150 लीटर पानी में घोल बनाकर इस समय छिड़काव करना लाभकारी होगा। घोल चिपकाने वाला बाजार में मिलने वाला स्टीकर या डिटरजेंट पाउडर मिलना चाहिए। इससे तत्काल आर्थिक लाभ होने के साथ पौधों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। छिड़काव के दौरान किसान फ्लैटपेन नाजिल का प्रयोग करें। फव्वारा के रूप में यूरिया का छिड़काव करने पर एक ही समय में पूरा पौधा इससे प्रभावित हो जाएगा। इस दौरान किसानों को कीट व रोग प्रबंधन के प्रति भी सचेत रहना होगा। झौंका रोग, सीथ ब्लाइट रोग, झुलसा रोग का प्रभाव इसी समय बढ़ता है। इसके साथ तना छेदक कीट बालियां निकलते ही सक्रिय होता है। इससे बचाव के लिए किसानों को फसल पर पैनी नजर रखनी होगी।

खाली में बोएं तोरिया-राई
डा. सिंह बताते हैं कि जिस खेत में किसान फसल न लगा पाएं हों उसके प्रयोग का यह सबसे उचित समय है। सितंबर के पहले पखवारे में खाली खेतों में तोरिया व राई की बुआई कर देना चाहिए। तोरिया में भवानी, पीटी-303, टाइट-9 व नरेद्र अगेती राई अच्छी प्रजातियां होती हैं। चार किग्रा बीज प्रति हेक्टेयर की दर से इसकी बुआई करना चाहिए। 80 किग्रा नाइट्रेजन, 40 किग्रा फास्फोरस तथा 40 किग्रा पोटाश प्रति बीधा की दर से छिड़काव करना चाहिए।

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एक दशक से भी ज्यादा से पत्रकारिता में सकिय। संसद से लेकर दूर दराज के गांवो तक के पत्रकारिता का अनुभव। ग्रामीण समाज व जनसरोकार से जुड़े विषयों पर पत्र पत्रिकाओं में लेखन। अब पंचायत खबर के जरिये आपके बीच।

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