November 16, 2019

हिंसा प्रभावी देशों में गोली से कम पानी से ज्यादातर बच्चों की मौत— यूनिसेफ


यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जिन देशों में लंबे समय से संघर्ष चल रहा है वहां 15 साल से ​कम आयु वर्ग के बच्चों में पानी संबधित रोगों का खतरा बहुत अधिक हुआ है, जो प्रत्यक्ष हिंसा में मरने वालों की अपेक्षा औसतन तीन गुणा है। इन इलाकों में बच्चों में होने वाली ज्यादातर बीमारियां जल, सेनिटेशन व हाईजीन की कमी के कारण होती हैं।
वाॅटर अंडर फायर नामक रिपोर्ट में 16 ऐसे देश में अध्ययन किया गया, जो लंबे समय से हिंसा और संघर्ष के दौर से गुजर रहे है, यहां पांच साल से कम आयु वालें बच्चों की डायरिया संबधित रोगों से होने वाली मृत्यु का आंकड़ा 20 गुणा अधिक हुआ है।
यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिता फाॅर ने बताया कि दीर्घकालीन संघर्षों वाले इलाकों में रहने वाले बच्चों को कई बीमारियों का खतरा है अधिकतर की बच्चों को सुरक्षित जल नहीं मिल पाता है। वास्तविकता यह है कि गोलियों से मरने वालों की अपेक्षा सुरक्षित जल के अभाव में इन इलाकों में बच्चों की मौत हो रही है। सुरक्षित जल,स्वच्छता और हाईजीन के अभाव में इन बच्चों में कुपोषण और पानी संबंधित बिमारियों जैसे डायरिया,टाइफाइड, हैजा और पोलियो खतरा बढ़ा है। इसमें भी लड़कियां खास तौर पर प्रभावित होती हैं। वे बाहर पानी लेने जाती हैं या खुले में शौचालय करने का जोखिम उठाती हैं तो उन पर यौन शोषण का खतरा मंडराता है,जब वे स्नान करती हैं और माहवारी हाईजीन का प्रबंधन करती हैं तो उस दौरान लज्जित महसूस करती हैं। और अगर उनके स्कूलों में पानी व स्वच्छता की माकूल सुविधाएं नहीं हैं तो वे माहवारी के दौरान अपनी कक्षाओं से गैरहाजिर रहती हैं।
ये खतरे संघर्ष के दौरान और भी बढ़ जाते हैं जब अधोसंरचना को नष्ट करने, कमिर्याें को घायल करने के लिए जानबूझ कर और अंधाधुध हमले
किए जाते हैं और पानी,स्वच्छता व हाईजीन तंत्र को सुचारू रखने वाली पाॅवर की आपूर्ती बंद कर दी जाती है। सशस्त्र संघर्ष मरम्मत करने वाले
आवश्यक उपकरणों और उपभोग्य वस्तुएं जैंसे कि ईंधन और क्लोरीन तक पहुंच को भी सीमित कर देते हैं- जोकि समाप्त की जा सकती है,उसकी पूर्ति को सीमित किया जा सकता है,उसे दूसरे काम में लगाया जा सकता है और वितरण के लिए अवरुद्व की जा सकती हैं। अक्सर,आवश्यक सेवाओं से जानबूझ कर इंकार किया जाता है।
फाॅर ने कहा-‘ पानी व स्वच्छता पर किए गए जानबूझकर हमले संवेदनशील बच्चों पर किए गए हमले हैं। पानी एक बुनियादी अधिकार है।
यह जिंदगी की जरूरत है। ’ यूनिसेफ संघर्षरत देशों में सुरक्षित पेय जल और पर्याप्त सेनिटेशन सेवाओं को मुहैया कराने के लिए काम करता है, यह काम जल प्रणाली को बेहतर बनाकर व मरम्मत करके,पानी को ट्रकों में भरकर, शौचालय बनाने के जरिए और हाईजीन प्रथाओं बावत जागरूकता को प्रोत्साहित करके किया जा रहा है।
यूनिसेफ सरकारों और भागीदारों से आहवान करता हैः
जल और स्वच्छता संबंधी अधोसंरचना व कर्मियों पर हमले बंद करो।
जीवन रक्षक मानवीय अनुक्रियाओं को टिकाऊ पानी और सभी के लिए सेनिटेशन सिस्टम के विकास से लिंक करें।
आपातकाल में उच्च गुणवत्ता वाली पानी व स्वच्छता सेवाएं लगातार मुहैया कराने के लिए सरकारों और सहायता करने वाली एंजेसियों की क्षमता को सुदृढ़ करें।
भारत में पेयजल
भारत ने पेयजल सेवाओं के क्षेत्र में लगभग सार्वभाौमिक कवरेज हासिल कर ली है। फिर भी,ग्रामीण आबादी का अधिकांश हिस्सा सुरक्षित रूप से  प्रंबधित पेय जल का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, जैसा कि स्थाई विकास लक्ष्य 6 के तहत परिभाषित किया गया है। इस परिभाषा में ऐसे जल की उपलब्धता को शमिल किया गया है,जो प्रदूषण से मुक्त है और परिसर में ही उपलब्ध है। इस परिभाषा के अंतर्गत बेसलाइन बताती है कि कुल ग्रामीण आबादी का केवल 49 प्रतिशत की ही सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेय जल तक पहुंच है।
ग्रामीण भारत को सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल तक पहुंच वाली जरूरत को लगातार मुहैया कराने वाला मुददा बढ़ी हुई पर्यावरणीय चुनौतियों, जिनका आज भारत सामना कर रहा है,की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है। 2016 में सूखे से 302 जिलों के करीब 330 मिलियन लोग
प्रभावित हुए थे,और भारत के आधे जिले बाढ़ संभावित हैं। जलजनित रोगों और खराब स्वच्छता से होने वाली क्षति बहुत ज्यादा है, जबकि इसमें से ज्यादातर रोकथाम या उपचार के योग्य है। 2015 में भारत ने पांच साल से कम आयु वाले सालाना 117,300 बच्चे डायरिया रोग के कारण खोए यानी 320 हर रोज। ऐसा अनुमान है कि जलजनित रोगों का हर साल भारत पर अंदाजन 600 मिलियन डालर का आर्थिक बोझ भी पड़ता है।

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