April 21, 2019

हरियाणा के किसान आनलाइन के चक्कर में नहीं बेच पा रहे अपनी फसल

हरियाणा सरकार की मेरी फसल मेरा ब्यौरा योजना इन दिनों राज्य के किसानों के लिए मुसिबत का सबब बनी हुई है। इन दिनों नई अनाज मंडी में सरसों बचने आने वाले किसान इससे खासे परेशान है, क्योंकि पहले दिन केवल एक किसान को छोड़ कोई दूसरा किसान अपनी फसल एजेंसी को नहीं बेच पाया। हिसार के आस—पास के गांवों से आए किसान पॉलिसी नियमों में ऐसे उलझ गए कि अपनी फसल तक नहीं बेच पाए। किसानों का यह दर्द सरकारी अधिकारियों को नजर नहीं आया। वह नियमों का हवाला देते हुए खुद को मजबूर कर सहानुभूति लेने में लगे रहें। लेकिन अखिल भारतीय किसान सभा ने पॉलिसी के कारण सरकारी खरीद नहीं होने को लेकर हैफेड कार्यालय के बाहर धरना दिया। धरने पर बैठे किसान नेताओं का समर्थन मंडी में आए किसानों ने भी किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं मंडी में आए किसानों ने मांग की कि सरकार ने सरसों खरीद को लेकर जो पॉलिसी बनाई है। उसमें बदलाव किया जाना चाहिए। खरीद के मापदंड इस प्रकार हैं। सरसों की खरीद केवल उन्हीं किसानों से की जाएगी। जिन्होंने अपना पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्यौरा योजना के तहत करवाया है।

ऐसे ही एक किसान वीरेन्द्र के मुताबिक सरकारी खरीद शुरू होने पर मंडी में सरसों बेचने के लिए सुबह से भटक रहा हूं। खरीद केंद्र वाले कहते है कि पहले पंजीकरण करवाओ। फसल पॉलिसी के कारण सरसों नहीं बेच पा रहा हूं।

वहीं हैफेड के अधिकारी कहते है कि सरसों की मंडी में सरकारी खरीद शुरू कर दी गई है। 28 अप्रैल तक सरसों की खरीद जारी रहेगी। मेरी फसल मेरा ब्यौरा योजना के तहत पंजीकरण करने वाले किसानों की ही फसल खरीदी जा रही है। प्रशासन की ओर से सभी गांवों की तारीख अनुसार लिस्ट जारी की गई। उसी अनुरूप किसानों की सरसों खरीदी जाएगी। पहले दिन किसान ही नियमों के तहत फसल बेच पाया है।

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