March 24, 2019

‘सैनिटेशन इज मेडिटेशन’: चिदानंद सरस्वती

 

‘इंडिया फस्ट तो टॉलेट मस्ट’ और ‘सैनिटेशन इज मेडिटेशन’ के उद्घोष के साथ परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने ऋषिकेश के नजदी​क नवनिर्मित बायो डाइजेस्टर टॉयलेट (जैविक शौचालय) का लोकार्पण किया। बीएचएल के सीएसआर कार्यक्रम के तहत इन टॉयलेट का निर्माण करवाया जा रहा है। इस शौचालय का लाभ रेलवे स्टेशन पर आने जाने वाले सैकड़ों तीर्थ यात्रियों को मिलेगा।

इस मौके पर स्वामी चिदानंद ने कहा कि ऋषिकेश योग की नगरी है। प्रतिवर्ष अनेक देशों के श्रद्धालु यहां गंगा दर्शन, योग व ध्यान के लिए आते हैं। हमारा कर्तव्य है कि तीर्थनगरी के सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ, हरित और सुंदर बनाए रखें। जीवन में शौचालय का होना अत्यंत आवश्यक है। मेरे लिए तो सैनिटेशन इज मेडिटेशन है। स्वच्छता ही धर्म, पूजा, सेवा और कर्म है। अब एक कदम नहीं बल्कि हर कदम स्वच्छता की ओर बढ़ाने का वक्त आ गया है।
इस अवसर पर बीएचईएल के महाप्रबंधक संजय गुलाटी ने कहा कि भविष्य में भी बीएचईएल, जीवा और फिक्की मिलकर सामाजिक कार्यों में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। फिक्की के राकेश सूद ने कहा कि तीर्थनगरी में जैविक शौचालय की दो यूनिट बनाना वास्तविक सेवा कार्य है। रेलवे स्टेशन ऋषिकेश में दिव्यांगों के लिए भी विशेष शौचालय बनाया गया है।

बता दे कि बीएचईएल अपने सीएसआर फंड से ऋषिकेश के आस—पास 25 ऐसे परिसरों का निर्माण करवा रहा है, जिसमें से 17 को पूरा कर लिया गया है। इन सभी शौचालयों का निर्माण उत्तराखंड़ के चार धाम मार्ग किया जाएगा। पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने वर्ष 2015 में परमार्थ निकेतन घाट पर इस योजना का शुभारंभ किया था। जहां परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने भूमि पूजन और शिला पूजन कर इस परियोजना को हरी झंड़ी दिखाई थी। इस परियोजना की सफलता भेल, फिक्की और जीआईडब्ल्यूए और जीएपी के बीच एक नई साझेदारी का निर्माण करेगी।

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