August 21, 2019

विश्व के 43 देशों में स्वच्छता का संदेश देकर साइकिल यात्रा ​हरिद्वार पहुंची

साइकिल पर विश्व के चार उपमहाद्वीपों के देशों की यात्रा कर ईकोलाजिस्ट (पारिस्थितिकी) अभिषेक मिश्रा परमार्थ निकेतन पहुंचे। उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से आशीर्वाद प्राप्त कर विश्व तिरंगा यात्रा की शुरूआत की थी। अभिषेक मिश्रा जी ने विश्व विख्यात परमार्थ गंगा आरती में सहभाग कर स्वामी जी महाराज का आशीर्वाद लिया।
विश्व स्तर पर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और विश्व शान्ति के लिये किये जा रहे वैश्विक कार्यो से प्रेरित होकर अभिषेक साइकिल से विश्व भ्रमण का निर्णय लिया। मार्च 2016 में विश्व भ्रमण यात्रा की शुरूआत की, जिसके अंर्तगत अब तक विश्व के चार महाद्वीपों के 43 देशों की 60 हजार किलोमीटर की यात्रा पूर्ण की।
अभिषेक के मुताबिक सबसे पहले मैने जमर्नी से अपनी यात्रा शुरू कि तत्पश्चात डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड, स्लोवेनिया, रूस, बेलारूस, लिथुआनिया, पोलैण्ड, यूक्रेन, चेक गणराज्य, आस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, सार्बिया, क्रेयेशिया, बोत्सवाना, ग्रीस, इटली, स्विटजरलैण्ड, फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैण्ड, स्काटलैण्ड, आयरलैण्ड, इंग्लैण्ड, आस्ट्रेलिया, फिज़ी, न्यूजीलैण्ड, विटिकन सीटी, कनाडा, स्पेन, मैक्सिको, पुर्तगाल, अमरीका, लिक्टेन्स्टाइन, लग्ज़मबर्ग अन्य देशों का भम्रण किया। वहां जाकर वहां पर रहने वाले भारतीय परिवारों से मिला अनेक विश्वविद्यालयों में सेमिनारों का आयोजन कर विश्व बन्धुत्व, विश्व शान्ति और पर्यावरण संरक्षण हेतु युवाओं को प्रेरित किया।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भारत की युवा शक्ति अपने अवकाश के समय को सेवा कार्यों में लगायें, राष्ट्र सेवा में लगायें। राष्ट्र और समाज के उत्थान में बढ़-चढ़ कर अपना योगदान प्रदान करें। अवकाश में भी सेवा के आकाश को छुये। आध्यात्मिक मूल्याों के साथ अपने कर्तव्यों को पूरा करें; जीवन में सेवा कार्यों को स्थान दें तथा अपनी शक्तियों को सकारात्मक दिशा में अग्रसर करे। स्वामी जी ने कहा कि हमारी संस्कृति ’वेदों से विमान तक उपनिषदों से उपग्रह तक’ के विकास की संस्कृति है। हम विकास तो करे पर अपनी जड़ों से भी जुुड़े रहे। जड़ों से खोखला हुआ वृक्ष ज्यादा दिनों तक हरा-भरा नहीं रह सकता उसी प्रकार जड़ों से; संस्कृति से; संस्कारों से अलग होकर हमारे राष्ट्र का युवा भी उस गौरव को प्राप्त नहीं कर सकता जिसका वास्तव में वह अधिकारी है। स्वामी जी ने कहा कि अब आ गया है कि हम प्रकृति और पर्यावरण के विषय में चिंतन करे; स्वच्छ जल व शुद्ध वायु के बारे में सोचे और प्रदूषण मुक्त भारत के निर्माण के लिये आईये मिलकर कदम बढ़ायें।’
अभिषेक मिश्रा जी ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के विचारों से प्रभावित होकर मैने विश्व के दूसरे देशों में जाकर वहां के पर्यावरणविदों एवं युवाओं से निवेदन किया कि हम सभी हाइजीन, सैनिटेशन और पर्यावरण की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, इस हेतु अपने-अपने तकनीकी को सांझा कर हम बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते है। साथ ही वहां पर जाकर सतत विकास, जैविक खेती जैसे अनेक मुद्दोें पर चर्चा की।

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