June 06, 2020

मेवात जिले में पानी बना जहर

मेवात जिलें में फ्लोराइड बीमारी से ग्रस्ति लोगों की संख्या मे एकाएक इजाफा देखा गया है। इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या करीब 4 हजार जा पहुंची है। नूंह के जिला अस्पताल के सरकारी आंकड़े बताते है कि डेंटल फ्लोरिसिस से पीड़ित 3758 लोगों की अब तक पहचान हो चुकी है। इसके अलावा अन्य लक्षण वाले करीब 58 पीड़ित सामने आ चुके हैं। यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है।
इस इलाके में पानी में बढ़ रही फ्लोराइड की मात्रा के कारण लोगों में फ्लोरिसिस नाम की एक गंभीर ​बीमारी फैल रही है। हालातों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में फलोरोसिस बीमारी से बचाव के लिए राष्ट्रीय फलोरोसिस रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के गांवों तथा स्कूलो में सर्वे द्वारा फलोरीसिस ग्रसित लोगों तथा बच्चों की पहचान की जा रही है।
जानकारों का कहा है कि इस बीमारी से बचने के लिए तुरंत अपने पेयजल को टेस्ट कराएं। इसके लिए जिला अस्पताल में सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा मांडीखेडा अस्पताल में फलोरोसिस कंसल्टेन्ट मौजूद है। जिससे इस बिमारी से जुडी अधिक जानकारी तथा सलाह ले सकते है। फलोरोसिस से हुई समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भरपूर मत्रा में सब्जियों, फलों, दूध तथा दुग्ध उत्पादों का सेवन करें। फलोरोसिस बिमारी की अधिक जानकारी प्राप्त करनें के लिए अपने निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र या जिला अस्पताल में सम्पर्क करें।
इस बीमारी के पैर पसारने के कारण स्वास्थ्य विभाग लोगों को फ्लोराइड टूथ पेस्ट, गुटका, पान, तम्बाकू तथा काला नमक के सेवन से बचने की सलाह दे रहा है। फलोरीसिस बीमारी से ग्रसित मरीजों का उपचार व सम्बन्धित जानकारी जिला अस्पताल माण्डीखेडा में उपलब्ध है तथा ज्यादा जटिल मरीजों को मेडिकल कॉलेज नल्हड़ रेफर किया जाता है। हड्डियों में दिखते हैं लक्षण, फलोरोसिस बिमारी के मुख्य लक्षण हड्डीडयों में दिखते हैं। इसके अलावा पतली उल्टी आना, भूख कम लगना, पेट में दर्द होना। गैस बनना, पैट फूलना, दांतों मे पीले धब्बे पडना, बार-2 पेसाब आना, अत्याधिक न्यास लगना, मांसपेसियों तथा जोडों में दर्द रहना लम्बी दूरी तक चलनेमे असमर्थता आदि कारण है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पानी मे फ्लोराइड की उच्चतम मात्रा 1.5 पीपीएस तय की है। लेकिन मेवात के पेयजल में इसकी मात्रा 10 गुना अधिक पाई गई है। जो एक चिंताजनक बात है।

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